जानिए उस ब्रीफकेस का राज, जो हमेशा होता है व्लादिमीर पुतिन के साथ, अंदर है तबाही मचाने वाला बटन
चूंकी इस ब्रीफकेस के अंदर दुनिया को तबाह करने की क्षमता है, लिहाजा इस ब्रीफकेस को हमेशा कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाता है और इसे खोलने के लिए स्पेशल कोड बनाकर डिजाइन किया गया है।
मॉस्को, फरवरी 19: रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है और उस तनाव के बीच ही आज से रूस ने परमाणु मिसाइलों के साथ युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है और खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस परमाणु मिसाइलों के युद्धाभ्यास का गवाह बन रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो ये है, कि क्या रूस ने युद्ध की आखिरी तैयारी शुरू कर दी है? लेकिन, क्या आप जानते हैं, कि जिस तरह अमेरिका के राष्ट्रपति के पास सीक्रेट ब्रीफकेस रहता है, ठीक उसी तरह का ब्रीफकेस रूसी राष्ट्रपति के पास भी रहता है। आईये जानते हैं, कि व्लादिमीर पुतिन के एक बटन दबाते ही कैसे पूरी दुनिया में तबाही मच सकती है।

परमाणु हथियारों के साथ युद्धाभ्यास
यूक्रेन से तनाव के बीच इस बात की रिपोर्ट है कि, रूस अमेरिका और पश्चिमी देशों को चेतावनी देने के लिए न्यूक्लियर हथियारों के साथ युद्धाभ्यास कर सकता है, जिसकी घोषणा एक दिन पहले रूस की तरह से की गई है। रिपोर्ट है कि, इस युद्धाभ्यास में रूस की तरफ से न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके साथ साथ रूस क्रूज मिसाइलों का भी परीक्षण कर सकता है। जाहिर है, ये हथियार पूरी दुनिया में तबाही मचाने के लिए काफी हैं। रूसी न्यूज एजेंसी 'तास' की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अरने सीक्रेट ब्रीफकेस के साथ ही युद्धाभ्यास के दौरान मैदान में मौजूद रहेंगे।

पुतिन का परमाणु ब्रीफकेस
पिछले साल मार्च महीने में, जब यूक्रेन के खिलाफ रूस ने घेराबंदी शुरू की थी, उस वक्त रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा था कि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जहां भी जाते हैं, उनके साथ जरूरी कम्युनिकेशन नेटवर्क मौजूद रहता है, जिसमें रणनीतिक उपकरण भी होते हैं। जब रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता पेसकोव से पूछा गया, कि क्या रूसी राष्ट्रपति पुतिन के पास जो सीक्रेट ब्रीफकेस होता है, उसमें न्यूक्लियर हथियार के सीक्रेट बटन भी होते हैं, तो इस सवाल के जवाब पर पेसकोव ने कहा था कि, 'रूसी राष्ट्रपति चाहे देश में हों या फिर विदेश में, उनके पास हमेशा रणनीतिक उपकरण होता है।'

कैसा है रूसी राष्ट्रपति का ब्रीफकेस?
आपको जानकर हैरानी होगी, कि इस वक्त रूस के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार मौजूद हैं और एक अनुमान के मुताबिक, रूस के पास इस वक्त 6 हजार 257 परमाणु बम हैं और इन न्यूक्लियर हथियारों में इतनी शक्ति है, कि वो पूरी धरती को पूरी तरह से तबाह कर सकता है। लेकिन, रूसी राष्ट्रपति की इजाजत के बगैर इन न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और न्यूक्लियर हथियारों को दागने का आदेश राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसी ब्रीफकेस के जरिए देते हैं। हालांकि, देखने में ये ब्रीफकेस किसी साधारण ब्रीफकेस की तरह ही है, लेकिन साल 2019 में पहली बार दुनिया को पता चला था, कि ब्रीफकेस के अंदर क्या रहता है और अंदर से ब्रीफकेस कैसा दिखता है।

अंदर से कैसा दिखता है ब्रीफकेस?
रूसी राष्ट्रपति के सीक्रेट ब्रीफकेस में कई तरह के बटन दिखाई देते हैं और एक से 9 और शून्य की गिनती वाले बटन लगे हुए हैं। इस ब्रीफकेस में एक सफेद, एक लाल रंग और एक ग्रे रंग का भी बटन है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बटन को दबाकर, जब चाहें उसी वक्त रूसी राष्ट्रपति न्यूक्लियर हमले की इजाजत दे सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने भी इस बात की पुष्टि की थी, कि रूस अपने दुश्मनों को किसी भी वक्त जवाब देने की क्षमता रखता है और रूसी राष्ट्रपति के पास हमेशा न्यूक्लियर हमले का आदेश देने वाला ब्रीफकेस होता है।

