मशीनों की बढ़ी फैक्ट्रियों में मांग तो स्विट्जरलैंड में सैलरी पर हुई वोटिंग

जेनेवा। पिछले करीब एक वर्ष से स्विट्जरलैंड में एक अनोखा कैंपेन चल रहा था। इस कैंपेन में लोगों का कहना था कि सरकार सभी को मिनिमम सैलरी दे भले वह काम करें या ना करें। इसी कैंपेन पर रविवार को स्विट्जरलैंड में एक जनमत संग्रह कराया गया। इसमें ज्‍यादातर लोगों ने इस मांग को खारिज कर दिया कि सरकार बिना काम के भी लोगों को सैलरी दे।

Referendum on Basic salary in Switzerland

क्‍यों कराई गई वोटिंग

स्विट्जरलैंड के 78% लोगों बिना काम के सैलरी वाले ऑफर को खारिज कर दिया है। यह मांग स्विट्जरलैंड में उस समय उठी जब देश में ज्‍यादातर फैक्ट्रियों में इंसानों की जगह म़़शीनों से काम लिया जाने लगा। इसकी वजह से देश में गरीबी और असमानता बढती जा रही थी। जिसकी वजह से लोगों ने यूनिवर्सल बेसिक सैलरी की मांग की थी।

कितनी मिलती सैलरी

इस ऑफर के तहत स्विट्जरलैंड के युवाओं को कम से कम 2500 स्विस फ्रैंक यानी लगभग एक लाख 71 हजार रुपए मिलते।

विदेशी नागरिकों को भी देनी पड़ती सैलरी

सिर्फ 22% लोगों ने इस ऑफर के पक्ष में वोट डाले। अगर यह ऑफर पास हो जाता तो सरकार को हर महीने देश के सभी नागरिकों और पांच वर्ष से वहां रह रहे उन विदेशियों को जिन्होंने वहां की नागरिकता ले ली है उन्हें बेसिक सैलरी देनी होती।

विदेशी नागरिक भी बने वोटिंग का हिस्‍सा

बता दें कि ऐसा शायद दुनिया में पहली बार है जब ऐसे किसी प्रस्ताव को किसी देश में नागरिकों के बीच रखा गया था। इस प्रस्ताव में लोगों से पूछा गया था कि क्या वे देश के नागरिकों के लिए एक तय इनकम के प्रावधान का समर्थन करते हैं या नहीं? वोटिंग करने वालों में वे लोग भी शामिल थे, जो स्विट्जरलैंड में पांच साल से ज्यादा लंबे समय से बतौर कानूनी निवासी के तौर पर रह रहे हैं।

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