भारत को दहलाने को तैयार अल कायदा की शाहीन!
काबुल। अभी कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि आईएसआईएस ने जापान और जॉर्डन के एक बंधक की रिहाई के बदले में अल कायदा की पूर्व सुसाइट बॉम्बर रही साजिदा अल रिश्वाई की रिहाई की मांग की है। इस खबर के बाद अब जो खबर आ रही है कि वह है कि अल कायदा ने आत्मघाती महिला दस्ते की एक पूरी फौज बनाने की ठान ली है।

जो एक डरावना सच इस खबर से जुड़ा है वह है कि इसके लिए संगठन पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से तो लड़कियों की भर्ती करने को तैयार है साथ ही वह भारत से भी सुसाइड बॉम्बर्स के लिए लड़कियों की भर्ती करने का प्लान तैयार कर चुका है।
अल कायदा के हाल ही में इस क्षेत्र में नियुक्त किए गए प्रमुख असीम उमर की ओर से महिला जेहादियों की फौज के बारे में ऐलान किया गया है। अल कायदा इस जेहादियों की फौज को अफिंदा आयशा नामक महिला लीड करेगी। इस फौज को शाहीन नाम दिया गया है। अल कायदा की महिला आत्मघाती दस्ते के बारे में अल कायदा के प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की ओर से ऐलान किया गया था।
जेहाद ही होगी खुदा की सच्ची सेवा
- अल कायदा ने शाहीन के जरिए जो संदेश दुनिया को दिया है उसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है।
- इस संदेश से साफ है कि संगठन अलग-अलग देशों से लड़कियों की भर्ती को बेकरार है।
- इससे जुड़े पैम्फलेट बांटे गए उसमें जो संदेश था वह काफी हैरान करने वाला था।
- इसमें लिखा था, 'अपने बच्चों को जेहाद के लिए तैयार करें।'
- पैम्फलेट में यह भी है कि सभी मुस्लिम महिलाओं को जेहाद के लिए जान देनी चाहिए।
- अल कायदा के मुताबिक अगर वह ऐसा करती हैं तो वह खुदा की सेवा करेंगी।
- इस तरह के कुछ पैम्फलेट्स को अफगानिस्तान में देखा गया।
- साथ ही इन पैम्फलेट्स को पाकिस्तान में भी कई जगह बांटा गया है।
- आईबी के एक अधिकारी की मानें तो यह अल कायदा का एक प्रपोगेंडा है।
- आईबी की मानें तो यह देखना होगा अल कायदा को इसमें सफलता मिलती है या नहीं।
- आईबी कहती है कि महिलाओं में आतंकी संगठनों में शामिल होने को लेकर उत्साह में कोई कमी नहीं है।
लश्कर-ए-तैयबा के पास भी फिदायिनें
- तहरीक-ए-तालिबान के दावे पर अगर यकीन करे तो करीब 500 महिलाओं को फिदायिन बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
- इस संगठन ने इस बात का अहसास कर लिया है कि अगर इसके पास महिला बल होगा तो यह और ताकतवर हो जाएगा।
- अपने मकसद को पूरा करने के लिए टीटीपी ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की भर्ती कर रहा है।
- दूसरी ओर आईएसआईएस ने भी एक बड़ी महिला शाखा को लांच करने का मन बना लिया है।
- साजिदा अल रिश्वाई की रिहाई की मांग जिस अंदाज में की गई है, वह इस बात का साफ इशारा है।
- वहीं दूसरी ओर लश्कर-ए-तैयबा ने भी हाल ही में अपनी महिला फिदायिन की फौज तैयार कर ली है।
- लश्कर की इस फौज का नाम दुखतरीन-ए-तैयबा और दौर-ए-सोफा है।
- यहां तक कि जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश ने भी महिला फिदायिन की फौज तैयार कर डाली है।
क्यों जरूरी हैं महिलाएं
- आतंकी संगठन इस बात पर यकीन करने लगे हैं कि महिला बाम्बर्स को पुरुषों की तुलना में ज्यादा सफलता हासिल होती है।
- महिला फिदायिन 10 में से आठ बार सफलता को हासिल कर लेती है।
- उन पर सुरक्षा एजेंसियों को भी ज्यादा शक नहीं होता है।
- महिला फिदायिन स्वभाव से शांत होती है और उन्हें ट्रेंनिग देना काफी आसान होता है।
- अपनी खूबियों की वजह से संगठन के लिए और ज्यादा समर्पित होती हैं।
- युद्ध या फिर ड्रोन हमलों में अपने बच्चों या फिर पति को खो देने वाली महिलाओं को इसमें जगह दी जाती है।
- फिदायिन बनने के साथ ही साथ वह दूसरी महिलाओं की भर्ती भी करती है।
- कई केसों में तो यहां तक देखा गया है कि महिला फिदायिनें अपने बच्चों को भी जेहाद के लिए तैयार करती हैं।
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