महज 5 दिनों की ट्रेनिंग...और जवान तैयार, कुछ तो मशीनगन तक चलाना नहीं जानतेः रूसी सैनिक का दावा
रूस-यूक्रेन युद्ध के पांच महीने पूरे होने वाले हैं। एक रूसी सैनिक ने दावा किया है कि महज पांच दिनों की ट्रेनिंग के बाद सैनिकों को यूक्रेन भेज दिया जा रहा है।
मास्को, 22 जुलाईः आने वाले 24 जुलाई को रूस-यूक्रेन युद्ध के पांच महीने पूरे हो जाएंगे। इतने दिन बीत जाने के बाद भी युद्ध का अब तक कोई परिणाम नहीं निकल पाया है। रूस के मुकाबले कहीं अधिक कमजोर मानी जाने वाली यूक्रेन की सेना ने पुतिन की सेना को जबरदस्त टक्कर दी है। इस बीच एक सैन्य विश्लेषक ने दावा किया है कि सरकार, रूसी सेना को ताबूत में भेजने के लिए तैयार कर रही है। वहीं एक अन्य सैनिक इवान (काल्पनिक नाम) ने दावा किया है कि यूक्रेन में अग्रिम पंक्ति में लड़ने के लिए उसे महज पांच दिनों की ट्रेनिंग दी गई थी।

कई सैनिकों को नहीं आता हथियार चलाना
द मॉस्को टाइम्स के मुताबिक, अपनी पहचान छुपाने की शर्त पर एक इवान ने कहा कि कुछ मामले ऐसे भी थे जब उसके साथियों को बिना मशीनगन की ट्रेनिंग के ही युद्ध में भेज दिया गया। इस रिपोर्ट ने दर्शा दिया है कि यूक्रेन के उग्र प्रतिरोध को कुचलने के लिए रूस किस हद तक हताश हो चुका है। कुछ अनुमानों के मुताबिक इस युद्ध में 30 हजार से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं।

उम्मीद से कहीं अधिक खींच गया युद्ध
जब 24 फरवरी को आक्रमण शुरू हुआ, तो मास्को को पूरा यकीन था कि उसकी सेनाएं जीत हासिल कर लेंगी और कुछ ही दिनों में कीव की सरकार को अपदस्थ कर देंगी। लेकिन अब तक परिणाम बिल्कुल वैसा नहीं हुआ है जैसा पुतिन की सरकार सोच रही थी। इसके बजाय, रूस एक लंबे और महंगे संघर्ष में उलझ चुका है जिसका कोई अंत नहीं है। स्वतंत्र सैन्य विश्लेषक पावेल लुज़िन ने गुरुवार को द मॉस्को टाइम्स से कहा कि एक सप्ताह का प्रशिक्षण कुछ भी नहीं है। एक सैनिक के लिए, यह अस्पताल या ताबूत के लिए एक सीधा रास्ता है।

240 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी
रूस के रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक कि यदि कोई रूसी सेना के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करता है, उसे पहले चार सप्ताह के संयुक्त हथियार प्रशिक्षण से गुजरना होता है। कुल मिलाकर इस चार सप्ताह के कार्यक्रम में 240 घंटे लगते हैं। इस ट्रेनिंग में शूटिंग, ग्रेनेड फेंकना और सैन्य रणनीति का अध्ययन शामिल होता है। इसके अलावा रूसी कानून के मुताबिक जब तक किसी सैनिक के पास कम से कम 4 महीने की ट्रेनिंग न हो तब तक उसे युद्ध में नहीं भेजा जा सकता है। पावेल लुज़िन ने मास्को टाइम्स से कहा कि यूक्रेन में लड़ने के लिए रूसी सेना के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करने वालों पर भी यही मानक लागू होने चाहिए।

देशभक्ति दिखाने का मौका
31 वर्षीय रूसी सैनिक इवान, जिन्होंने अप्रैल में रक्षा मंत्रालय के 3 तीन महीने के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, ने मास्को टाइम्स से बात करते हुए इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण को काफी बताया। इवान ने कहा कि जब से ये विशेष सैन्य अभियान शुरू हुआ, मैंने इसे एक व्यक्तिगत त्रासदी के रूप में लिया। मैंने खुद से कहा कि मैं वहां जाना चाहता हूं और मुझे वहां जाने से कोई नहीं रोकेगा। मैं एक देशभक्त हूं। इवान को पांच दिन की ट्रेनिंग मिलने के बाद जल्द ही पश्चिमी रूसी बेलग्रेड रोड में एक सैन्य अड्डे पर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके महज दो सप्ताह बाद इवान यूक्रेन से लड़ रहे सैनिकों की अग्रिम पंक्ति में शामिल था।

