सऊदी अरब में इस लड़की से क्यों डरे प्रिंस सलमान, देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार, हो सकती है फांसी!
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने विजन-2030 को अपनाया है, लेकिन ऐसा लगता है, कि वो सिर्फ ढकोसला कर रहे हैं और सामाजिक सुधार को लेकर उनका नजरिए रूढ़िवादी ही है।

Saudi Arab News: सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को लेकर कहा जाता है, कि वो अब सऊदी अरब को आधुनिक बना रहे हैं और देश में सामाजिक सुधारों को लागू कर रहे हैं।
लेकिन, सऊदी अरब में जिस तरह से सुधारकार्य में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, उसे देखकर लगता यही है, कि सऊदी अरब अभी भी नहीं बदला है।
सऊदी अरब में एक युवा महिला अधिकार कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने हाल ही में सामाजिक सुधारों को अपनाने की अपील की थी और अपने ट्विटर और स्नैपचैट पोस्ट के जरिए देश में तहलका मचा दिया था। इस लड़की ने देश की सरकार से महिलाओं के लिए और ज्यादा आजादी और मौलिक अधिकारों की मांग की थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
सऊदी अरब में मनाहेल अल-ओतैबी गिरफ्तार
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली इस लड़की का नाम मनाहेल अल-ओतैबी है, जिनकी उम्र 29 साल है और वो सऊदी अरब में एक फिटनेस ट्रेनर, टीचर और एक आर्टिस्ट हैं।
मनाहेल अल-ओतैबी, अकसर अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए मानवाधिकारों, महिला अधिकारों और महिला सशक्तिकरण की बातें करती हैं और उन्हें पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया था, जिसका खुलासा अब हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मनाहेल अल-ओतैबी को इसलिए गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं के लिए पुरुष संरक्षणवादी नियमों को खत्म करने का आह्वान किया था। उन्होंने सऊदी सरकार से मांग की थी, कि अपमानजनक रिश्ते से निकलने का अधिकार महिलाओं को हासिल हो, जिसके बाद उनके खिलाफ देशद्रोह के आरोप लगाए गये हैं।
हालांकि, मनाहेल अल-ओतैबी को अभी तक दोषी ठहराया नहीं गया है और उनकी सजा का भी अभी तक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन वो पिछले करीब 7 महीने से पुलिस हिरासत में है और अब पता चला है, कि उनके खिलाफ देशद्रोह के आरोप लगाए गये हैं, जिसके तहत सऊदी अरब में मौत की सजा है।
नहीं बदला है सऊदी अरब!
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपना विजन-2030 तो लागू किया हुआ है, लेकिन ऐसा लगता है, कि उनकी मानसिकता नहीं बदली है।
मनाहेल अल-ओतैबी की गिरफ्तारी से पता चलता है, कि सऊदी शाही परिवार अभी भी महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में नहीं है। इससे पहले लीड्स विश्वविद्यालय में एक अन्य सऊदी महिला और पूर्व पीएचडी छात्र सलमा अल-शहाब को महिलाओं के लिए अधिकार मांगने के बाद 30 सालों तक सऊदी के जेल में अपनी जिंदगी बितानी पड़ी थी।
बताया जाता है, कि सऊदी अरब की जेल में ऐसी दर्जनों महिलाएं बंद हैं, जिन्होंने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की कोशिश की थी। सऊदी अरब में अभी भी मन के मुताबिक कपड़ा पहनने का अधिकार मांगने वाली महिलाओं को मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि, मनाहेल अल-ओतैबी के सोशल मीडिया पोस्ट पर अधिकार मांगने के अलावा, उसपर "सभ्य" कपड़े नहीं पहनने का आरोप लगाया गया है।

उनकी बहन, फौज अल-ओतैबी पर भी अभद्र पोशाक पहनने के आरोप लगे थे, लेकिन गिरफ्तारी से पहले ही वह सऊदी अरब से भागने में कामयाब रही थी। वहीं, उनकी एक और बहन, मरियम, महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करन वाली एक प्रसिद्ध वकील हैं, जिन्हें पहले ही हिरासत में लिया गया था, और आखिरकार साल 2017 में संरक्षकता नियमों का विरोध करने के मामले में रिहा कर दिया गया था।
सऊदी विशेषज्ञ और अमेरिका-सऊदी संबंधों पर लगातार टिप्पणी करने वाले खालिद अलजबरी कहते हैं, कि सऊदी अरब ने बदलाव के नाम पर पाखंड को चोला ओढ़ रखा है और सरकार के दमनकारी कानून अभी भी लागू हैं। उन्होंने कहा, कि जहां सरकार विदेशी इंस्टाग्राम मॉडलों को स्विमसूट में तस्वीरें साझा करके पर्यटन को बढ़ावा देने की अनुमति देती है, वहीं सऊदी महिलाओं को अबाया पहने बिना तस्वीरें पोस्ट करने के लिए कैद किया जाता है।
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दिलचस्प बात यह है, कि क्राउन प्रिंस, किंगडम के सॉवरेन वेल्थ फंड, पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) के माध्यम से ट्विटर पर महत्वपूर्ण प्रभाव बनाए हुए हैं और सऊदी अरब में सोशल मीडिया अकाउंट्स की कड़ी निगरानी की जाती है।
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