पुतिन ने गैस आपूर्ति रोकने की दी धमकी तो तिलमिला उठे बाइडेन, US बोला, ऊर्जा को हथियार बना रहा रूस

व्हाइट हाउस ने आरोप लगाया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ऊर्जा को हथियार बना रहे हैं। उधर, पुतिन ने कहा कि वे यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रखेंगे तब तक कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर लेंगे।

वाशिंगटन, 8 सितंबर : यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से अमेरिका और रूस के बीच कड़वाहट लगातार बढ़ती ही जा रही है। विश्व में इसी बात को लेकर चिंता है कि, अगर यूक्रेन में ऐसी ही युद्ध चलता रहा और वाशिंगटन और मास्को के बीच तनातनी ऐसे ही चलता रहा तो विकासशील देशों की स्थिति क्या होगी? इन सबके बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमकी दी थी कि, अगर अमेरिका ने उसकी गैस की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा तो मास्को पश्चिमी देशों को ऊर्जा निर्यात में पूरी तरह से कटौती कर देगा (Russian President Vladimir Putin is weaponizing energy said america)। रूसी राष्ट्रपति के इस धमकी के बाद अमेरिका ने आज आरोप लगाया कि, रूस ऊर्जा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

पुतिन ने खाई कसम, हम यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे

पुतिन ने खाई कसम, हम यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे

रूसी राष्ट्रपति के इस धमकी से अमेरिका तिलमिला उठा है और उसने भी पुतिन पर पश्चिमी देशों के खिलाफ ऊर्जा को हथियार बनाने का आरोप लगा दिया है। अमेरिका का कहना है कि, रूस ऊर्जा के सहारे पश्चिमी देशों को धमका रहा है। इससे एक दिन पहले पुतिन ने कसम खाई थी कि, यूक्रेन पर तब तक रूसी कार्रवाई जारी रहेगा जब तक वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर लेता।

अमेरिका ऊर्जा संकट से निपटने की कर रहा तैयारी

अमेरिका ऊर्जा संकट से निपटने की कर रहा तैयारी

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की इस धमकी के बाद, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के.जीन पियरे (White House Press Secretary Karine Jean-Pierre) ने कहा कि, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ ने एक टास्कफोर्स का गठन किया है। इसके जरिए यूरोप के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के वैकल्पिक तरीके खोजे जा रहे हैं। हम स्वच्छ ऊर्जा के विकास की क्षमता को बढ़ाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने दैनिक समाचार सम्मेलन में आगे कहा कि, राष्ट्रपति जो बाइ़़डेन और उनके यूरोपीय सहयोगियों को पता था कि, रूस ऐसी हरकतें कर सकता है, इसलिए हम ऊर्जा संकट से निपटने के लिए महीनों से तैयारियों में जुटे हुए हैं।

पुतिन क्या करेंगे अमेरिका को पता है

पुतिन क्या करेंगे अमेरिका को पता है

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के.जीन पियरे ने आगे बताया कि, यूरोप में सर्दी का मौसम आने वाला है, लेकिन टास्कफोर्स की कोशिशों से यूरोप की गैस की कमी पूरी हो जाएगी। अगर रूस गैस में कटौती करता है तो ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जर्मनी गैस भंडारण के लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लेगा। हमने यूरोप के गैस संकट से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। अमेरिका को पहले से ही पता था कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ऊर्जा में कटौती करना पुतिन के प्लेबुक का हिस्सा बनेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि, रूस पिछले कई महीनों से ऊर्जा को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए अमेरिका, यूरोप ऊर्जा चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

अमेरिका प्रतिबंधों में भोजन, ऊर्वरक शामिल नहीं

अमेरिका प्रतिबंधों में भोजन, ऊर्वरक शामिल नहीं

वहीं, एक अलग प्रेस वार्ता में, अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रेस सचिव वेदांत पटेल ने संवाददाताओं से कहा कि, काला सागर के जरिए अनाज को अन्य जरूरतमंद देशों तक पहुंचाया जाता है। यह एक मानवीय व्यवस्था है। अमेरिका ने काला सागर अनाज पहल पर रूस की भागीदारी के बदले में कोई प्रस्ताव नहीं दिया और ना ही उसने कोई प्रतिबंधों में राहत प्रदान की। सच बात तो यह है कि, अमेरिकी प्रतिबंधों में हमेशा भोजन और उर्वरक के लिए स्पष्ट छूट होती है, और अमेरिकी प्रतिबंधों ने कभी भी मानवीय सहायता को लक्षित नहीं किया है। "हम खाद्य और उर्वरक को वैश्विक बाजारों तक पहुंचते देखना चाहते हैं और रूस को 'काला सागर अनाज पहल'(Black Grain Sea Initiative) के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरा उतरना जारी रखना चाहिए। और इनमें से कुछ अन्य आरोप जो हमने देखे हैं, जैसे वैश्विक खाद्य कीमतें बढ़ रही हैं,हालांकि ऐसा नहीं है। वास्तव में, ब्लैक सी पोर्ट व्यवस्था के परिणामस्वरूप वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट आई है।

पुतिन ने रूस को अलग-थलग करने के प्रयासों का उड़ाया उपहास

पुतिन ने रूस को अलग-थलग करने के प्रयासों का उड़ाया उपहास


बता दें, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को अमेरिका नीत पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंधों के जरिये रूस को अलग-थलग करने के प्रयासों पर उपहास किया था। पुतिन ने रूस के सुदूर पूर्वी बंदरगाह शहर व्लादिवोस्तोक में आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में कहा कि यूक्रेन में सेना भेजने के पीछे आठ साल की लड़ाई के बाद उस देश के पूर्वी क्षेत्र में नागरिकों की रक्षा करना मुख्य लक्ष्य था। उन्होंने कहा, हम वे नहीं हैं जिन्होंने सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, हम इसे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि हमारी सभी कार्रवाई का उद्देश्य दोनबास के निवासियों की मदद करना है। यह हमारा कर्तव्य है और हम इस लक्ष्य को हासिल करके रहेंगे। उन्होंने जोर दिया कि रूस ने पश्चिमी देशों की पाबंदियों का सामना करते हुए अपनी संप्रभुता मजबूत की है। पुतिन ने भरोसा जताया कि हमने न तो कुछ खोया है और न ही कुछ खोएंगे।

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