वाजपेयी सबसे महान कूटनीतिज्ञ: एस जयशंकर बोले- वर्तमान विदेश नीति में उनका सबसे बड़ा प्रभाव

एस जयशंकर ने कहा कि वाजपेयी ने अमेरिका के साथ रिश्ता भी आगे बढ़ाया और रूस के साथ संबंधों में स्थिरता भी बरकरार रखी। इसके साथ ही चीन के मुद्दे पर ‘पारस्परिक सम्मान’ के सिद्धांत का पालन किया।

Jaishankar remembers Vajpayee legacy

Image: File

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को याद किया। इस अवसर पर एस जयशंकर ने 1998 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण के बाद बनी कूटनीतिक स्थिति से निपटने में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रवैये की सराहना की। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के कार्यकाल में हुए परमाणु परीक्षण को सिर्फ एक 'परीक्षण' के नजरिए से ही नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसके बाद हुई 'सघन कूटनीति' के रूप में देखा जाना चाहिए।

जयशंकर ने जमकर की वाजपेयी की प्रशंसा

जयशंकर ने जमकर की वाजपेयी की प्रशंसा

'तीसरे अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान' में अपने संबोधन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि परमाणु परीक्षण के महज 2 साल के भीतर ही भारत ने दुनिया के सभी प्रमुख देशों को अपने साथ जोड़ लिया था। उन्होंने अमेरिका और रूस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने में अटल बिहारी की भूमिका की भी सराहना की। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नीति को आकार देने में उनके योगदान को रेखांकित किया और उनकी सूक्ष्म विश्वदृष्टि पर भी प्रकाश डाला।

वाजपेयी को थी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की समझ

वाजपेयी को थी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की समझ

एस जयशंकर ने कहा, "मेरे पास उन्हें याद करने का एक विशेष कारण है क्योंकि जब मैं विदेश सेवा में शामिल हुआ था, तो वह पहले विदेश मंत्री थे जिनसे मुझे मिलने का सौभाग्य मिला था। जब आप एक प्रधानमंत्री के रूप में, एक सांसद के रूप में उनके योगदान को देखते हैं, तो उसके कई पहलू होते हैं। एक तो वह है जिसे हम आज सांस्कृतिक पुनर्संतुलन कहते हैं। इसके साथ ही, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उस दौर में उनकी समझ कितनी सूक्ष्म थी।" विदेश मंत्री ने कहा कि पूर्व पीएम को वास्तविकता की समझ थी और यह उनके फैसलों में दिखता था।

US-रूस दोनों के साथ भारत के संबंध हुए बेहतर

US-रूस दोनों के साथ भारत के संबंध हुए बेहतर

एस जयशंकर ने आगे कहा, "हमने देखा कि कैसे उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को बदल दिया। उन्होंने शीत युद्ध के बाद के माहौल को समझा। वह जानते थे कि भारत के अमेरिका के साथ संबंध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितने महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ठीक उसी दौर में उन्होंने रूस के साथ भारत के संबंधों को निरंतरता और स्थिरता प्रदान की। ऐसे समय में जब दुनिया भर के देशों के संबंधों में बदलाव हो रहा था, तब भारत-रूस संबंधों में अनोखी स्थिरता थी। यह व्यक्तिगत समझ और वाजपेयी द्वारा किए गए प्रयासों के कारण था।

वाजपेयी ने हर देश संग बेहतर किए रिश्ते

वाजपेयी ने हर देश संग बेहतर किए रिश्ते

जयशंकर ने कहा कि वे एक साथ ही रूस और अमेरिका को साधने में सफल रहे। उन्होंने अमेरिका के साथ रिश्ता भी आगे बढ़ाया और रूस के साथ संबंधों में स्थिरता भी बरकरार रखी। वाजपेयी ने चीन के मुद्दे पर ‘पारस्परिक सम्मान' के सिद्धांत का पालन किया। उन्होंने चीन का दौरा भी किया और पाकिस्तान संग रिश्ते बेहतर करने का भी प्रयास किया। जयशंकर ने कहा, "1998 में परमाणु परीक्षण के कारण जापान के साथ हमारे संबंध प्रभावित हुए थे। मैं उस समय जापान में तैनात था इस दौरान मैंने उनसे हमेशा यह यकीन हासिल किया कि हम इसे निपटाने का कोई न कोई तरीका निकाल लेंगे। और वास्तव में आज जब मैं इसे देखता हूं कि जिस समझदारी और परिपक्वता से वाजपेयी ने उस चुनौती को हैंडिल किया, उससे मुझे आज भी आश्चर्य होता है।

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