'युद्ध पर खर्च किए जाते अरबों डॉलर, हमें खाने के लिए भी नहीं दिया जाता लोन', पेरिस सम्मेलन में रोए शहबाज शरीफ
PM Shehbaz at Paris summit: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेरिस सम्मलेन में दुनिया के देशों से पाकिस्तान को ऋण देने की अपील की है। पेरिस सम्मेलन में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 2022 में पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पाकिस्तान को ऋण नहीं मिलने को लेकर दुनिया के देशों की ही निंदा करनी शुरू कर दी।
पाकिस्तान लगातार ऋण मांग रहा है और पाकिस्तान की अपील पर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की प्रतिक्रिया की निंदा करते हुए, शहबाज शरीफ ने कहा, कि पाकिस्तान को ऋण देने की पेशकश की गई थी, लेकिन अभी तक ऋण नहीं दिए गये, जबकि "एक देश या देशों" की सुरक्षा पर अरबों खर्च किए जा रहे हैं।

शहबाज ने सुनया दुखड़ा
आपको बता दें, कि पाकिस्तान को आईएमएफ ने ऋण देने से मना कर दिया है और पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है, लिहाजा पाकिस्तान लगातार अलग अलग देशों और मंचों से ऋण मांग रहा है। हालांकि, कोई भी देश अभी तक पाकिस्तान को ऋण देने के लिए तैयार नहीं हुआ है।
शहबाज शरीफ ने पेरिस सम्मेलन में जो कहा, माना जा रहा है, कि उनका निशाना यूक्रेन युद्ध को लेकर था, जिसे अमेरिका और पश्चिमी देशों से लगातार करोड़ों डॉलर की मदद मिल रही है। लिहाजा, शहबाज शरीफ का कहना था, कि जब युद्ध लड़ने के लिए ऋण दिए जा सकते हैं, तो खाने की कमी से जूझते पाकिस्तान को ऋण क्यों नहीं दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ये टिप्पणी पेरिस में दो दिवसीय न्यू ग्लोबल फाइनेंसिंग पैक्ट शिखर सम्मेलन में की है, जहां उन्होंने दुनिया में वित्तीय संसाधनों के ऋण वितरण के लिए एक निष्पक्ष और न्यायसंगत फॉर्मूले की आवश्यकता पर जोर दिया।
आपको बता दें, कि ये पहली बार है, जब आईएमएफ ने पाकिस्तान को ऋण की एक किस्त का भुगतान नहीं किया है, जबकि इससे पहले 22 बार पाकिस्तान को आईएमएफ से ऋण मिल चुका है, जिसका पैसा पाकिस्तान ने आज तक नहीं लौटाया है। लिहाजा, इस बार आईएमएफ का कहना है, कि जब तक पाकिस्तान उसकी सभी शर्तों को नहीं मानता, उसे ऋण नहीं दिया जाएगा।
पाकिस्तान पर डिफॉल्ट होने का खतरा
गहरे आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान अब किसी भी वक्त डिफॉल्ट होने की घोषणा कर सकता है और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है, कि आईएमएफ से पाकिस्तान को बेलऑउट पैकेज मिलने की रही सही कसर भी सरकार के बजट से खत्म हो गई है। ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अंकुर शुक्ला ने पाकिस्तान इनसाइट की रिपोर्ट में कहा है, कि "यह जुलाई में शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में डॉलर की गंभीर कमी का कारण बनेगा, और पाकिस्तान के डिफॉल्ट होने की संभावनाओं को काफी बढ़ा देगा।"
आईएमएफ ने टैक्स आधार को व्यापक बनाने और टैक्स माफी को शामिल करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने को लेकर शहबाज सरकार के बजट की आलोचना की थी। वहीं, डिफॉल्ट होने से बचने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की जमीन-जायदाद को बेचना शुरू कर दिया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान की सरकार ने कराची बंदरगाह को बेचने का फैसला कर लिया है और बिक्री की प्रक्रिया को फाइनल करने के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है, जो कराची बंदरगाह को बेचने के लिए डील करेगा।












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