Shehbaz Sharif China Visit: शहबाज शरीफ का चीन दौरा.. क्या पाकिस्तानी PM की झोली भरकर भेजेगा चीन?
Shehbaz Sharif China Visit: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने देश के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी चीन की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं। इस यात्रा के दौरान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के दूसरे चरण की औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि चीन, जिसने पहले ही अरबों डॉलर पाकिस्तान में निवेश किए हैं, क्या वो कुछ अरब डॉलर और पाकिस्तान में निवेश करेगा, क्योंकी सीपीईसी प्रोजेक्ट सालों के बाद भी अधर में लटका हुआ है।

चीन ने साल 2015 में पाकिस्तान के साथ CPEC प्रोजेक्ट पर साइन किया था, जिसका बजट 62 अरब डॉलर का है और ये प्रोजेक्ट, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है, जिसका मकसद करीब 100 देशों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अरबों डॉलर के निवेश के माध्यम से चीन के भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करना है।
CPEC पाकिस्तान में बिजली संयंत्रों, सड़क और रेल नेटवर्क और ग्वादर के गहरे समुद्र में बंदरगाह के निर्माण की सुविधा प्रदान करेगा। चीन के लिए, यह परियोजना रणनीतिक महत्व की है, और यह उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान की लंबाई में राजमार्गों के माध्यम से हिंद महासागर तक सीधी पहुंच प्रदान करेगी।
CPEC को अभी तक कितनी कामयाबी मिली?
सीपीईसी के पहले चरण में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और बंदरगाह विकास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, लेकिन इस प्रोजेक्ट के विकास की रफ्तार इतनी धीमी रही है, कि इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
CPEC की वेबसाइट से मिले आंकड़ों से पता चलता है, कि प्रस्तावित 21 बिजली परियोजनाओं में से 14 पूरी हो चुकी हैं, दो निर्माणाधीन हैं और पांच अभी शुरू होनी हैं। प्रस्तावित 24 परिवहन-संबंधी परियोजनाओं (रेल और सड़क) में से सिर्फ 6 योजनाएं ही पूरी हो चुकी हैं, लेकिन 13 पर अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है। प्रस्तावित 9 विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) में से सिर्फ चार पर ही थोड़ा काम हो पाया है और बाकी 5 योजनाओं की अब कोई चर्चा नहीं है।
ग्वादर में बहुत सारे काम ठप पड़ गये हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चीनी विदेश नीति के एक प्रमुख विशेषज्ञ एंड्रयू स्मॉल ने 2022 में कहा था, कि बंदरगाह के आसपास की ज्यादा परियोजनाएं "पूरी होने से बहुत दूर हैं"। आधिकारिक चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, CPEC ने 2022 तक पाकिस्तान में 25.4 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया है।

क्यों ठप पड़ी हैं CPEC की योजनाएं
पाकिस्तान में भ्रष्टाचार और लालफीताशाही, देश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और बलूचिस्तान प्रांत, जहां ग्वादर स्थित है, वहां की खतरनाक स्थिति ने CPEC प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचाया है। अभी तक दर्जनों चीनी इंजीनियर आतंकवादी घटनाओं में मारे गये हैं।
इस परियोजना के कारण बलूचिस्तान प्रांत में भीषण हिंसा भड़क गई है और 2018 से आतंकवादी हमलों में दसियों चीनी नागरिक मारे गए हैं। इस वर्ष अब तक विभिन्न सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे कम से कम पांच चीनी नागरिक, बलूच आतंकवादियों के हमलों में मारे गए हैं।
ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े बलूच लोगों के लिए, ग्वादर लगातार आर्थिक अन्याय का प्रतीक बन गया है। CPEC से संबंधित बुनियादी ढांचे ने प्रांत में स्थानीय लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा नहीं की हैं, और गरीब आबादी को कोई आर्थिक लाभ नहीं पहुंचाया है। बल्कि, सीपीईसी प्रोजेक्ट के सारे फायदे अमीर लोगों को हुए हैं।
लान्झू विश्वविद्यालय के रुओशुई जियाओ ने 2023 के एक शोधपत्र ('चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के निर्माण के लिए पाकिस्तानी राजवंशीय राजनीति के निहितार्थ') में लिखा है, कि "पंजाब और सिंध के डेवलपर्स, जिन्होंने बलूचिस्तान में जमीनों को बेचकर बहुत धन कमाया था, उन्होंने स्कूल और अन्य सामाजिक बुनियादी ढांचे का कोई निर्माण नहीं किया, जैसा कि उन्होंने सहमति जताई थी।"
उन्होंने लिखा, "सरकार ने बलूचिस्तान के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के अपने वादे को पूरा नहीं किया, और बलूचिस्तान के ग्रामीण इलाके और भी गरीब होते जा रहे हैं।"
