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श्रीलंका की अर्थव्यवस्था ढही, भारत भी कुछ नहीं कर सकता, अब बस यहां से उम्मीदः रानिल विक्रमसिंघे

जूनः श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार को संसद में कहा कि महीनों तक भोजन, बिजली और ईंधन की कमी के बाद देश की अर्थव्यवस्था ढह गई है और देश तेल आयात करने की हालत में नहीं है।

कोलंबो, 22 जूनः श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार को संसद में कहा कि महीनों तक भोजन, बिजली और ईंधन की कमी के बाद देश की अर्थव्यवस्था ढह गई है और देश तेल आयात करने की हालत में नहीं है। भारत द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता धर्मार्थ दान नहीं है, हमें इन ऋणों को चुकाने की योजना बनानी होगी। विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका की एकमात्र उम्मीद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से है।

अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरायी

अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरायी

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब हम ईंधन, गैस, बिजली और भोजन की कमी से कहीं अधिक गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है। आज हमारे सामने यह सबसे गंभीर मुद्दा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उच्च पदस्थ अधिकारियों का एक दल स्थानीय आर्थिक स्थितियों का आकलन करने के लिए गुरुवार को कोलंबो पहुंचने वाला है।

कोई भी देश नहीं दे रहा ईंधन

कोई भी देश नहीं दे रहा ईंधन

फिलहाल वित्त मामलों का भी काम देख रहे प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन पर 700 मिलियन डॉलर का कर्ज है। नतीजतन दुनिया का कोई भी देश या संगठन हमें ईंधन उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर शुरुआत में अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए बेहतर कदम उठाए गए होते तो हम आज ऐसी स्थिति में नहीं होते।

भारत की भी मदद की एक सीमा है

भारत की भी मदद की एक सीमा है

विक्रमसिंघे ने संसद में कहा, ''हमने भारतीय ऋण सहायता के तहत चार अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया है। हमने अपने भारतीय समकक्षों से अधिक ऋण सहायता का अनुरोध किया है, लेकिन हमारा पड़ोसी देश भारत भी इस तरह लगातार हमारा साथ नहीं दे पाएगा। यहां तक कि उनकी मदद की भी अपनी सीमाएं हैं। दूसरी ओर, हमारे पास भी इन ऋणों को चुकाने की योजना होनी चाहिए। ये धर्मार्थ दान नहीं हैं।''

 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से एकमात्र उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से एकमात्र उम्मीद

संसद में रानिल विक्रमसिंघे ने आर्थिक संकट का मुकाबला करने के लिए सरकार द्वारा अब तक किए गए उपायों के बारे में संसद को बताया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका की एकमात्र उम्मीद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से है। बतादें कि श्रीलंका 1948 में अपनी आजादी के बाद से सबसे भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसके चलते वहां भोजन, दवा, रसोई गैस और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है।

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