‘ना गैस सिलेंडर है, ना खाने को खाना है...’ भूखे पेट श्रीलंका में लोग कर रहे प्रदर्शन, भारत ने भेजी बड़ी मदद

श्रीलंका के विनाशकारी आर्थिक संकट के बीच भारत लगातार श्रीलंका की मदद कर रहा है और अब भारत सरकार ने श्रीलंका में 65 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति करने का फैसला लिया है।

कोलंबो, मई 14: श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच लोगों की परेशानी काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है और लोगों के पास अब ना खाने के लिए अनाज बचा है और ना ही खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर ही बचे हैं। जिसको लेकर श्रीलंका के अलग अलग हिस्सों में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, सरकार बेबस बनी हुई है। श्रीलंका के पास खजाने में विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो चुका है और श्रीलंका इस स्थिति में ही नहीं है, कि वो गैस सिलेंडर खरीद सके। लिहाजा, अब लोगों का गुस्सा फूट रहा है।

लोगों का विरोध प्रदर्शन

लोगों का विरोध प्रदर्शन

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में स्लेव आइलैंड पीएस के बाहर भी स्थानीय लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया है और स्थानीय लोगों का कहना है कि, पिछले एक महीने से उन्हें एलपीजी सिलेंडर नहीं मिला है और ना ही उनके पास खाना खाने के लिए खाद्य पदार्थ बचे हैं। एएनआई से बात करते हुए श्रीलंका के स्थानीय लोगों ने कहा कि, ‘गैस नहीं हैं, खाने के लिए भी कुछ नहीं है। हम कल रात से यहीं हैं। अब कहते हैं कि उनके पास गैस सिलेंडर नहीं है। मुझे 2 महीने से गैस नहीं मिली है'।

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    लगातार मदद करता भारत

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    श्रीलंका के विनाशकारी आर्थिक संकट के बीच भारत लगातार श्रीलंका की मदद कर रहा है और अब भारत सरकार ने श्रीलंका में 65 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति करने का फैसला लिया है। डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में श्रीलंकाई उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा ने गुरुवार को भारत सरकार के उर्वरक विभाग के सचिव राजेश कुमार चतुर्वेदी के साथ बैठक की, जहां इस मुद्दे पर चर्चा की गई। श्रीलंका के उच्चायोग की तरफ से जारी एक संदेश में कहा गया कि, ‘उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा ने भारत के उर्वरक विभाग के सचिव राजेश कुमार चतुर्वेदी से मुलाकात की और श्रीलंका में मौजूदा याला खेती के मौसम के लिए आवश्यक 65,000 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति करने के भारत के फैसले के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।"

    भारत करेगा खाद की नियमित सप्लाई

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    समचार एजेंसी एएनई की रिपोर्ट के मुताबिक, डेली मिरर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, बैठक में श्रीलंका के उच्चायोग मोरागोडा और भारतीय सचिव राजेश कुमार चतुर्वेदी, दोनों ने संभावित तरीकों और उपायों पर चर्चा की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत से श्रीलंका को रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति मौजूदा क्रेडिट लाइन और उससे आगे की निरंतर आपूर्ति की जाए। इसके अलावा, भारत से यूरिया उर्वरक के निर्यात प्रतिबंध के बावजूद, भारत सरकार, श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर, मौजूदा 1 अरब अमेरिकी डॉलर की भारतीय क्रेडिट लाइन के तहत संकटग्रस्त द्वीप देश को 65,000 मीट्रिक टन यूरिया प्रदान करने पर तैयार हो गई है। इससे पहले, श्रीलंका सरकार ने जैविक कृषि की ओर बढ़ने की अपनी योजना के तहत पिछले वर्ष रासायनिक उर्वरकों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, चीन ने श्रीलंका को लाखों टन खराब जैविक उर्वरक भेज दिया था और जब श्रीलंका ने पैसे देने से इनकार किए, तो चीन ने श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक पर ही प्रतिबंध लगा दिए थे।

    खाद पर अचानक फैसले का गंभीर असर

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    डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष रूप से, यही कारण था कि श्रीलंका सरकार ने कई प्रमुख फसलों पर प्रतिबंध को रद्द कर दिया था। इसके अलावा, भारत ने वर्ष की शुरुआत से ऋणग्रस्त द्वीप देश को ऋण, क्रेडिट स्वैप और क्रेडिट लाइनों में 3 अरब अमेरीकी डालर से अधिक की सहायता देने का वादा किया है। भारत ने भी श्रीलंका की नई सरकार के साथ काम करने की इच्छा जताई है। इस बीच, श्रीलंका के नये प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को रिकॉर्ड छठे कार्यकाल के लिए श्रीलंका का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने श्रीलंका के लोगों को अपना आश्वासन दिया है कि वह द्वीप देश को पेट्रोल, डीजल और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। वर्तमान में, श्रीलंका स्वतंत्रता के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसमें भोजन और ईंधन की कमी, बढ़ती कीमतों और बिजली कटौती से बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं।

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