'पांच दिनों की ट्रेनिंग काफी'
इवान ने कहा, "सभी चिकित्सा जांच के बाद, मुझसे पूछा गया कि क्या मैं एक दिन बाद सैन्य अड्डे पर जाने के लिए तैयार हूं? मेरा जवाब हां था।" इवान ने आगे कहा, "उन्होंने हमें 5 दिनों की ट्रेनिंग दी, इसके बाद हम पांच दिनों के लिए रोटेशन का इंतजार किया औऱ फिर हम हमारे पदों पर चले गए। इवान को पांच दिनों की ट्रेनिंग तब मिली जब वह और उसके साथी तैनात होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इवान ने कहा कि उन्होंने अनौपचारिक ट्रेनिंग प्रैक्टिस की।

मशीनगन तक चलाना नहीं जानते
इवान ने कहा कि वह कहा कि प्रत्येक सैनिक को अलग-अलग ट्रेनिंग दिए जाते हैं, जिसमें उनके विशिष्ट पदों के लिए आवश्यक विभिन्न कौशल पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इवान ने कहा कि बेशक ये ट्रेनिंग पर्याप्त नहीं थी लेकिन ये देश के लिए जरूरी था। इवान ने कहा कि हमारी कंपनी में तो एक ऐसा भी आदमी था जिसे मशीन गन चलाना तक नहीं आता था। मैंने इसे सिखाया कि मशीनगन कैसे चलाते हैं। उसे मशीनगन खोलना और उसे जोड़ना सिखाया।

कई सैनिकों ने जताई हैरानी
यह सिर्फ इवान का कहना नहीं है। कई अन्य सैनिकों ने भी इसी तरह के खुलासे किए हैं। एक अज्ञात सैनिक ने पिछले महीने बीबीसी की रूसी समाचार सेवा को बताया कि वह प्रशिक्षण की कमी पर 'हैरान' है। सैनिक ने कहा कि कुछ लोगों ने अपने हाथों में ठीक से मशीन गन नहीं पकड़ी है, उन्होंने कभी वास्तविक टैंक नहीं देखे हैं, और वे एक दो दिनों में अग्रिम पंक्ति के लिए रवाना हो रहे हैं। उसने कहा कि एक 24 वर्षीय रूसी सैनिक, येवगेनी चुबारिन, पूर्वी यूक्रेनी शहर खार्किव में बेलगोरोड सैन्य अड्डे में स्थानांतरित होने के सिर्फ चार दिनों के बाद मारा गया था।

बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के जाना, मौत को दावत देना
मानवाधिकार समूह सिटीजन के निदेशक सर्गेई क्रिवेंको इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि युद्ध कौशल की कमी और सीमित प्रशिक्षण का मतलब है कि युद्ध क्षेत्र में सैनिकों के जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। क्रिवेंको, जिसका संगठन रूसी सैनिकों को कानूनी सहायता प्रदान करता है ने कहा कि उन्हें अक्सर उन सैनिकों के माता-पिता से संपर्क करना पड़ता है जिन्होंने एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे और एक हफ्ते बाद ही यूक्रेन में समाप्त हो गए।

लड़ने से इंकार करने वाले सैनिकों को मिलती है यातना
मॉस्को टाइम्स ने यह भी बताया कि अनुबंधित सैनिक जो लड़ने से इनकार कर रहे हैं, उन्हें उनके कमांडरों द्वारा घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है, और उन्हें युद्ध के मैदान में वापस लाने के लिए धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। अखबार ने कहा कि रूस की 11वीं गार्ड्स एयर असॉल्ट ब्रिगेड के सैनिकों ने इस महीने की शुरुआत में अपना इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन उनके अनुरोध को प्रतिरोध के साथ दबा दिया गया।

और अधिक लंबा खींचेगा युद्ध
इस बीच अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रमुख विलियम बर्न्स ने दावा किया है कि युद्ध में अब तक 15,000 से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं इसके अलावा युद्ध में अब तक 45,000 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। एजेंसी ने ये भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति के बारे में ये अफवाह फैलायी जा रही है कि वे बीमारी से जूझ रहे हैं। पुतिन बिल्कुल स्वस्थ हैं और ठीक हैं। बर्न्स ने कहा कि रूस ने इस युद्ध की भारी कीमत चुकाई है। इस युद्ध में यूक्रेन को भी नुकसान हुआ है लेकिन यह रूस के मुकाबले कम ही है। इस बीच अमेरिकी सेना जर्नल मार्क मिले ने संकेत दिया है कि यह युद्ध अब लंबे वक्त तक चल सकता है। मिले ने कहा कि डोनबास में भीषण युद्ध जारी है और किसी भी पक्ष को बढ़त मिलने तक इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
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