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हार्वर्ड में चाइना पब्लिक पॉलिसी पोस्टडॉक्टरल फेलो स्टेला होंग ने कहा, कि पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति चीन के लिए "सबसे तात्कालिक चिंता बनी हुई है" और यह पाकिस्तान में होने वाले चीनी निवेश को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा, "कंपनियों को अगर पाकिस्तानी SEZ या यहां तक कि सामान्य रूप से पाकिस्तान में ट्रांसफर होना है, तो उन्हें आतंकवाद पर लगाम लगाना होगा। लेकिन ऐसा लगता है, कि पाकिस्तान में काम करने में आने वाली मुश्किलों ने अब लोगों को निशान कर दिया है।"
डॉन अखबार ने गुरुवार को बताया है, कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीनियों को आश्वासन दिया है, कि उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन शुरू कर दिए हैं, और वे "चीनी श्रमिकों के जीवन की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।"
CPEC को लेकर उम्मीदें और सवाल
संकटग्रस्त पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए सीपीईसी को फिर से पटरी पर लाना प्राथमिकता है।
पाकिस्तान के योजना और विकास मंत्री अहसान इकबाल ने डॉन को बताया, कि सीपीईसी के दूसरे चरण में "एनर्जी, कृषि, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, क्रॉस-कंट्री रेल लाइन जैसे परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कशिश की जाएगी और ये सभी क्षेत्र बड़े निवेश की जरूरत वाले हैं।"
लेकिन जहां शहबाज शरीफ को उम्मीद है, कि बड़े पैमाने पर चीनी बुनियादी ढांचे के निवेश से पाकिस्तान की रुकी हुई अर्थव्यवस्था में जान आ सकती है, वहीं CPEC का सीमित ट्रैक रिकॉर्ड भरोसा नहीं जगाता। अमेरिका स्थित रिसर्च लैब एडडाटा के अर्थशास्त्री अम्मार मलिक ने अल जजीरा से कहा, कि "सीपीईसी ने निश्चित रूप से परिवहन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सुधार किया है...लेकिन इनका आर्थिक फायदा अभी तक नहीं हो पाया है।"
उदाहरण के लिए, CPEC को लेकर अनुमान लगाया गया था, कि सीपीईसी से पाकिस्तानियों के लिए 20 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 250,000 से भी कम नौकरियां पैदा हुई हैं।
वहीं, IMF की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊपर जो 126 अरब डॉलर का बाहरी ऋण है, उसमें से सिर्फ चीन का ऋण 30 अरब डॉलर का है, जबकि पाकिस्तान के ऊपर चीन का कर्जा 2013 से पहले सिर्फ 4 अरब डॉलर का था। जिससे पता चलता है, कि चीन ने कैसे इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को कर्ज के जाल में फांस लिया है। IMF की एक रिपोर्ट में यह भी पाया गया है, कि जुलाई 2021 और मार्च 2022 के बीच, पाकिस्तान की द्विपक्षीय ऋण सेवा का 80% से ज्यादा हिस्सा बीजिंग से आया है।
शहबाज शरीफ की झोली भरेगा चीन?
शहबाज शरीफ की यात्रा से पहले, पाकिस्तानी सरकार सीपीईसी के पुनरुद्धार के बारे में बात कर रही है। लेकिन, चीन की तरफ से सीपीईसी को लेकर सिर्फ एक अस्पष्ट बयान जारी किया गया है।
डॉन ने चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के हवाले से बताया है, कि "दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में चीन और पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान किया है, सीपीईसी पर व्यावहारिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया है, और अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में अच्छा संचार और समन्वय बनाए रखा है।"
लेकिन, डॉन में 'द ग्रेट सीपीईसी मृगतृष्णा' शीर्षक वाले एक लेख में व्यापार और अर्थव्यवस्था पर एक प्रमुख पाकिस्तानी टिप्पणीकार खुर्रम हुसैन ने लिखा है, कि "CPEC के पुनरुद्धार के बारे में शोर या तो इच्छाधारी सोच है, ज्यादा से ज्यादा जो वास्तव में चल रहा है उसे छिपाने का एक तरीका है।"
इस साल मार्च में, आईएमएफ ने पाकिस्तान को अपने 3 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज में से 1.1 अरब डॉलर की किश्त जारी करने पर सहमति व्यक्त की। पाकिस्तान सरकार फिलहाल IMF से 6-8 अरब डॉलर के नए ऋण पैकेज के लिए बातचीत कर रही है, लिहाजा सवाल ये है, कि पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट पर कहां से पैसे लाएगा और नहीं ला पाएगा, तो फिर झूठ क्यों बोल रहा है।
हुसैन ने लिखा है, कि "IMF नहीं चाहता, कि उसके संसाधनों का इस्तेमाल चीनी ऋण दायित्वों की पूर्ति के लिए किया जाए, और उसने पाकिस्तान सरकार से कहा है, कि समझौता तभी संभव होगा, जब कार्यक्रम अवधि के दौरान पाकिस्तान IMF ऋण का इस्तेमाल चीन का कर्ज चुकाने में ना करे। इसका मतलब है, कि अगले तीन वर्षों में जब पाकिस्तान को चीनी ऋण चुकाना होगा, तो फिर वो कहां से अरबों डॉलर लाएगा? और नहीं ला पाएगा, तो फिर पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट को कैसे चलाएगा और सबसे अहम बात, ऋण चुकाने के लिए पाकिस्तान, चीन के सामने क्या गिरवी रखेगा।
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