आसमान में मिला ऐसा ऐस्टरॉइड, जिसपर है खरबों की दौलत, हाथ आया तो हर इंसान हो सकता है अरबपति!

नासा की रिपोर्ट के मुताबिक ये ऐस्‍टरॉइड एक 124 मील चौड़ा अंतरिक्ष चट्टान है जो ऐस्‍टरॉइड बेल्ट में सूर्य की परिक्रमा करता है।

वॉशिंगटन, अगस्त 07: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसे ऐस्‍टरॉइड का पता लगाया है, जो अपने आप में कुबेर का भंडार है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि इस ऐस्‍टरॉइड पर इतनी ज्यादा दौलत है, कि दुनिया का हर शख्स अरबों की दौलत का मालिक बन सकता है। नासा का अनुमान है कि इस इस ऐस्‍टरॉइड पर 10,000,000,000,000,000,000 डॉलर का भंडार है। इस ऐस्‍टरॉइड का नाम साइकी ऐस्‍टरॉइड है, जिसके बारे में काफी दिलचस्प बातें वैज्ञानिकों को पता चली हैं।

ऐस्‍टरॉइड साइकी पर खुलासे

ऐस्‍टरॉइड साइकी पर खुलासे

नासा की रिपोर्ट के मुताबिक ये ऐस्‍टरॉइड एक 124 मील चौड़ा अंतरिक्ष चट्टान है जो ऐस्‍टरॉइड बेल्ट में सूर्य की परिक्रमा करता है। नासा ने पता लगाया है कि मंगल और बृहस्पति के बीच अंतरिक्ष का एक डोनट के आकार का क्षेत्र है, जिसमें दस लाख से ज्यादा चट्टानें तैर रही हैं। नासा ने कहा है कि वो अनमोल खजाने को लेकर अंतरिक्ष में चक्कर लगाने वाले इस ऐस्‍टरॉइड की जांच के लिए एक अंतरिक्षयान भेजेगा। रिपोर्ट के मुताबिक ये अंतरिक्षयान 2026 में भेजा जाएगा, जो पता लगाएगा कि इस ऐस्‍टरॉइड पर कौन कौन सी दुर्लभ धातुएं मौजूद हैं। इसके साथ ही इस ऐस्‍टरॉइड की उत्पत्ति से लेकर तमाम जानकारियां भी जुटाने की कोशिश की जाएगी। चूंकी इस ऐस्‍टरॉइड पर अरबों खरबों की दौलत मौजूद है, लिहाजा इस ऐस्‍टरॉइड को लेकर वैज्ञानिकों की अच्छी खासी दिलचस्पी है।

साइकी के लिए नासा का मिशन

साइकी के लिए नासा का मिशन

हालांकि, पहले अनुमान लगाया गया था कि ये ऐस्‍टरॉइड किसी ग्रह का कोर हो सकता है, लेकिन इस मिशन में मदद करने के लिए कैलिफोर्निया के पासाडेना में कैलटेक यूनिवर्सिटी की एक टीम द्वारा ऐस्‍टरॉइड साइकी का एक नया तापमान मानचित्र बनाया गया है ताकि इसकी सतह के गुणों के बारे में पूरी जानकारी हासिल की जा सके। जिसके बाद इसे देखने के लिए चिली स्थित एक रेडियो टेलिस्कोप का सहारा वैज्ञानिकों ने लिया और फिर रिसर्चर्स ने 50 पिक्सल के रेजोल्यूशन की एक तस्वीर खींचने में कामयाबी हासिल की और इसी तस्वीरों से साइको ऐस्‍टरॉइड के बारे में कई दिलचस्प जानकारियां हासिल हुई हैं। रिसर्च में पता लगा है कि ये ऐस्‍टरॉइड में 30 प्रतिशत धातुओं से बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक नासा का एयरक्राफ्ट आखिरी चरण में है और 2026 में ये एयरक्राफ्ट-16 साइकी पर जाएगा।

नासा के मिशन के बारे में जानिए

नासा के मिशन के बारे में जानिए

ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 मूल रूप से 1852 में खोजा गया था और माना जाता है कि सौर मंडल के गठन के समय 'हिट-एंड-रन टकराव' द्वारा नष्ट किए गए प्रोटोप्लानेट के अवशेष से बना है। रिपोर्ट के मुताबिक नासा जिस अंतरिक्ष यान का निर्माण कर रहा है, उसे अगले साल अगस्त में फ्लोरिडा के केप कनेरवल से स्पेसएक्स फॉल्कन हेवी की मदद से लॉन्च किा जाएगा। नासा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये अंतरिक्षयान सूरज की रोशनी से मिलने वाली ऊर्जा से चलेगा और मंगल-बृहस्पति के बीच मुख्य बेल्ट में स्थिति ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 पर 2026 में पहुंचेगा। हबल टेसीस्कोप से देखने पर पता चला है कि ये ऐस्‍टरॉइड दुर्लभ धातुओं से बना हुआ है, जिसकी कीमत कितनी हो सकती है, इसका अनुमान लगाना भी असंभव है।

