अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का मेगा मिसाइल डिफेंस ड्रिल, किम जोंग उन का आगबबूला होना तय
उत्तर कोरिया ने पिछले हफ्ते ही सॉलिड फ्यूल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया था। किम जोंग का कहना है, कि अब उनके पास अमेरिका तक हमला करने की क्षमता है।

South Korea, US, Japan hold missile defence drills: कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है और अब दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका ने मिलकर मेगा मिसाइल डिफेंस ड्रिल किया है, जिसके बाद उत्तर कोरिया की तरफ से और भी सख्त प्रतिक्रिया आने की आशंका जताई जा रही है।
सियोल की नौसेना ने कहा है, कि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने सोमवार को पूर्वी सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में त्रिपक्षीय मिसाइल रक्षा अभ्यास शुरू किया।
योनहाप समाचार एजेंसी ने बताया है, कि तीनों देशों की मिसाइल डिफेंस ड्रिल, उत्तर कोरिया की तरफ से आने वाले किस भी खतरे के प्रतिरोध के लिए है।
योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, "प्योंगयांग (उत्तर कोरिया की राजधानी) की उत्तजक कार्रवाईयों के बाद तीनों देश राष्ट्र सुरक्षा समन्वय को मजबूत कर रहे हैं।"
आपको बता दें, कि पिछले हफ्ते ही उत्तर कोरिया ने सॉलिड फ्यूल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइसल का सफल प्रक्षेपण किया है। दूसरी तरफ उत्तर कोरिया का कहना है, कि वो मिसाइल टेस्ट तब तक करता रहेगा, जबतक कोरियाई प्रायद्वीप से अमेरिकी दखल खत्म नहीं हो जाता।
डिफेंस ड्रिल का मकसद क्या है?
योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, ये अभ्यास एक कंप्यूटर-सिम्युलेटेड बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्य का पता लगाने, उसे ट्रैक करने, उससे संबंधित जानकारियां जुटाने के अभ्यास पर केन्द्रित था।
यानि, इस अभ्यास का मकसद ये है, कि अगर उत्तर कोरिया बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल करता है, तो वक्त रहते उसका पता लगाकर, उसे नष्ट किया जा सके।
दक्षिण कोरियाई नौसेना के एक अधिकारी ने कहा, कि "यह दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल खतरों के खिलाफ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च का जवाब देने के लिए हमारी नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करने का एक अवसर था।"
तीनों देशों ने पिछली बार फरवरी में इस तरह का तीन तरफा मिसाइल रक्षा अभ्यास किया था।
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 'डिफेंस ट्रायलेटरल टॉक' के तहत मिसाइल डिफेंस ड्रिल, एंटी- सबमरीन अभ्यास करने पर सहमति जताई थी, जिसका मकदस उत्तर कोरिया के खतरों से निपटना है।
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वहीं, अब माना जा रहा है, कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के इस मिसाइल डिफेंस ड्रिल को लेकर उत्तर कोरिया की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया आ सकती है और उत्तर कोरिया फिर से मिसाइलों का परीक्षण कर अपने गुस्से का इजहार कर सकता है।












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