चीन जाएंगे PM नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर BRICS मिलकर देगा मुंहतोड़ जवाब
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। इस आदेश ने वैश्विक आर्थिक रिश्तों में हलचल मचा दी है। जवाबी रणनीति के तौर पर भारत अब अकेले नहीं, बल्कि ब्रिक्स जैसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय मंच के जरिए संयुक्त कदम उठाने की तैयारी में है।
इसी कूटनीतिक पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सात साल बाद चीन जा रहे हैं, जहां वो शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा अमेरिका को एक ठोस संदेश देने का मंच भी बन सकता है।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा भारत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह 'राष्ट्रीय हितों की रक्षा' के लिए जरूरी कदम उठाएगी। ऐसे में ब्रिक्स मंच अब सामूहिक रणनीति के लिए अहम बनता जा रहा है।

सात साल बाद चीन जाएंगे मोदी, SCO समिट में लेंगे हिस्सा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त के अंत में चीन के तिआनजिन (Tianjin) में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह उनकी सात साल बाद चीन यात्रा होगी और माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम होगा।
शी जिनपिंग से हो सकती है द्विपक्षीय मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, मोदी की इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना है। इस बैठक में एलएसी पर तनाव घटाने, सीधे फ्लाइट्स बहाल करने, बॉर्डर ट्रेड खोलने और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
ब्रह्मपुत्र डैम को लेकर भारत की चिंताएं बरकरार
हालांकि रिश्तों में नरमी के संकेत हैं, लेकिन भारत की चिंता अभी भी चीन की कई गतिविधियों को लेकर बनी हुई है। जैसे ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर डैम बनाना और मई में भारत-पाक टकराव के दौरान चीन का पाकिस्तान को समर्थन देना।
जापान दौरे पर संशय, लेकिन एजेंडा तय
मोदी के चीन दौरे से पहले जापान जाना तय है, लेकिन वहां के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा पर पार्टी के अंदर से इस्तीफे का दबाव है। फिर भी अगर मुलाकात होती है तो उसमें भारत में जापानी निवेश, इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा और व्यापार सहयोग पर चर्चा होगी।
ट्रंप को ब्रिक्स से मिल सकता है जवाब
ट्रंप के टैरिफ के जवाब में भारत अकेले नहीं बल्कि ब्रिक्स (BRICS) मंच के ज़रिए सामूहिक रुख अपना सकता है। ब्रिक्स के सदस्य देश-ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका-आर्थिक दबाव का संयुक्त जवाब देने पर विचार कर सकते हैं।
ब्रिक्स के सदस्य देश करने लगे ट्रंप का विरोध
इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ लगाए जाने के बाद उन्हें फोन करने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, लूला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित ब्रिक्स सहयोगियों से संपर्क किया। लूला ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि, 'मैं ट्रंप को फोन नहीं करूंगा। वह बात नहीं करना चाहते।'
यह बात ट्रंप के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि लूला टैरिफ और दोनों देशों के बीच अन्य मतभेदों पर चर्चा के लिए कभी भी उनसे फोन कर सकते हैं। शनिवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने लूला के बारे में कहा कि, 'वह जब चाहें मुझसे बात कर सकते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ब्राजील के लोगों से लगाव है, लेकिन 'ब्राज़ील को चलाने वाले लोगों ने गलत काम किया है।'
ट्रंप ने ब्राजील पर भी लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ
ट्रम्प ने ब्राजील पर कई छूटों के साथ अगले हफ़्ते से 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा दिया है। यह टैरिफ़ पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के खिलाफ 'विच हंट' के नाम से चल रहे अभियान से निपटने के लिए लगाया गया है। बोल्सोनारो पर 2022 में चुनाव हारने के बाद तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चल रहा है।
ब्राजील अमेरिका पर पहले जितना निर्भर नहीं
उन्होंने कहा, 'आज ब्राज़ील अमेरिका पर उतना निर्भर नहीं है जितना पहले था।' 'मैं अमेरिका के साथ हमारे राजनयिक संबंधों के महत्व को नजरअंदाज नहीं करूंगा। लेकिन अब से, उन्हें यह जानना होगा कि हमारे पास बातचीत करने के लिए कुछ मुद्दे हैं। हमारे पास बातचीत के लिए आर्थिक और राजनीतिक हित हैं।'
ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक
दरअसल, ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है, जो उन उत्पादों में शामिल नहीं था जिन्हें उच्च अमेरिकी शुल्कों से छूट मिली थी। ब्राजील के कॉफ़ी शिपमेंट में अमेरिका का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा है।













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