'गलवान झड़प ने 45 साल बाद बहाया खून, China नहीं मानता लिखित समझौता', Raisina Conference में बोले एस जयशंकर
टोक्यो में रायसीना गोलमेज सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2020 में सीमाओं पर हुई झड़पों के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा गलवान घाटी पिछले चार दशक से शांति थी लेकिन यहां एक ऐसी झड़प हुई जिसने हालात बदल दिए। एस जयशंकर ने समिट ने अपने संबोधन में गलवान झड़प के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भारत के साथ लिखित समझौते को भी नहीं माना गया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को चीन पर कटाक्ष किया और कहा कि बीजिंग भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे लिखित समझौतों को कायम रखने में विफल रहा है। टोक्यो में आयोजित रायसीना गोलमेज सम्मेलन में विदेश मंत्री ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जब क्षमताओं और प्रभाव और महत्वाकांक्षाओं में बहुत बड़े बदलाव होते हैं, तो सभी महत्वाकांक्षाएं और रणनीतिक परिणाम भी सामने आते हैं।

वहीं सम्मेलन में मंच ने एस जयशंकर ने चीन की भी खिंचाई की। उन्होंने भारत के साथ लिखित समझौतों का पालन करने में चीन की विफलता पर निराशा व्यक्त की। और कहा कि चीन की इस रवैये से चीन के भारत के साथ संबंधों और और द्विपक्षीय इरादों की स्थिरता पर सवालिया निशान लग गया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "दुर्भाग्य से, चीन के मामले में पिछले दशक में बहुत कुछ ऐसा देखा गया, जो पहले कभी नहीं हुआ। वर्ष 1975 से 2020 के बीच में 45 साल में सीमा पर कोई रक्तपात नहीं हुआ, लेकिन 2020 में सबकुछ बदल गया।"
टोक्यो में गोलमेज सम्मेलन से पहले भी भी विदेश मंत्री ने चीन को निशाने पर लिया था। 2 मार्च को दिल्ली में एक थिंक टैंक में एक इंटरैक्टिव सत्र के दौरान, विदेश मंत्री ने इसी तरह का रुख दोहराया। चीन द्वारा सीमा प्रबंधन समझौतों के पालन के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने भारत और चीन के बीच बेहतर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।












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