सऊदी करता रहेगा तेल उत्पादन में कटौती, रूस घटाएगा डिस्काउंट.. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना असर?
Saudi Arabia oil Production: भारत में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि सऊदी अरब ने तेल उत्पादन में कटौती को बढ़ाने की घोषणा की है, वहीं रूस भी तेल पर दिए जाने वाले डिस्काउंट को कम करने पर विचार कर रहा है।
सऊदी अरब ने गुरुवार को कहा, कि वह ऊर्जा की गिरती कीमतों को बढ़ावा देने के अपने प्रयास में सितंबर के अंत तक, प्रति दिन 10 लाख बैरल तेल के उत्पादन में एकतरफा कटौती को बढ़ाएगा। यानि, सऊदी अरब ने कहा है, कि वो चाहता है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो, इसीलिए वो तेल के प्रोडक्शन में कटौती करेगा।

सऊदी अरब घटाएगा तेल का प्रोडक्शन
सऊदी अरब सरकार ने राज्य के ऊर्जा मंत्रालय के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से, राज्य द्वारा संचालित सऊदी प्रेस एजेंसी को दिए एक बयान में विस्तार से इसकी घोषणा की है। अधिकारी ने कहा, कि जरूरत पड़ने पर कटौती को "बढ़ाया या और गहरा किया जा सकता है।"
यानि, सऊदी अरब तेल के प्रोडक्शन में कमी को और बढ़ा सकता है।
सऊदी अरब पिछले दो सालों से बार बार तेल की कीमत बढ़ाने के लिए तेल का प्रोडक्शन कम कर रहा है, ताकि उसके अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ सके, लेकिन पहले कोरोना और बाद में आर्थिक संकट की वजह से दुनिया में पिछले तीन सालों से तेल का खर्च कम रहा है, लिहाजा सऊदी अरब को उतना फायदा नहीं मिल रहा है।
सऊदी अरब ने प्रति दिन 10 लाख बैरल की कटौती इस साल जुलाई में शुरू की थी, जबकि अन्य ओपेक+ उत्पादक देश पहले के उत्पादन कटौती को अगले साल तक बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
सऊदी अरब के अधिकारी ने कहा, कि "यह अतिरिक्त स्वैच्छिक कटौती तेल बाजारों की स्थिरता और संतुलन का समर्थन करने के उद्देश्य से ओपेक+ देशों द्वारा किए गए एहतियाती प्रयासों को मजबूत करने के लिए की गई है।"
हालांकि, विश्लेषक इस बात को लेकर पहले से ही तैयार थे, कि सऊदी अरब तेल के उत्पादन में कटौती करेगा।
बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 80 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर कारोबार कर रहा था।

तेल पर डिस्काउंट घटाएगा रूस
पिछले महीने समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने रूस के वित्त मंत्री के हवाले से रिपोर्ट दी थी, कि रूस ने कच्चे तेल पर डिस्काउंट को कम करने के फैसला लिया है। रॉयटर्स ने रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के हवाले से बताया था, कि रूस का वित्त मंत्रालय देश के कच्चे तेल के निर्यात पर टैक्स तय करने के लिए, वर्तमान में जारी 25 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट को घटाकर 20 डॉलर प्रति बैरल करने की योजना बना रहा है।
फरवरी में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश के एक कानून पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें रूसी तेल और रूसी यूराल (रूसी कच्चा तेल, जो खास इलाके से निकाला जाता है) पर नया टैक्स सिस्टम लागू किया था।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री सिलुआनोव ने एक इंटरव्यू में समाचार साइट Argumenty i Fakty को बताया, कि "अभी ब्रेंट क्रूड पर डिस्काउंट 25 डॉलर प्रति बैरल है, हम इसे घटाकर 20 डॉलर प्रति बैरल करने की योजना बना रहे हैं। हम तेल निर्यात पर टैक्स की गणना में सुधार के लिए और उपायों पर विचार कर रहे हैं।"
हालांकि, रूसी वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया, कि किन नये उपायों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, कि इस साल तेल और गैस से रूस, अपने राजस्व में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा कीमत पर 8 ट्रिलियन रूबल (88.5 अरब डॉलर) एकत्र करने की योजना बना रहा है।
भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत, जो अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है, उसके ऊपर सऊदी अरब और रूस के इस फैसले का गंभीर असर हो सकता है।
रूस के डिस्काउंट कम करने के बाद भारत अपने पुराने आपूर्तिकर्ताओं से ही तेल खरीदने की योजना बना रहा था और यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले तक, सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल की आपूर्तिकर्ता देश था, लेकिन सऊदी अरब के बार बार तेल का प्रोडक्शन घटाने और कच्चे तेल की कीमत बढ़ाने के फैसने ने भारत को परेशान कर दिया था।
साल 2021 में कच्चे तेल का प्रोडक्शन में कटौती को लेकर भारत और सऊदी अरब के बीच खटपट भी हुई थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना शुरू किया, तो भारत ने सऊदी अरब से तेल खरीदने में भारी कटौती कर दी, लेकिन अब भारत को वापस सऊदी की तरफ देखना पड़ सकता है।












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