सऊदी अरब-UAE के बीच सबसे बड़े विवाद पर बनी सहमति, खाड़ी देशों में खत्म हुई बड़ी टेंशन
सऊदी अरब और यूएई के बीच सबसे बड़े विवाद पर सहमति बन गई है। इसके साथ ही ओपेक प्लस का विवाद भी खत्म हो गया है।
नई दिल्ली, जुलाई 19: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच की लड़ाई खत्म हो गई है और इसके साथ ही खाड़ी देशों में मचा सबसे बड़ा बवंडर भी अब खत्म हो गया है। सऊदी अरब और यूएई के बीच सहमति बनने के साथ ही दुनिया के सभी देशों ने राहत की सांस ली है। इस तनाव में आखिरी जीत यूएई की हुई है और सऊदी अरब को झुकना पड़ा है।

सऊदी अरब-यूएई में विवाद खत्म
रविवार को तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक+ में तेल उत्पादन बढ़ाने को लेकर सहनति बन गई है और इसके साथ की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जो काफी ज्यादा इजाफा होने वाला था, उसकी संभावना भी खत्म हो गई है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के बीच का विवाद अब खत्म हो गया है। पिछले दो हफ्तों से इंटरनेशनल बाजार में तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा था, जब तेल उत्पादन करने वाले दोनों बड़े देशों में काफी ज्यादा तनाव था और ओपेक प्लस की बैठक को भी रद्द कर दिया गया था।

विवादों पर बनी सहमति
विवादों पर बनी सहमति के मुताबिक अब ओपेक प्लस हर दिन 4 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हर दिन मासिक आधार पर करेगा। दिसंबर तक हर महीने प्रति दिन 4 लाख बैरल तेल के हिसाब से उत्पादन किया जाएगा और दिसंबर के बाद आगे की स्थिति पर फैसला किया जाएगा। दरअसल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच का विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया था और इंटरनेशनल इनर्जी एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि कि अगर दोनों देशों के बीच विवाद पर सहमति नहीं बनती है तो पूरी दुनिया में तेल की भारी कमी हो सकती है और तेल की कीमतों में काफी ज्यादा इजाफा हो सकता है, जिसकी वजह से महंगाई दर में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।

सहमति का आधार
सऊदी अरब और यूएई के बीच बनी सहमति के मुताबिक ओपेक प्लस ने पहले तेल उत्पादन कम रखने का जो फैसला लिया था, उस फैसले को वापस ले लिया है, जिसकी मांग यूएई की तरफ से की जा रही थी। इस सहमति के मुताबिक, ओपेक प्लस कोविड महामारी के आने से पहले जितनी तेल का उत्पादन करता था, अब फिर से उतनी ही मात्रा में कच्चे तेल का उत्पादन करेगा। आपको बता दें कि पिछले साल जब दुनिया के ज्यादातर देशों ने लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था, तब अचानक पूरी दुनिया में तेल की डिमांड औंधे मुंह गिर गई थी, जिसका नतीजा ये हो गया था कि तेल की कीमत क्रैश कर गया था। पिछले साल मई महीने में कुछ वक्त के लिए तेल की कीमत शून्य डॉलर प्रति बैरल से भी कम हो गई थी, जिसके बाद तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने तेल उत्पादन में भारी कटौती करनी शुरू कर दी थी और सऊदी अरब अब भी चाहता था कि तेल उत्पादन कम ही रखा जाए, जिसके लिए यूएई तैयार नहीं था।

क्यों नाराज था संयुक्त अरब अमीरात ?
अर्थव्यवस्था खुलने के साथ ही एक बार फिर से कच्चे तेल की डिमांड काफी बढ़ गई थी, लेकिन सऊदी अरब चाहता था कि कच्चे तेल का उत्पादन कम ही रखा जाए। ओपेक प्लस भी सऊदी अरब के प्रभाव में है, लिहाजा विवाद बढ़ता चला गया। सऊदी अरब और यूएई के बीच के विवाद का नतीजा ये हुआ कि अमेरिका में तीन सालों के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और आशंका जताई जाने लगी कि पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत भयानक स्तर पर बढ़ सकती है। इस वक्त इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल है, जो ज्यादा है। लेकिन, अब जबकि सऊदी अरब और यूएई के बीच का विवाद खत्म हो गया है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले वक्त में कच्चे तेल की कीमत में कमी आएगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीडल की कीमतें कम होंगी।

क्या दोस्त नहीं रहे सऊदी अरब-यूएई?
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पिछले कई सालों से कई मुद्दों पर अलग अलग राय दिखाने लगे हैं और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों में भी पिछले कुछ सालों में तेजी से बदलाव आया है। यूएई शुरू में यमन में ईरान-गठबंधन हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी के नेतृत्व वाले युद्ध में शामिल हुआ था, लेकिन 2019 में यूएई ने अपने ज्यादातर सैनिकों को वापस बुला लिया था। बहरीन और मिस्र के साथ, यूएई और सऊदी अरब ने 2017 में पड़ोसी देश कतर का बहिष्कार कर दिया था, लेकिन जनवरी में सऊदी अरब ने अचानक बहिष्कार का फैसला खत्म करने के लिए समझौता कर ली और खाड़ी देशों के विश्लेषकों का कहना है कि अब यूएई भी झुकने के लिए तैयार होता नहीं दिख रहा है। वहीं, यूएई ने सऊदी अरब से इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य बनाने का आग्रह किया था, जिसे सऊदी अरब ने नहीं माना। और अब यूएई विश्व का पहला मुस्लिम देश बन गया है, जिसने अपना दूतावास इजरायल में बनाया है।

विवाद की वजहें और भी हैं
तेल विवाद के अलावा सऊदी अरब ने दूसरे खाड़ी देशों के साथ अपने आयात नियमों में संशोधन कर दिया है, जिसमें इजरायाली सामानों को फ्री ट्रेड से बाहर कर दिया गया। जो डायरेक्ट तौर पर यूएई के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यूएई ने इजरायल के साथ कई व्यापारिक और सामरिक करार किए हैं। आपको बता दें कि व्यापार का 'फ्री जोन' यूएई की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके तहत विदेशी कंपनिया यूएई में बेहद आसान शर्तों पर व्यापार कर सकती हैं और यूएई में काम करते हुए विदेशी कंपनियों को 100 फीसदी हिस्सेदारी रखने का भी अधिकार प्राप्त है। लेकिन, अब यूएई के सामानों पर सऊदी अरब किसी तरह की कोई रियायत नहीं दे रहा है।
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