'नेहरू का भारत' वाला सिंगापुर के प्रधानमंत्री की टिप्पणी 'अनुचित', उच्चायुक्त MEA में तलब
नई दिल्ली, 17 फरवरी: सिंगापुर के संसद में बहस के दौरान वहां के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग का भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उदाहरण देकर की गई एक टिप्पणी पर भारत को ऐतराज है। लूंग ने लोकतंत्र के मसले पर नेहरू की तारीफ तो की थी, लेकिन मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर भारत की मौजूदा लोकसभा पर कुछ 'आपत्तिजनक' टिप्पणी कर गए थे। लगता है कि इसी को लेकर भारत सिंगापुर से आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा था कि आज की तारीख में भारत की लोकसभा में लगभग आधे सांसदों पर 'हत्या और बलात्कार जैसे मामले दर्ज हैं।' सिंगापुर के पीएम की इस टिप्पणी को लेकर भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग को विदेश मंत्रालय में तलब भी किया गया था।

सिंगापुर के पीएम का 'नेहरू का भारत' वाला टिप्पणी 'अनुचित'-सरकारी सूत्र
सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि 'नेहरू का भारत' वाला सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग का वहां की संसद में दिया गया बयान भारत को 'स्वीकार्य' नहीं है और वह इसपर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज करेगा। सरकारी सूत्रों ने आज इसपर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है, 'सिंगापुर के प्रधानमंत्री की टिप्पणी अनुचित थी। हम सिंगापुर के साथ इस मसले को उठा रहे हैं।'
'नेहरू का भारत अब ऐसा हो गया है'
इससे पहले लूंग ने मीडिया रिपोर्ट का उदाहरण देकर कहा था कि, 'नेहरू का भारत अब ऐसा हो गया है, जहां लोकसभा के लगभग आधे एमपी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या और रेप जैसे केस भी शामिल हैं। वैसे, ये भी कहते हैं कि इनमें से कई पर आरोप राजनीति से प्रेरित होकर लगाए गए हैं।' इसी मामले में भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग को विदेश मंत्रालय में तलब भी किया गया था।
नेहरू की तारीफ की है
बता दें कि सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र के कार्य करने के तरीके को लेकर नेहरू का अपनी संसद में जिक्र किया है। वो कह रहे थे कि सिंगापुर के लोगों को जो व्यवस्था मिली है, आने वाली हर नई पीढ़ी को उसकी रक्षा करनी चाहिए और उसी पर आगे बढ़ना चाहिए। इसी दौरान वे नेहरू की तारीफ करते हुए बोले कि लोकतंत्र में कैसे काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकतर देश उच्च मान्यताओं और महान मूल्यों पर बने हैं और वहीं से आगे बढ़े हैं।
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उनके मुताबिक ' लेकिन कई बार, शुरुआती नेताओं और पिछली पीढ़ी से अलग दशकों में और धीरे-धीरे व्यवस्था बदल जाती है।' उन्होंने कहा, 'चीजें बड़ी ही तेजी के साथ बढ़ती हैं। स्वतंत्रता के लिए लड़ने और जीत हासिल करने वाले नेता कई बार अद्भूत साहस, संस्कृति और बेहतर क्षमता वाले असाधारण व्यक्तित्व के धनी होती हैं। वो एक तरह से आग से तप कर निकलते हैं और पुरुषों और राष्ट्रों के नेता के रूप में सामने आते हैं। जैसे डेविड बेन-गुरियन (इजरायल) हैं, जवाहरलाल नेहरू हैं, और हमारे पास भी हमारे अपने हैं।'












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