वैज्ञानिकों को मिला सबसे विशाल रैप्टर डायनासोर का जीवाश्म, क्यों महत्वपूर्ण है ये खोज ? जानिए
ब्यूनस आयर्स, 2 मई: लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना में पुरातत्व विज्ञानियों को सबसे विशाल रैप्टर डायनासोर का जीवाश्म मिला है। दरअसल, यह खोज तीन साल पहले ही हुई थी, लेकिन कोविड से संबंधित पाबंदियों की वजह से वैज्ञानिकों के लिए इसका इकट्ठे विश्लेषण कर पाना मुश्किल था। हालांकि, उन्होंने डायनासोर के अवशेषों को आपस में बांटकर घरों में ही जांच-पड़ताल पूरी की और अब जाकर उन सभी तरह की स्टडी को इकट्ठा करके अपने निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। इसमें पाया गया है कि इससे बड़ा रैप्टर डायनासोर का जीवाश्म कहीं नहीं मिला था।

सबसे विशाल रैप्टर डायनासोर का जीवाश्म मिला
अर्जेंटीना के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे विशाल रैप्टर डायनासोर के जीवाश्म की खोज की है। दरअसल, अर्जेंटीना के पुरातत्व वैज्ञानिक वहां के पेटागोनिया में खुदाई कर रहे थे, तो उन्हें एक डायनासोर का अवशेष मिला, जो अबतक खोजे गए रैप्टर परिवार के सबसे विशाल डायनासोर का जीवाश्म बताया जा रहा है। इस खोज में शामिल एक वैज्ञानिक माउरो एरेंसियागा रोलैंडो ने कहा है कि इस डायनासोर को एक नई प्रजाति मैप मैक्रोथोरैक्स का नाम दिया गया है, जो कि 29.5 फीट से 32.8 फीट (9 से 10 मीटर) लंबा था। जबकि, बाकी मेगारैप्टर 9 मीटर से ज्यादा लंबे नहीं थे। बुधवार को रोलैंडो ने रॉयटर्स से कहा कि 'यह जानवर आकार में बहुत बड़ा है और हम इसका बहुत ज्यादा अवशेष खोज पाए हैं।'

2019 में ही मिले थे डायनासोर के अवशेष
विशाल रैप्टर डायनासोर के जीवाश्म को अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के बर्नार्डिनो रिवाडेविया नैचुरल साइंसेज म्यूजियम में रखा गया है। यह जीवाश्म सैंटा क्रुज के पैटागोनियन प्रांत से 2019 के मार्च में ही खोजा गया था। इस खोज में शामिल वैज्ञानिक नेशनल साइंटिफिक एंड टेक्निकल रिसर्च काउंसिल से जुड़े हैं। इस अभियान में जापान के दो वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया था। बाद कोविड महामारी की वजह से पाबंदियां लागू हो गईं, इसलिए पुरातत्व वैज्ञानिकों ने इसके अवशेषों को आपस में बांट लिया था और उसका अपने घरों पर ही विश्लेषण करना शुरू कर दिया था।

दो-दो गेंडों के बराबर वजन
रोलैंडो के मुताबिक माना जाता है कि यह मांसाहारी डायनासोर 7 करोड़ साल पहले क्रेटेशियस काल में अर्जेंटीना के दक्षिणी किनारे पाए जाते थे। मेगारैप्टर एक फुर्तीले कंकाल वाले जानवर थे, जिनकी लंबी पूंछ उन्हें पैंतरेबाजी और संतुलन बनाने में सहायक थे। इसके साथ ही इनकी लंबी गर्दन और लंबी खोपड़ी में 60 से ज्यादा छोटे-छोटे दांत थे। इनके नुकीले नाखून हैं और वे ही इनके सबसे अचूक हथियार होते थे और इसके साथ ही उनकी फुर्ती ने इन्हें दुनिया का बहुत ही खतरनाक जानवर बना दिया था। माना जाता है कि यह 5 टन वजनी थे, यानी यह दो-दो गेंडों के बराबर होते थे।

हड्डियों से मिली संरचना समझने में मदद
यह एक विशाल रीढ़ की हड्डी वाला डायनासोर था, जिससे इसकी मांसपेशियां, नसें और अस्थिरज्जु जुड़े हुए थे। इसी की मदद से यह विशाल डायनासोर चलते और दौड़ते वक्त सीधा खड़ा हो सकता था और पैरों को मोड़ सकता था। रोलैंडो के मुताबिक इस रैप्टर डायनासोर की हड्डियों की मदद से उन्हें मेगारैप्टर के शरीर की संरचना समझने में सहायता मिली।

पहला मेगारैप्टर भी अर्जेंटीना में मिला था
गौरतलब है कि पहले मेगारैप्टर की खोज पहली बार 1996 में अर्जेंटीना न्यूक्वेन में हुआ था। उसके बाद मेगारैप्टर के कई अवशेष ऑस्ट्रेलिया, जापान और थाईलैंड से भी मिल चुके हैं। न्यूक्वेन में जो मेगारैप्टर मिला था, उसके नाखून 40 सेंटीमीटर लंबे थे। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस नई खोज से उन्हें डायनासोर के विलुप्त होने के बारे में कुछ और बातों की जानकारी मिल सकती है। (पहली दूसरी तस्वीर-यूट्यूब वीडियो से और बाकी सांकेतिक)












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