ऐस्‍टरॉइड साइकी है सिर्फ खजाना

ऐस्‍टरॉइड साइकी है सिर्फ खजाना

फोर्ब्स मैग्जीन ने अपनी रिपोर्ट में ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 को लेकर कहा है कि अगर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक साथ कर लें, फिर भी इस ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 पर जितना खजाना है, वो कई गुना ज्यादा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 पर 10 हजार क्वाड्रिलियन डॉलर यानि 10,000,000,000,000,000,000 का खजाना हो सकता है। नासा ने कहा है कि उसका स्पेसक्राफ्ट 21 महीने तक ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 की मैपिंग करेगा और लगातार रिसर्च करेगा, जिसके डेटा को वैज्ञानिक रिसर्च करेंगे।

धरती से 37 करोड़ किलोमीटर दूर

धरती से 37 करोड़ किलोमीटर दूर

नासा के मुताबिक ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 हमारी पृथ्वी से करीब 37 करोड़ किलोमीटर दूर है और ये करीब 226 किलोमीटर चौड़ा है। नासा ने कहा है कि इस विशालकाय ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 पर दुर्लभ धातुओं का खजाना छिपा हुआ है और अब तक जितने भी एस्टरॉइड की खोज की गई है, उनमें ये सबसे ज्यादा मूल्यवान खोज हो सकता है। जब इस ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 को खोजा गया था, तब अनुमान लगाया गया था कि ये धातुओं से बना एक ऐस्‍टरॉइड है। सामान्यत: जो ऐस्‍टरॉइड होते हैं, वो पत्थर, बर्फ से बने होते हैं, लेकिन अब पता चला है कि ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 पर सिर्फ दुर्लभ धातुएं ही मौजूद हैं, जो धरती पर मौजूद हर एक इंसान को अरबपति बना सकता है।

खजाने की खोज के लिए खास यान

खजाने की खोज के लिए खास यान

वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि किसी अविकसित ग्रह की कोर में आए बिखराव की वजह से ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 का निर्माण हुआ होगा। लिहाजा ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाना काफी जरूरी है, ताकि पृथ्वी समेत दूसरे ग्रहों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई जा सके। नासा ने जिस स्पेसक्राफ्ट का डिजाइन तैयार किया है, उसमें जेपीएल में स्पेसक्राफ्ट का सोलर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन चैसिस है, जो देखने में किसी गाड़ी के आकार का लगता है। यह इस स्पेसक्राफ्ट का 80 प्रतिशत हिस्सा होगा और अगले एक साल में इसका निर्माण पूरी तरह से पूरा हो जाएगा। ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 की खोज नासा के डिस्कवरी प्रोग्राम का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत कम कीमतों पर रोबोटिक्स तैयार किए जाते है। नासा के इस मिशन का लक्ष्य है कि क्या इस क्षुद्रग्रह को धरती पर लाया जा सकता है?

क्या धरती पर लाया जाएगा 'खजाना'?

क्या धरती पर लाया जाएगा 'खजाना'?

अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 को नासा के वैज्ञानिक धरती पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अभी ये काफी ज्यादा मुश्किल है, लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 धरती पर लाया गया तो फिर क्या होगा। वैज्ञानिकों ने आशंका जताते हुए कहा है कि अगर ऐस्‍टरॉइड साइकी-16 को धरती पर लाया जाता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी और ऐस्‍टरॉइड के धातुओं के बाजार में आने से धरती पर मौजूद दूसरे धातुओं की कीमत पूरी तरह से गिर जाएगी। इसके साथ ही सोना, चांदी और हीरा के चलने वाले बड़े बड़े खान तो बंद होंगे ही, इसके साथ ही हजारों कंपनियां पूरी तरह से बर्बाद हो सकती हैं।

दुनिया में छिड़ सकती है युद्ध

दुनिया में छिड़ सकती है युद्ध

इसके साथ ही इस अनमोल ऐस्‍टरॉइड की वजह से दुनिया में लड़ाई भी छिड़ सकती है, क्योंकि अगर नासा इसे लेकर धरती पर आता है, तो अमेरिका के पास इतनी दौलत हो जाएगी, जिसे वो संभाल नहीं सकता है। वहीं, अमेरिका इतनी दौलत का क्या करेगा, ये भी समझ से परे है, लिहाजा वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया में बैलेंस पूरी तरह से खत्म हो सकता है, जो इस दुनिया को खत्म करने के लिए काफी होगा।

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