भारत से टूट जाएगी दोस्ती? जिनपिंग के मॉस्को दौरे को लेकर कयास लगाने वाले एक्सपर्ट्स को रूस ने लताड़ा
भारत और रूस के बीच कई दशकों से काफी मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में चीन और रूस के बीच की नजदीकी काफी बढ़ गई है। हालांकि, रूस बार बार कहता है, कि भारत को लेकर उसकी नीति नहीं बदलेगी।

Russia on Friendship with India: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रूस दौरे के बाद, दोनों देशों के बीच जो ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया गया है, उसमें पहली बार इंडो-पैसिफिक के खिलाफ एशिया पैसिफिक नीति बनाने की बात कही गई है। जिसके बाद एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन और रूस की एशिया पैसिफिक पॉलिसी रूस और भारत के रिश्तों में दरार ला सकता है। लेकिन, रूस ने ऐसे दावे करने वाले एक्सपर्ट्स को लताड़ लगाई है और कहा है, कि रूस को ऐसे एक्सपर्ट्स पर तरस आता है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने गुरुवार को मीडिया विशेषज्ञों के उन दावों का खंडन किया है, कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया रूस यात्रा भारत-रूस रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाएगी।
रूस ने दावों को किया सिरे से खारिज
भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने एक ट्वीट में कहा, कि "शी जिनपिंग की रूस यात्रा को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है, कि रूस-चीन संबंध रूस-भारत सामरिक एलायंस को प्रभावित करेंगे"। रूसी दूत ने इसे "इच्छाधारी सोच" कहकर खारिज कर दिया है। रूसी राजदूत ने लिखा है, कि "शी जिनपिंग की रूस यात्रा के परिणामों के इन दिनों विश्लेषण की प्रचुरता है। ऐसा लगता है, जैसे विभिन्न प्रतिष्ठित भारतीय विशेषज्ञ रूस-चीन संबंधों को लेकर सपना देखते हैं, रूस-भारत सामरिक अलायंस को नुकसान पहुंचाते हैं। ये प्वाइंट एक इच्छाधारी सोच का मामला है।" रूसी राजदूत ने एक्सपर्ट्स पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, कि "रूस को ऐसे एक्सपर्ट्स पर तरस आता है, जो भारत और रूस के संबंधों को लेकर ऐसी राय रखते हैं।" उन्होंने जोर देते हुए कहा, कि "रूस पहले भी कह चुका है, कि रूस के चीन के साथ संबंध और रूस के भारत के साथ संबंध को अलग अलग देखा जाना चाहिए, इन्हें आपस में मिलाना नहीं चाहिए।"
पुतिन-शी जिनपिंग में क्या-क्या बात हुई?
आपको बता दें, कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 20 से 23 मार्च तक रूस की तीन दिवसीय यात्रा पर थे। मास्को में, शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुलाकात की थी और इस दौरान शी जिनपिंग ने यूक्रेन युद्ध रोकने को लेकर 12 सूत्रीय प्लान भी पेश किया था। शी जिनपिंग के मॉस्को दौरे को लेकर माना गया है, कि दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित होने का भारत को नुकसान हो सकता है, और इन्हीं दावों का रूस ने जोरदार खंडन किया है। शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा, कि उन्हें विश्वास है कि पुतिन को अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले रूसी लोगों का समर्थन प्राप्त है। शी जिनपिंग की मॉस्को की राजकीय यात्रा की शुरुआत में अनौपचारिक वार्ता में बोलते हुए, पुतिन ने यह भी कहा, कि रूस हाल के दशकों में चीन के तेजी से विकास से "थोड़ा ईर्ष्या" कर रहा था। इस बीच, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम ने चीनी नेता से अपने प्रभाव का उपयोग करने और युद्ध को समाप्त करने के लिए मास्को पर दबाव डालने का आह्वान किया था।
जिनपिंग के दौरे पर पश्चिमी देशों की नजर
वहीं, शी जिनपिंग के रूस दौरे पर पश्चिमी देशों की भी नजर थी। उनके दौरे को लेकर यूके ने कहा था, कि चीन को क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के लिए रूस से यूक्रेन में अपने युद्ध को समाप्त करने की मांग करनी चाहिए। यूके के प्रधान मंत्री ऋषि सनक के प्रवक्ता ने कहा, कि "हमें उम्मीद है, कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस अवसर का उपयोग राष्ट्रपति (व्लादिमीर) पुतिन पर यूक्रेनी शहरों, अस्पतालों, स्कूलों पर बमबारी बंद करने के लिए दबाव डालने के लिए करेंगे, जो हम दैनिक आधार पर देख रहे हैं।" वहीं, यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओलेग निकोलेंको ने कहा, कि कीव को उम्मीद है कि चीन यूक्रेन में युद्ध को खत्म करने के लिए रूस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेगा। पुतिन के साथ वार्ता के लिए चीन के शी जिनपिंग के मॉस्को पहुंचने के तुरंत बाद निकोलेंको ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा, कि "यूक्रेन चीनी राष्ट्रपति की रूस यात्रा का बारीकी से अनुसरण कर रहा है।"












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