कोड के जरिए खुलता है ब्रीफकेस
चूंकी इस ब्रीफकेस के अंदर दुनिया को तबाह करने की क्षमता है, लिहाजा इस ब्रीफकेस को हमेशा कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाता है और इसे खोलने के लिए स्पेशल कोड बनाकर डिजाइन किया गया है। यानि, स्पेशल कोड के जरिए ही इसे खोला जा सकता है और स्पेशल कोड क्या है, ये सिर्फ रूसी राष्ट्रपति पुतिन को पता रहता है। चूंकी इस ब्रीफकेस के जरिए रूस के 6 हजार से ज्यादा परमाणु बमों को नियंत्रित किया जाता है, लिहाजा इसकी सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जाती है और हर एक वक्त इसे सख्त सुरक्षा में रखा जाता है। राष्ट्रपति पुतिन चाहे रूस के अंदर दौरे पर हों या फिर वो विदेश के दौरे पर हों, रूसी अधिकारी हमेशा इस ब्रीफकेस को पुतिन के साथ ही लेकर चलते हैं। रूसी भाषा में इस ब्रीफकेस को चेगेट कहा जाता है और जो अधिकारी इस ब्रीफकेस को लेकर पुतिन के साथ रहते हैं, उन्हें इसे लेकर स्पेशल ट्रेनिंग दी गई होती है।

रूस के पास तीन ब्रीफकेस
रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पास इस तरह के तीन न्यूक्लियर ब्रीफकेस होते हैं और इस 'ट्रिपल की' के नाम से जाना जाता है। एक ब्रीफकेस हमेशा रूसी राष्ट्रपति के पास होता है, जबकि दूसरा ब्रीफकेस रूस के रक्षा मंत्री के पास होता है और तीसरा न्यूक्लियर ब्रीफकेस रूसी सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के पास होता है। लेकिन, सिर्फ राष्ट्रपति के पास ही परमाणु हथियार चलाने का सीधा अधिकार होता है और बाकी रक्षा मंत्री और सैन्य प्रमुख के पास परमाणु बम छोड़ने का सीधा अधिकार नहीं होता है। इस ब्रीफकेस को काफी आसान डिजाइन दिया गया है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि, रूस का बुजुर्ग नेता भी काफी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकता है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1983 से इस ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया जाने लगा।

रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट यानि एफएएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में इस वक्त रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम मौजूद हैं। परमाणु बम को लेकर एफएएस की लिस्ट के मुताबिक रूस के पास इस वक्त 6257 परमाणु बम हैं, जिनमें से 1600 परमाणु बम को रूस ने तैनात करके रखा हुआ है जबकि 4497 परमाणु बम को रूस ने रिजर्व करके रखा हुआ है। वहीं, रूस ने 1700 परमाणु बमों को रिटायर्ड कर दिया है। वहीं, एफएएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस वक्त कुल 5550 परमाणु बम हैं, जिनमें से अमेरिका ने इस वक्त 1800 परमाणु बमों को तैनात करके रखा है। वहीं, अमेरिका ने 3800 परमाणु बमों को रिजर्व करके रखा है, जबकि साढ़े 1700 परमाणु बम को अमेरिका रिटायर्ड कर चुका है। वहीं, एक्टिव परमाणु बमों की अगर बात की जाए तो तीसरे नंबर पर फ्रांस और चौथे नंबर पर ब्रिटेन शामिल हैं।

किसके पास कितने परमाणु हथियार
एफएएस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास इस वक्त 350 परमाणु बम मौजूद हैं। वहीं चौथे नंबर पर फ्रांस का स्थान है, जिसके पास 290 परमाणु बम हैं वहीं पांचवें नंबर पर 195 परमाणु बमों के साथ ब्रिटेन मौजूद है। ब्रिटेन के बाद नंबर है पाकिस्तान का, जिसके पास 165 परमाणु बम मौजूद हैं, वहीं पाकिस्तान के बाद भारत 160 परमाणु बम के साथ सातवें नंबर पर मौजूद है। हालांकि, एफएएस की रिपोर्ट में चीन के परमाणु बमों की संख्या पर शक जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के ने चोरी-छिपे भी परमाणु बम और हथियार इकट्ठा कर रखे होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों की संख्या में इसलिए कमी आ रही है क्योंकि रूस और अमेरिका अपने रिटायर्ड परमाणु बमों को खत्म कर रहे हैं।












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