सऊदी अरब ने इजरायली विमानों से हटाया प्रतिबंध, अमेरिका को बड़ी कामयाबी, अब होगी दोस्ती?

इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इजरायल के दौरे पर हैं और वो इजरायली प्रधानमंत्री यैर लैपिड के साथ यरूशलम में एक साथ नजर आये थे, जहां उन्होंने ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी दी है।

रियाद/तेल अवीव, जुलाई 15: सऊदी अरब ने इजरायली विमानों के ऊपर लगे प्रतिबंध को हटाने का ऐलान कर दिया है और सऊदी अरब ने ये घोषणा उस वक्त की है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस मध्य-पूर्व देश की यात्रा करने वाले हैं, लिहाजा अमेरिका के लिए ये एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। सऊदी अरब के इस फैसले के बाद अब सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से इजरायल के सभी विमान अपनी उड़ान भर सकेंगे और इस कदम के बाद अब दोनों देशों के बीच स्थिति काफी सामान्य होने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि, सऊदी अरब ने पिछले साल इजरायली विमानों पर उस वक्त प्रतिबंध लगाया था, जब इजरायल और फिलीस्तीन के बीच करीब 2 हफ्ते तक लड़ाई चली थी, हालांकि, सऊदी अरब ने अपने फैसले के पीछे इस वजह का हवाला नहीं दिया था।

सऊदी अरब का बहुत बड़ा फैसला

सऊदी अरब का बहुत बड़ा फैसला

आपको बता दें कि, इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इजरायल के दौरे पर हैं और वो इजरायली प्रधानमंत्री यैर लैपिड के साथ यरूशलम में एक साथ नजर आये थे, जहां उन्होंने साफ तौर पर ऐलान किया है, कि वो ईरान को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देंगे। वहीं, राष्ट्रपति बाइडेन, इजरायल की यात्रा खत्म करने के बाद सऊदी अरब और यूएई की यात्रा करने वाले हैं और उनकी यात्रा से ठीक पहले, सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन के सामान्य प्राधिकरण ने ट्वीट करते हुए कहा कि, वह 'सभी तरह के विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को खोलने की घोषणा कर रहा है।' सऊदी अरब की यह घोषणा सऊदी अरब और इज़राइल के बीच संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है और इस क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव से सऊदी अरब और इजरायल की सामूहिक चिंताओं को भी दिखाता है।

बाइडेन ने किया फैसले का स्वागत

बाइडेन ने किया फैसले का स्वागत

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को सऊदी अरब द्वारा सभी नागरिक वाहकों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को खोलने के फैसले का स्वागत किया है, जिसमें इजरायल से आने और जाने वाली उड़ानें भी शामिल हैं। अमेरिका के एनएसए ने कहा कि, "यह फैसला एक अधिक एकीकृत, स्थिर और सुरक्षित मध्य पूर्व क्षेत्र का मार्ग प्रशस्त करता है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए और इजराइल की सुरक्षा और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।" आपको बता दें कि, हाल के सालों में इजरायल के कई मुस्लिम देशों के साथ संबंध बेहतर हुए हैं और इजरायल के साथ यूएई के संबंध तो अब पूरी तरह से सामान्य हो चुके हैं। वहीं, हाल के सालों में सऊदी अरब ने इजरायल और खाड़ी देशों के बीच उड़ानों को अपने हवाई क्षेत्र से पार करने की अनुमति दी है। पिछले साल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक के लिए सऊदी अरब की उड़ान भरी थी, वहीं पिछले हफ्ते इजरायल के डिफेंस जर्नलिस्ट्स को भी सऊदी अरब में आने की इजाजत दे दी गई थी और कई जर्नलिस्ट पिछले हफ्ते ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं।

'कूटनीति सबसे अच्छा तरीका'

'कूटनीति सबसे अच्छा तरीका'

वहीं, अमेरिका और इजरायल ने साफ तौर पर कहा है, कि किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार का निर्माण करने नहीं दिया जाएगा। जो बाइडेन ने इजरायली नेता के साथ यरूशलम में आमने-सामने बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, वह अभी भी कूटनीति को एक मौका देना चाहते हैं। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री यैर लैपिड ने जोर देकर कहा कि, तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कामयाब नहीं होने देंगे। वहीं, बाइडेन ने सुझाव दिया कि ईरान के साथ उनका धैर्य कम चल रहा था, उन्होंने आशा व्यक्त की कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के उद्देश्य से एक निष्क्रिय समझौते में फिर से शामिल होने के लिए राजी किया जा सकता है।

सऊदी के साथ बनेंगे रिश्ते?

सऊदी के साथ बनेंगे रिश्ते?

हालांकि, अभी तक सऊदी अरब ने इजरायल के साथ किसी भी तरह के रिश्तों की शुरूआत नहीं की है, लेकिन ऐसी खबरें आती रहती हैं कि, दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से संबंधों को सुधारने की कोशिश तेजी से हो रही है। और इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला, जब पिछले साल फिलिस्तीन पर इजरायली हमले के वक्त भी सऊदी अरब खामोश रहा और उसने इजरायल की आलोचना नहीं की। वहीं, माना जाता है कि, आने वाले सालों में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंध सामान्य हो जाएंगे। वहीं, कुछ अरब देश पहले ही इजरायल के साथ अब्रामह एकॉर्ड के तहत शांति समझौता कर चुके हैं। खाड़ी क्षेत्र के दो अहम देश संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन अब्रामह एकॉर्ड के तहत इजरायल से शांति समझौता किया था।

पुरानी स्थिति पर कायम रहेगा सऊदी अरब?

पुरानी स्थिति पर कायम रहेगा सऊदी अरब?

वहीं, ऐसी रिपोर्ट है कि, जो बाइडेन के सऊदी अरब दौरे से इजरायल और सऊदी के रिश्ते और सामान्य हो सकते हैं, लेकिन सऊदी की तरफ से कहा गया है कि, वो अपनी कई साल पुरानी अरब लीग की स्थिति पर कायम रहेगा। आपको बता दें कि, अरब लीग के मुताबिक, मुस्लिम देशों ने कहा हुआ है, कि जब तक इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का विवाद सुलझ नहीं जाता है, वो इजरायल के साथ संबंध नहीं सुधारेंगे। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि, सऊदी अरब मुस्लिम देशों के बीच अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए फिलहाल इजरायल के साथ सीधे तौर पर कोई समझौता नहीं करेगा और पर्दे के पीछे से दोनों देश डिप्लोमेटिक और कारोबारी संबंध को विस्तार देते रहेंगे।

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