PM Swearing: चौंकाएगी पीएम मोदी के शपथ समारोह गेस्ट लिस्ट, मोइज्जू ही नहीं मालदीव के 3 कैबिनेट मंत्री भी शामिल
PM swearing ceremony guest list: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल की 9 जून से शुरुआत करेंगे। पीएम के शपथ ग्रहण समारोह के लिए देश विदेश के कई बड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया है। समारोह के आमंत्रित अतिथियों की लिस्ट में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के साथ मालदीव सरकार में उनके कैबिनेट में शामिल तीन मंत्रियों का भी नाम शामिल किया गया है।
पीएम मोदी शपथ ग्रहण समारोह में अतिथियों के आमंत्रण को लेकर एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें पांच देशों के नेताओं को बुलाया जाएगा। इसके अलावा ये भी कहा गया कि लिस्ट में मालदीव के राष्ट्रपति के अलावा उनके तीन सहयोगियों के भी नाम शामिल किए गए हैं।

भारत की नीति 'नेबर फर्स्ट' के तहत देश का फोकस हिंद महासागर के राज्यों के साथ सहयोग पर रहता है। जिसके तहत 2019 में पीएम शपत ग्रहण समारोह में बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और श्रीलंका के नेताओं को प्रधान मंत्री के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया था और इस बार भी इन दोनों को पीएम शपथ ग्रहण समारोह के आमंत्रित किए जाने वाले मेहमानों की लिस्ट में शामिल किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पड़ोसी सभी सात देशों, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और श्रीलंका के नेताओं को गुरुवार को औपचारिक निमंत्रण भेज दिया गया है। वहीं औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने से पहले ही, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के अधिकारियों ने प्रधान मंत्री शेख हसीना, प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल और राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने के पुष्टि कर दी थी।
मोइज्जू के निमंत्रण ने चौंकाया
मालदीव ने गुरुवार देर रात मुइज्जू के निमंत्रण को स्वीकार करने की पुष्टि की, माले के अधिकारियों ने कहा कि उनके साथ विदेश मंत्री मूसा जमीर सहित उनके मंत्रिमंडल के तीन सदस्य होंगे। सत्ता में आने के बाद मोइज्जू की ये पहली भारत यात्रा होगी। दरअसल, पिछले साल "इंडिया आउट" अभियान के तहत उनके चुनाव के बाद से माले और नई दिल्ली के बीच संबंधों में खटास आई थी। इसके बावजूद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल किया गया है।
दरअसल, मुइज्जू ने मालदीव को चीन के करीब ले जाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि भारत को 85 से अधिक सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने के लिए मजबूर करना, जो हिंद महासागर द्वीपसमूह में दो हेलीकॉप्टर और एक विमान को संचालित करने के लिए तैनात थे, जिनका उपयोग मुख्य रूप से चिकित्सा निकासी और मानवीय सहायता के लिए किया जाता था।












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