Sri Lanka Blast: पीएम विक्रमसिंघे के मंत्री बोले इंटेलीजेंस ऑफिसर्स हमलों के बारे में जानते थे !
कोलंबो।
श्रीलंकाई राजधानी कोलंबो में ईस्टर के मौके पर रविवार को हुए एक के बाद एक आठ सीरियल ब्लास्ट्स ने एक दशक से चली आ रही शांति को भंग करके रख दिया है। यह ब्लास्ट्स इंटेलीजेंस एजेंसियों के अलर्ट के बावजूद हुए और अब सरकार पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। श्रीलंका की सरकार में मंत्री ने आतंकी संगठन तौहीद जमात की ओर से धमकी वाली उस चिट्ठी को भी ट्वीट कर दिया है जिसमें हमलों की बात कही गई थी। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>
हमले के बारे में जानती थीं एजेंसियां
11 अप्रैल को चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात की ओर से चिट्ठी लिखकर कैथोलिक चर्चों और भारत के हाई कमीशन पर सुसाइड अटैक की वॉर्निंग दी गई थी। इंटेलीजेंस एजेंसियों की ओर से अलर्ट भी जारी कर दिया गया था। श्रीलंकाई मंत्री हारिन फर्नांडो की ओर से चिट्ठी ट्वीट की गई है। उनका दावा है कि इंटेलीजेंस एजेंसियों को हमले के बारे में मालूम था। फर्नांडो, विक्रमसिंघे की सरकार में टेलीकम्यूनिकेशन मिनिस्टर हैं।
ऑफिसर्स पर हो कार्रवाई
उन्होंने कहा है कि हमलों की धमकी को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। इस चिट्ठी श्रीलंका के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के साइन भी हैं। फर्नांडो की मानें तो कुछ इंटेलीजेंस ऑफिसर्स इस घटना से वाकिफ थे और इसलिए कार्रवाई में देरी हुई। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उनके पिता को भी यही बात एक ऑफिसर से मालूम चली। फर्नांडो ने कहा है कि धमकी को नजरअंदाज करने पर गंभीर एक्शन लेने की जरूरत है।

पीएम ने कहा ऑफिसर्स ने नहीं दी कोई अपडेट
दूसरी तरफ श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि उन्हें प्लान के बारे में तो मालूम था लेकिन अधिकारियों की ओर से न तो उन्हें और न ही उनके मंत्रियों को किसी तरह की कोई अपडेट दी जा रही थी। विक्रमसिंघे के मुताबिक हमलों को लेकर जांच की जरूरत है लेकिन पहले हमलावरों को तलाशने पर उन्होंने जोर दिया। हमलों के बाद 24 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और देशभर में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

राष्ट्रपति पर विक्रमसिंघे का निशाना
हमलों में 290 लोगों की मौत हुई है जिसमें से 35 नागरिक विदेशी है। पांच भारतीय भी हमलों में मारे गए हैं। विक्रमसिंघे ने कहा कि अभी तक जितने भी नाम सामने आए हैं, वे सभी लोकल हैं। इसके बाद भी यह देखने की जरूरत है कि कहीं कोई विदेशी ताकतें तो इसमें शामिल नहीं थीं। श्रीलंका में सुरक्षाबलों का जिम्मेदारी राष्ट्रपति पर होती है। पिछले वर्ष हुए तख्तापलट के बाद से ही राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और पीएम विक्रमसिंघे के रिश्ते ठीक नहीं हैं। पीएम विक्रमसिंघे के बयान को राष्ट्रपति पर निशाना माना जा रहा है।












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