ऋषि सुनक के दादा थे RSS के मेंबर? केन्या में विद्रोहियों को गुरिल्ला युद्ध की दी ट्रेनिंग, रिपोर्ट में खुलासा
ऋषि सुनक के दादाजी रामदास सुनक का जन्म ब्रिटिश शासन वाले पंजाब में हुआ था। वहां से 1930 के दशक में वो केन्या चले गए। ऐसा दावा किया गया है कि उन्होंने अंग्रेजी शासन से लड़ रहे विद्रोहियों को गुरिल्ला युद्ध क ट्रेनिंग दी।

यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के दादा ने पचास के दशक में क्रूर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ विद्रोह में सहायता की थी। ये खुलासा ब्रिटिश अखबार द डेली मेल ने किया है। इस रिपोर्ट में सुनक के दादा रामदास सुनक के भारत में RSS से भी जुड़े होने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऋषि सुनक के दादा रामदास सुनक केन्या के मऊ मऊ लड़ाकों को गुरिल्ला तकनीक से प्रशिक्षित किया था। इस दौरान रामदास सुनक ब्रिटिश पैरोल पर थे और स्वतंत्रता समर्थक गतिविधियों को समर्थन दे रहे थे।
मऊ मऊ सेनानी केन्या के राष्ट्रवादियों का एक समूह था। मऊ मऊ ने 1950 के दशक में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मऊ मऊ विद्रोह 1952 में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ। इसमें मऊ मऊ लड़ाकों ने गुरिल्ला रणनीति अपनाई जिसमें घात लगाकर हमला करना, छापे मारना और तोड़-फोड़ करना शामिल था।
इस माध्यम से विद्रोही ब्रिटिश अधिकारियों और ब्रिटिश सत्ता का समर्थन करने वाले वफादार अफ्रीकियों को निशाना बनाते थे। डेली मेल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये ऋषि सुनक के दादा भी ऐसे लोगों में शामिल थे जिन्होंने मऊ मऊ विद्रोहियों को गुरिल्ला ट्रेनिंग दी थी।
मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक ऋषि सुनक के दादाजी रामदास सुनक का जन्म ब्रिटिश शासन वाले भारत के पंजाब में हुआ था। वहां से 1930 के दशक में वो पूर्वी अफ्रीका चले गए और वहीं बस गए।
रिपोर्ट के मुताबिक कथित तौर पर रामदास ने माखन सिंह नाम के एक बचपन के दोस्त के साथ मिलकर केन्या के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। माखन सिंह भी पंजाब से था और केन्या में एक प्रमुख ट्रेड यूनियन बन गया।
केन्या की आजादी के बाद वहां पर नस्लवाद का सामना करने के बाद रामदास सुनक यूके चले गए। यहां उन्होंने एक क्लर्क की नौकरी की और फिर राजस्व विभाग में वरिष्ट प्रशासक के रूप में काम किया।
रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि रामदास बाद में साउथेम्प्टन में बस गए जहां उन्होंने वैदिक सोसायटी हिंदू मंदिर की स्थापना करने में मदद की।
डेली मेल की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रामदास सुनक भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े भारत के राष्ट्रवादी समूह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मेंबर थे।
स्वतंत्रता के बाद, रामदास ने केन्या में नस्लवाद का सामना करने के बाद ब्रिटेन जाने का फैसला किया, जहाँ उनके दो बेटे पहले से ही विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, वह बाद में साउथेम्प्टन में बस गए, जहाँ उन्होंने वैदिक सोसायटी हिंदू मंदिर की स्थापना में मदद की।












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