क्या भारत ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया को देश से भागने में मदद की? सरकार का आया जवाब

श्रीलंकन राष्ट्रपति के मालवीद भागने के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए गये, कि भारत ने गोटाबाया राजपक्षे के देश से बाहर निकलने के लिए सुविधाएं मुहैया कराई।

कोलंबो/नई दिल्ली, जुलाई 13: 1948 में आजादी के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट में फंसने के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति ने व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देने का वादा किया था, लेकिन इस्तीफा देने से कुछ घंटे पहले ही श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं। वहीं, भारत सरकार ने उन रिपोर्ट्स को आधारहीन बताया है, जिनमें दावा किया गया है, कि भारत ने गोटाबाया राजपक्षे को देश से भागने में सुविधाएं मुहैया कराई हैं। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबित, गोटाबाया राजपक्षे, उनकी पत्नी और दो अंगरक्षकों ने श्रीलंकाई वायु सेना के विमान से मालदीव की राजधानी माले के लिए उड़ान भरी है और श्रीलंकाई वायु सेना ने बुधवार को एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

देश छोड़कर भागे श्रीलंकन राष्ट्रपति

देश छोड़कर भागे श्रीलंकन राष्ट्रपति

श्रीलंका की वायुसेना ने अपने बयान में कहा है कि, "संविधान के प्रावधानों के तहत और सरकार के अनुरोध पर, श्रीलंका वायु सेना ने राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और दो सुरक्षा अधिकारियों को मालदीव के लिए उड़ान भरने के लिए आज तड़के एक विमान उपलब्ध कराया।" समाचार एजेंसियों ने पहले अज्ञात सरकारी और आव्रजन अधिकारियों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति के माले के लिए प्रस्थान की सूचना दी थी। राष्ट्रपति ने कहा था कि, वह सामुहिक सरकार बनाने के लिए रास्ता साफ कर रहे हैं और वो 13 जुलाई को इस्तीफा दे देंगे। वहीं, राष्ट्रपति भवन में अभी भी हजारों प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं और श्रीलंका आर्थिक संकट के साथ साथ राजनयिक संकट से भी जूझ रहा है। गोटाबाया राजपक्षे, जिन्होंने एक दशक पहले अपने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के प्रशासन में रक्षा सचिव के तौर पर काम किया था और बेरहमी से तमिलों के विद्रोह को कुचला था, उन्हें साल 2019 में देश की सुरक्षा और स्थिरता के वादे के नाम पर राष्ट्रपति चुना गया था।

भारत ने आरोपों को नकारा

वहीं, श्रीलंकन राष्ट्रपति के मालवीद भागने के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए गये, कि भारत ने गोटाबाया राजपक्षे के देश से बाहर निकलने के लिए सुविधाएं मुहैया कराई, जिसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त की तरफ से बकायदा बयान जारी करते हुए उन आरोपों को सिरे से नकार दिया गया है। भारतीय उच्चायोग स्पष्ट रूप से निराधार और अफवाह फैलाने वाली मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया और बयान जारी करते हुए कहा कि, इस तरह की रिपोर्ट्स पूरी तरह से निराधार हैं, कि गोटाबाया राजपक्षे के हालिया देश से बाहर की यात्रा में भारत की तरफ से सुविधा प्रदान की गई। भारत सरकार हमेशा श्रीलंका के लोगों की मदद करती रहेगी। आपको बता दें कि, श्रीलंका संकट के दौरान भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए श्रीलंका को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं और 3.8 अरब डॉलर की मदद श्रीलंका के लोगों को दी है, लिहाजा कई भारत विरोधी तत्व को ये रास नहीं आ रहा है, कि श्रीलंका में भारत की जय-जयकार हो, लिहाजा भारत को बदनाम करने की नियत से इस तरह की आधारहीन और झूठी रिपोर्ट्स प्रकाशित की जाती हैं और इसमें कोई शक नहीं, कि इसके पीछे चीन का भी हाथ हो सकता है।

देश से भागने के पीछे का मकसद

देश से भागने के पीछे का मकसद

दरअसल, श्रीलंका के राष्ट्रपति को देश की संविधान की तरफ से छूट मिला हुआ है, कि जब तक कोई शख्स राष्ट्रपति की कुर्सी पर रहेगा, उसे गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया जा सकता है और गोटाबाया राजपक्षे इसी डर से बतौर राष्ट्रपति देश से भागे हैं, कि उन्हें हिरासत में ना ले लिया जाए। इसीलिए, श्रीलंकाई वायु सेना ने एक बयान में कहा कि राजपक्षे, उनकी पत्नी और दो अंगरक्षकों को मालदीव के लिए उड़ान भरने के लिए अधिकारियों द्वारा पूरी मंजूरी मिली थी। श्रीलंकाई वायु सेना के मीडिया निदेशक ने कहा कि, 'श्रीलंकाई राष्ट्रपति, 2 अंगरक्षकों के साथ देश की फर्स्ट लेडी को मालदीव के लिए उड़ान भरने के लिए आव्रजन, सीमा शुल्क और अन्य कानूनों के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्ण अनुमोदन के अधीन किया गया था। उन्हें 13 जुलाई की सुबह वायु सेना के विमान उपलब्ध कराए गए थे"। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के दस्तावेजों से भरे एक सूटकेस, जिसमें करीब 50 हजार डॉलर्स थे (17.85 मिलियन श्रीलंकन रुपये), उसे कोलंबो की एक अदालत ने अपने संरक्षण में ले लिया है। इसे प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन से बरामद किया था।

आज दे सकते हैं पद से इस्तीफा

आज दे सकते हैं पद से इस्तीफा

गोटाबाया राजपक्षे ने वादा किया था कि वह "सत्ता के शांतिपूर्ण परिवर्तन" का रास्ता साफ करने के लिए बुधवार को इस्तीफा दे देंगे। लेकिन, राष्ट्रपति के देश छोड़ने के बाद भी अध्यक्ष को अभी तक त्याग पत्र नहीं मिला है। यदि वह पद छोड़ देते हैं, तो प्रधान मंत्री रानिल विक्रमसिंघे स्वतः ही कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाएंगे, जब तक कि संसद राष्ट्रपति पद के लिए एक सांसद का चुनाव नहीं कर लेती। राष्ट्रपति का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो रहा है। हालांकि, विक्रमसिंघे ने भी एकता सरकार बनाने पर सहमति बनने पर पद छोड़ने की इच्छा की घोषणा की है। संसदीय अध्यक्ष ने कहा कि अगर राजपक्षे बुधवार को इस्तीफा देते हैं, तो मतदान 20 जुलाई को होगा। नई सरकार की घोषणा के लिए उत्तराधिकार की प्रक्रिया 30 दिनों में पूरी करनी होगी।

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