श्रीलंका के राष्ट्रपति सिरिसेना का नया बयान, भारत की चिंताएं दोगुनी
कोलंबो। बुधवार तक श्रीलंका के चुनावों के बाद जो माहौल बन रहा था, उससे भारत में एक सकारात्मक माहौल बन रहा था। लेकिन श्रींलका के राष्ट्रपति का नया बयान भारत की चिंताओं को बढ़ा सकता है। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैलीपाल सिरिसेना ने साफ कर दिया है कि चीन को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

चीन के सरकार न्यूजपेपर ग्लोबल टाइम्स ने इस बाबत एक खबर छापी है। ग्लोबल टाइम्स में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना का वह बयान प्रमुखता से छापा गया है जिसमें उन्होंने कहा, 'श्रीलंका चीन की अनदेखी नहीं कर सकता है।'
भारत में खुशी इस बात को लेकर थी क्योंकि चुनावों में चीन के समर्थक और चीन के लिए एक नरम रवैया रखने वाले पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।
चुनावों के बाद अब रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं, हालांकि उन्हें भी सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल नहीं हो सका है।
चीन की मीडिया ने राजपक्षे की हार को काफी प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस समय राजपक्षे राष्ट्रपति थे श्रीलंका को चीन से कई प्रोजेक्ट्स के लिए करीब पांच अरब डॉलर का कर्ज मिला था। जैसे ही सिरिसेना सत्ता में आए उन्होंने चीन के
साथ हुईं सभी डील्स का रिव्यू करने का आदेश दिया।
चीन को डर था कि कहीं सिरिसेना इन डील्स को कैंसिल न कर दें लेकिन सिरिसेना ने चीन को भरोसा दिलाया है कि वह ऐसा नहीं करेंगे। ग्लोबल टाइम्स ने भी उम्मीद जताई कि अब चुनावों के बाद नई सरकार की वजह से इन परियोजनाओं को फिर से स्पीड मिल सकेगी।
राष्ट्रपति सिरिसेना ने अपनी नई विदेश नीति बनाते हुए सभी बड़े देशों से संतुलित रिश्ते रखने का फैसला किया था। उन्होंने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि बाहरी ताकतें नहीं चाहती हैं कि श्रीलंका-चीन रिश्ते मजबूत हों। लेकिन चीन और श्रीलंका के रिश्ते किसी एक राजनीतिक दल या नेता पर आधरित नहीं हैं।
वैसे यहां यह बात भी ध्यान देने वाली चीन, श्रीलंका में अपनी गतिविधियों में तेजी ला रहा है। पिछले वर्ष श्रीलंका के समंदर में चीन की परमाणु पनडुब्बी ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी थीं। अब सिरिसेना का नया बयान निश्चित तौर पर भारत की चिंताएं बढ़ाने वाला है।












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