PAK में सुप्रीम कोर्ट की घटेंगी शक्तियां, चीफ जस्टिस के कतरे जाएंगे पर.. शहबाज सरकार का फैसला कितना सही?

पाकिस्तान की अदालतों ने देश की राजनीति में काफी दखल दिया है और सेना ने अपनी मर्जी के मुताबिक फैसले पास करवाएं हैं। हालांकि, इस कानून के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी कम होगी, कहना मुश्किल है।

Pakistan Supreme Court:

Pakistan Supreme Court: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां कम करने के लिए देश की नेशनल असेंबली में बिल पेश कर दिया है। जिसके तहत चीफ जस्टिस के पर कतर दिए जाएंगे। शहबाज सरकार के इस फैसले पर पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स गंभीर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं, कि सरकार का ये फैसला न्यायपालिका की स्वायत्तता को खत्म करने वाला है। हालांकि, शहबाज सरकार ने कोर्ट की शक्तियों को कम करने वाला ये बिल उस वक्त पेश किया है, जब सुप्रीम कोर्ट के ही दो जजों ने चीफ जस्टिस के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे।

सुप्रीम कोर्ट की घटेंगी शक्तियां

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के दो जज, जस्टिस सैयद मंसूर अली शाह और जस्टिस जमाल खान मंडोखिल ने इससे पहले चीफ जस्टिस के 'असीमित शक्तियों' को घटाने की मांग कर चुके हैं। खासकर चीफ जस्टिस के 'स्वत: संज्ञान' लने की शक्तियों पर सवाल उठाया था। वहीं, नेशनल असेंबली में बिल पेश करने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, कि "अगर संसद में चीफ जस्टिस के अधिकारों को कम करने के लिए कानून नहीं बनाया गया, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।" हालांकि, कई लीगल एक्सपर्ट्स शहबाज सरकार के इस बिल का समर्थन कर रहे हैं और उनका मानना है, कि चीफ जस्टिस के विवेकाधिकार का निर्धारण होना चाहिए। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि "स्वत: संज्ञान लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट को 3-2 या 4-3 से बहुमत में होना चाहिए।" वहीं, सुप्रीम कोर्ट के दो जजों का कहना है, कि "किसी भी मामले पर फैसला लेने के लिए अकेले चीफ जस्टिस के निर्णय पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है।" उन्होंने कहा, कि "संविधान के अनुच्छेद 191 के तहत सभी न्यायाधीशों की सहमति या असहमति लेना आवश्यक है।"

'राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप'

वहीं, संसद में पेश हुए न्यायपालिका कानून को लेकर शहबाज सरकार का कहना है, कि इस बिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों में दखलअंदाजी पर रोक लगेगी। नेशनल असेंबली में पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने इस बिल को पेश किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है, कि "पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) से संबंधित मामलों में "हस्तक्षेप" ना करे।" प्रस्ताव में कहा गया है, कि "यह सदन मानता है. कि राजनीतिक मामलों में न्यायपालिका की अनावश्यक घुसपैठ राजनीतिक अस्थिरता का मुख्य कारण है।" प्रस्ताव में आगे कहा गया है, कि "नेशनल असेंबली ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के उस फैसले को स्वीकार किया है, जिसमें चीफ जस्टिस के स्वत: संज्ञान अधिकार को लेकर टिप्पणी की गई है और उम्मीद है, कि सुप्रीम कोर्ट देश के राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों में दखल देने से परहेज करेगा"।

कोर्ट पर कंट्रोल चाहते हैं शहबाज शरीफ

आपको बता दें, कि पाकिस्तान की अदालतों का राजनीति में गहरा दखल रहा है और कई बार पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के खिलाफ भी फैसले सुनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट पर सेना के साथ साथ नागरिक सरकारों का भी गहरा प्रभाव रहा है। नेशनल असेंबली में पेश किए गये प्रस्ताव में कहा गया है, कि "इलेक्शन कमीशन के अधिकारों में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और आयोग को अनुकूल परिस्थितियों में अपने विशेषाधिकार के अनुसार चुनाव कराने की अनुमति दी जानी चाहिए।" वहीं, पाकिस्तान के कानून मंत्री ने सदन के पटल पर बोलते हुए कहा, कि स्वत: संज्ञान नोटिस के नाम पर की गई कार्रवाई से शीर्ष अदालत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। कानून मंत्री ने कहा, कि "हमने वह युग भी देखा है, जब तुच्छ मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया जाता था और अतीत में कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले सुनाने में काफी देरी की महत्वपूर्ण मामलों को सुनवाई के लायक नहीं माना।"

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