रूस और चीन हैं विरोधी ताक़तें: अमरीका
अमरीका के लिए नई सुरक्षा नीति बना रहे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस और चीन को उनके देश के आर्थिक प्रभुत्व के लिए प्राथमिक खतरा बताया है.
अपने ''अमरीका पहले'' के सिद्धांत पर आधारित भाषण में ट्रंप ने पिछली सरकार की विदेश नीति की 'असफलताएं' गिनाई.
ट्रंप ने पाकिस्तान की आलोचना की कि वो इस्लामी दहशतगर्दी को रोकने के लिए पूरी कोशिश नहीं कर रहा है. साथ ही उन्होंने परमाणु कार्यक्रम के लिए उत्तर कोरिया पर भी निशाना साधा.
वॉशिंगटन की रोनाल्ड रीगन बिल्डिंग में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह चुनौतियों का एक नया दौर है. उन्होंने दुनिया के ताक़तवर देशों के प्रति पिछली अमरीकी सरकारों के रवैये पर भी नाख़ुशी जताई.
ट्रंप के मुताबिक़ रूस और चीन ''चुनौती देने वाली ताक़त'' हैं लेकिन अमरीका को उनके साथ अच्छी साझेदारी बनाने की कोशिश करनी होगी.
अच्छी साझेदारी की कोशिश
इस भावना की मिसाल के तौर पर डोनल्ड ट्रंप ने उस वाक़ये का ज़िक्र किया जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने उन्हें फ़ोन करके धन्यवाद दिया.
ट्रंप के मुताबिक़ पुतिन सीआईए से मिली उस जानकारी के लिए शुक्रिया बोल रहे थे जिसमें सीआईए ने क्रेमलिन को एक कथित आतंकी हमले के बारे में आगाह किया था.
हालांकि ट्रंप के भाषण से पहले छपी इस नई सुरक्षा नीति में रूस और चीन के लिए कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया है. इसमें इन्हें "सुधारवादी शक्तियां" बताया गया है.
अपने भाषण में डोनल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि अमीर देशों को उनकी रक्षा में आने वाले अमरीकी खर्च की भरपाई करनी चाहिए.
ट्रंप की नई योजना के ''चार स्तंभ''
11 महीने में तैयार हुई, 68 पेज की नई रणनीति में ''चार स्तंभ'' बताए गए हैं. इन चार स्तंभों में अपने देश की रक्षा, अमरीकी समृद्धि को बढ़ावा देने, ताक़त के इस्तेमाल से शांति लाने और अमरीकी असर को बढ़ाना शामिल है.
लेकिन आबोहवा में आ रहे बदलाव को देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना गया है.
इस पर उनकी जमकर आलोचना भी हो रही है. जानकारों के मुताबिक़ उनके ''चार स्तंभों'' में मानवाधिकार और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का कहीं ज़िक्र नहीं है.
माना जा रहा है कि इस रणनीति के ज़रिए ट्रंप अपने चुनावी वादों की तरफ़ वापस लौटने की कोशिश कर रहे है.












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