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खुद को इंसाफ की तलवार कहता है अलकायदा का नया चीफ! जानिए कौन है सैफ अल-अदेल?

नई दिल्ली, 02 जुलाईः अमेरिका ने काबुल में ड्रोन स्ट्राइक के जरिए आतंकवादी संगठन अल कायदा के सरगना अयमान अल जवाहिरी को मार गिराया ओसामा-बिन-लादेन की मौत के बाद अल-जवाहिरी अलकायदा की गद्दी पर बैठा था। अब उसकी भी मौत के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि इस आतंक की फैक्टरी अलकायदा का अगला चीफ कौन होगा। अल जवाहिरी की मौत के बाद मिस्र के पूर्व सेना अधिकारी सैफ अल-अदेल को अब अल कायदा के सिंहासन का उत्तराधिकारी माना जा रहा है।

अलकायदा की लिस्ट में सबसे ऊपर अल-अदेल

अलकायदा की लिस्ट में सबसे ऊपर अल-अदेल

सैफ अल-अदेल को अलकायदा के उत्तराधिकारियों की लिस्ट में सबसे ऊपर बताया जा रहा है। अल-अदेल अलकायदा के संस्थापक सदस्यों में से एक है और संगठन में इसका दबदबा है। एफबीआई की तरह सैफ अल-अदेल का जन्म 11 अप्रैल 1960 या 1963 है। जवाहिरी की तरह अदेल भी मिस्र का नागरिक है। अल जवाहिरी की तरह अल-अदेल भी इस्लामिक जिहाद का सदस्य था। माना जाता है कि अल-अदेल बम विशेषज्ञ है।

ओसामा और जवाहिरी का करीबी है अल-अदेल

ओसामा और जवाहिरी का करीबी है अल-अदेल

जानकारी के मुताबिक, अल-अदेल ओसामा-बिन-लादेन और अल-जवाहिरी का करीबी भी माना जाता है। अल-अदेल ने मिस्र के इस्लामिक जिहाद में शामिल होने से पहले आतंकवादी समूह मकतब अल-खिदामत में ओसामा और अल जवाहिरी से मुलाकात की थी। 2011 में ओसामा के मारे जाने के बाद सैफ अल-अदेल अलकायदा की रणनीति का खास हिस्सा बन गया। अल-अदेल को आतंकवादी समूह की कमान संभालने से रोकने वाला एकमात्र स्टिकिंग प्वाइंट ये है कि वह बीते 19 सालों से ईरान में ही फंसा हुआ बताया जाता है। अल-अदेल को उसकी क्रूरता और शातिर तरीके से आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए जाना जाता है।

खुद को कहता है इंसाफ की तलवार

खुद को कहता है इंसाफ की तलवार

सैफ अल-अदेल के बारे में अब तक कम ही जानकारी बाहर आ पायी है। 1980 के दशक के अंत में वह आतंकवादी समूह मकतब अल-खिदामत में शामिल हो गया था। जानकारी के मुताबिक अलकायदा के भावी सरगना की उम्र 60 वर्ष बतायी जा रही है। वह मिश्र की सेना का पूर्व अधिकारी रह चुका है। आतंक की दुनिया का पुराना नाम सैफ अल-अदेल का असली नाम मोहम्मद सलाह अल-दीन जैदान बताया जाता है। इस नाम का असली अर्थ है स्वार्ड्स ऑफ जस्टिस। अपने नाम के अनुरूप वह खुद को इंसाफ की तलवार भी कहता है।

30 की उम्र में ब्लैक हॉक ऑपरेशन को दिया अंजाम

30 की उम्र में ब्लैक हॉक ऑपरेशन को दिया अंजाम

अल-अदेल जब 30 वर्ष का था, तब उसने सोमालिया के मोगादिशु में 1993 के कुख्यात 'ब्लैक हॉक डाउन' ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन में 19 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इन मरे हुए सैनिकों के शवों को सड़क पर घसीटा गया था। अल-अदेल इतना खूंखार है कि एफबीआई ने उसे मोस्ट वांटेट की सूची में शामिल कर रखा है और उसके सिर पर 10 मिलियन का इनाम भी है।

कई आपराधिक घटनाओं में रहा है शामिल

कई आपराधिक घटनाओं में रहा है शामिल

एफबीआई के मुताबिक 7 अगस्त 1998 को दार-अस-सलाम, तंजानिया और नैरोबी में अमेरीकी दूतावासों पर हुई बमबारी में वह शामिल था। इस आतंकी हमले में 224 लोग मारे गए थे जिसमें 12 अमेरिकी नागरिक भी थे। इसके अलावा इस हमले में 4,500 से अधिक लोग घायल भी हुए थे। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अलकायदा की कमान संभालने की बाद सैफ अल-अदेल को निशाना बनाने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।

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