यूक्रेन को हथियार देना नैतिक रूप से सही, पोप फ्रांसिस बोले आत्मरक्षा में युद्ध लड़ना देश से प्रेम करना है
रोम, 15 सितंबरः रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे जंग के 200 दिन से अधिक हो चुके हैं। शुरुआत में ऐसा लगा कि यूक्रेन बस कुछ ही दिनों में रूस के सामने हथियार डाल देगा मगर आश्चर्यजनक रूप से न सिर्फ यूक्रेन इस जंग में रूस से कड़ी टक्कर ले रहा है बल्कि पश्चिमी देशों द्वारा मुहैया कराए गए हथियारों की मदद से रूस द्वारा कब्जा किए गए कई क्षेत्रों को फिर से वापस हासिल कर रहा है। इस बीच पोप फ्रांसिस ने गुरुवार को कहा कि विभिन्न राष्ट्रों द्वारा यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति करना नैतिक रूप से वैध है क्योंकि इससे देश को रूसी आक्रमण से बचने में मदद मिल रही है।

हथियार मुहैया कराना नैतिक रूप से जायज
कजाकिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा से लौट रहे एक विमान में पत्रकारों से बात करते हुए, पोप फ्रांसिस ने कीव को आखिरी बातचीत के लिए खुला दिल रखने का भी आग्रह किया। पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को भेजे जाने वाले हथियारों को उचित बताते हुए पोप फ्रांसिस ने कहा, "यह एक राजनीतिक निर्णय है जो नैतिक, नैतिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है, अगर इसे नैतिकता की शर्तों के तहत किया जाता है।"

आत्मरक्षा को बताया जायज
पोर फ्रांसिस ने रोमन कैथोलिक चर्च के "जस्ट वॉर" सिद्धांतों की व्याख्या की, जो एक आक्रामक राष्ट्र के खिलाफ आत्मरक्षा के लिए घातक हथियारों के आनुपातिक उपयोग की अनुमति देते हैं। पोप ने कहा, "आत्मरक्षा न केवल जायज है, बल्कि मातृभूमि के लिए अपने प्रेम की अभिव्यक्ति भी है। दूसरे देश को हथियारों की आपूर्ति करना नैतिक या अनैतिक होने के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए, फ्रांसिस ने कहा कि यह अनैतिक हो सकता है अगर किसी का इरादा युद्ध को और भड़काना हो, या फिर किसी देश का इरादा व्यापार के लिए अपने हथियार बेचना हो।

घुटने में खिंचाव से पीड़ित हैं पोप
पोप कई दिनों से घुटने के रोग से पीड़ित हैं। अपनी अतंरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान बैठकर ही संवाददाताओं का जवाब देते हुए पोप ने कि यूक्रेन को बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने ये युद्ध शुरू किया है उनके साथ बातचीत करना हमेशा मुश्किल होता है लेकिन इसे खारिज नहीं किया जाना चाहिए। पोप फ्रांसिस ने कहा कि कभी-कभी आपको इस तरह की बातचीत करनी पड़ती है। इसमें किसी राजनीतिक साजिश की बू आती है लेकिन यह किया जाना चाहिए।"

अमेरिका सहित कई देश यूक्रेन को दे रहे हथियार
फ्रांसिस ने कहा कि 'संवाद' हमेशा एक बढ़ा हुआ हाथ होता है। यह हमेशा एक कदम आगे होता है। अगर संवाद न हो तो हम शांति का एकमात्र उचित द्वार बंद कर देते हैं। बताते चलें कि यूक्रेनी सेना के पीछे अमेरिका और पश्चिमी देश खड़े रहे। अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति यूक्रेन को किया है। वहीं, पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियारों के अलावा हर तरह की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। यह युद्ध यूक्रेन और रूस के बीच नहीं होकर अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका व पश्चिमी देशों के बीच भी हो चुका है। अमेरिका ने यूक्रेन की मदद कर इस युद्ध को लंबा खींच दिया।
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