शपथ ग्रहण में बिजली गुल, अंधेरे में बैठे रानिल विक्रमसिंघे, सीधा प्रसारण हुआ प्रभावित
रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। जब रानिल राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए उसके बाद से प्रदर्शनकारियों ने जमकर उनके खिलाफ नारेबाजे की। अब खबर है कि, उनके शपथ ग्रहण समारोह के क्रम
कोलंबो, 21 जुलाई: रानिल विक्रमसिंघे ने आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। जानकारी के मुताबिक, संसद परिसर में बिजली गुल होने से राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के शपथ ग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण बंद हो गया (Power cut stops Sri Lankan President swearing-in ceremony)। इस दौरान संसद में रानिल विक्रमसिंघे, महिंदा राजपक्षे समेत पक्ष और विपक्ष के तमाम वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। खबर के मुताबिक, इन नेताओं को करीब 10 मिनट तक अंधेरे में बैठना पड़ा। अब इसकी जांच सीआईडी करेगी।

शपथ ग्रहण के समय बिजली गुल हुई
रानिल विक्रमसिंघे के शपथ ग्रहण समारोह के क्रम में अचानक बिजली चली गई। उस वक्त संसद में नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, महिंदा राजपक्षे और तमाम बड़े नेता वहां मौजूद थे। बिजली चली जाने की वजह से इन नेताओं को काफी देर तक अंधेरे में बैठना पड़ा और शपथ ग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण बंद हो गया। वेब पोर्टल 'कोलंबो पेज' के मुताबिक श्रीलंका के अधिकारियों ने इस घटना की आपराधिक जांच विभाग से जांच कराने का फैसला किया है।

देश के 8वें राष्ट्रपति बने रानिल विक्रमसिंघे
वहीं, प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने संसद भवन परिसर में 73 वर्षीय विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। बता दें कि, रानिल विक्रमसिंघे के समक्ष देश को आर्थिक पटरी पर लाने की चुनौती है। गोटाबाया के भाग जानें के बाद से श्रीलंका में घोर राजनीतिक संकट उत्पन्न हे गई।

लाइट कटने से लाइव टेलिकॉस्ट हुआ बंद
विक्रमसिंघे के शपथ ग्रहण समारोह का सरकार द्वारा संचालित चैनल 'रूपवाहिनी' द्वारा सीधा प्रसारण किया जाना था और अन्य टेलीविजन चैनलों द्वारा भी इसका एक साथ प्रसारण किया जाना था।

रेड कार्पेट पर प्रवेश करते ही बिजली गई
खबर के अनुसार हालांकि राष्ट्रपति के रेड कार्पेट पर संसद परिसर में प्रवेश करने के बाद सीधा प्रसारण बंद हो गया। बाद में यह बताया गया कि संसद परिसर में बिजली गुल होने के कारण सीधा प्रसारण रोक दिया गया था। बता दें कि, श्रीलंका इस वक्त घोर आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है। ऐसे में नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के लिए देश को आर्थिक पटरी पर लाना बड़ी चुनौती होगी।












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