'सूरज के साथ चलना होगा...' दुनिया को 'पांच मंत्र' देकर पीएम मोदी स्वदेश पहुंचे, जानिए बड़ी बातें

जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए सीओपी-26 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने दुनिया के सामने पांच सूत्रीय एजेंडा रखा है और भारत के लिए अगले 50 सालों का लक्ष्य भी रखा है।

रोम/ग्लासको, नवंबर 03: पीएम मोदी का पांच दिवसीय रोम और ग्लासको का दौरा खत्म हो गया है और इसके साथ ही भारत ने अपने 'मंत्र' से दुनिया को नई मुश्किलों से लड़ने और आगे बढ़ने की सलाह दी है। अपने पांच दिवसीय दौरे के दौरान पीएम मोदी ने जी-20 सम्मेलन और सीओपी-26 सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा कई राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी की और अब पीएम मोदी भारत लौट आए हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान दुनिया से अपील करते हुए कहा, कि अगर हमें पृथ्वी को बचानी है, तो हमें किसी भी हाल में सूरज के साथ ही चलना होगा।

दुनिया को पीएम मोदी का मंत्र

दुनिया को पीएम मोदी का मंत्र

जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए सीओपी-26 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने दुनिया के सामने पांच सूत्रीय एजेंडा रखा है और भारत के लिए अगले 50 सालों का लक्ष्य भी रखा है। पीएम नोदी ने सीओपी-26 सम्मेलन में कहा कि, भारत 2070 तक कोयला का इस्तेमाल करना पूरी तरह से बंद कर देगा। इसके साथ ही वैश्विक जलवायु परिवर्तन को कैसे रोका जाए, पीएम मोदी ने इसके लिए भी दुनिया के सामने कई विकल्प रखे हैं। पीएम मोदी ने कहा है कि, विश्व के सभी देशों को एकसाथ आकर वैश्विक स्तर पर मीथेन गैस का इस्तेमाल 2030 तक कम से कम 30 प्रतिशत जरूर कम करना होगा। पीएम मोदी ने घर वापसी के वक्त एक ट्वीट भी किया है, जिसमें पीएम मोदी ने कहा कि, "हमारे ग्रह के भविष्य के बारे में दो दिनों की गहन चर्चा के बाद ग्लासगो से प्रस्थान। भारत ने न केवल पेरिस प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया है, बल्कि अब अगले 50 वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा भी निर्धारित किया है।"

पुराने दोस्तों से मिलकर खुशी

पुराने दोस्तों से मिलकर खुशी

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, "लंबे समय के बाद कई पुराने दोस्तों को व्यक्तिगत रूप से देखना और कुछ नए लोगों से मिलना अद्भुत था। मैं अपने मेजबान पीएम @BorisJohnson और स्कॉटिश लोगों के लिए भी खूबसूरत ग्लासगो में उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए आभारी हूं।" आपको बता दें कि, ग्लासको में भारतीय समुदाय के कई सदस्य पीएम मोदी से मिलने के लिए पहुंचे थे, जो अलग अलग रंगीन भारतीय पोशाक में थे। भारत के लिए प्रस्थान करने से पहले मोदी ने भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ ड्रम भी बजाया।

कई द्विपक्षीय बैठकों का आयोजन

कई द्विपक्षीय बैठकों का आयोजन

पीएम मोदी ने सीओपी-26 के मौके पर कई द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन से निपटने में दुनिया के नेताओं और विशेषज्ञों की अब तक की सबसे बड़ी सभाओं में से एक माना जाता है। वह रोम से ग्लासको पहुंचे थे, जहां उन्होंने 30-31 अक्टूबर तक इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के निमंत्रण पर 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इटली पिछले साल दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। आपको बता दें कि, जी-20 एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक मंच है जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है। इसके सदस्य वैश्विक जीडीपी का 80 प्रतिशत से ज्यादा, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत और ग्रह की आबादी का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं। आपको बता दें कि, भारत भी 2023 में पहली बार जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है और उस वक्त दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत के दौरे पर आएंगे। आपको बता दें कि, यह आठवां जी -20 शिखर सम्मेलन था जिसमें मोदी ने भाग लिया था।

एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड

एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ग्लासगो में सीओपी-26 वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन में कहा कि सौर ऊर्जा उस पर्यावरणीय संतुलन को फिर से स्थापित करने में मदद कर सकती है जिसे मानव जाति ने औद्योगिक क्रांति के दौरान परेशान किया था। स्वच्छ प्रौद्योगिकी नवाचार और परिनियोजन में तेजी लाने वाले सत्र में बोलते हुए, पीएम मोदी ने "एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड" का आह्वान करते हुए वैश्विक सौर ऊर्जा ग्रिड की वकालत की। प्रधान मंत्री ने यह भी घोषणा की कि इसरो दुनिया को एक सौर कैलकुलेटर एप्लिकेशन देने के लिए तैयार है जो किसी भी स्थान की सौर ऊर्जा क्षमता का पता लगाने के लिए सैटेलाइट डेटा का उपयोग करेगा। उन्होंने कहा कि यह कैलकुलेटर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए स्थान तय करने में मदद करेगा।

'सूरज के साथ चलना होगा...'

'सूरज के साथ चलना होगा...'

पीएम मोदी ने ग्लासको में प्रकृति के प्रति सावधान रहने को लेकर भारतीय धर्मग्रंथों का भी हवाला दिया। पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि, ''औद्योगिक क्रांति के पीछे जीवाश्म ईंधन का योगदान और पृथ्वी को भारी नुकसान पहुंचाते हुए कई देशों ने खुद को विकसित बना लिया। जीवाश्म ईंधन की रेस में भू-राजनीतिक तनाव पैदा हुए, लेकिन टेक्नोलॉजी ने अब हमें अद्भुत विकल्प दिए हैं''। पीएम मोदी ने कहा कि, ''भारतीय धर्मग्रंथों ने सैकड़ों साल पहले कहा था, कि सूर्य ने पृथ्वी ग्रह पर हर चीज को जीवन दिया है और यह ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है।'' पीएम मोदी ने कहा कि, "सूर्योदय और सूर्यास्त ने हमारे जीवन को निर्धारित किया है। जब तक यह प्राकृतिक संबंध था, हमारा ग्रह स्वस्थ था। लेकिन तकनीकी युग में, मानव जाति ने, सूर्य से आगे दौड़ने के प्रयास में, प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ दिया और पर्यावरण का बहुत नुकसान कर दिया''। पीएम मोदी ने आगे कहा कि, "अगर हम उस संतुलन को फिर से स्थापित करना चाहते हैं, तो सौर ऊर्जा ही रास्ता है। हमें एक बार फिर से सूरज के साथ चलना होगा।"

सौर ऊर्जा के महत्व को बताया

सौर ऊर्जा के महत्व को बताया

प्रधानमंत्री मोदी ने सीओपी-26 सम्मेलन में दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि, "एक पूरे वर्ष में मानव जाति जितनी ऊर्जा की खपत करती है, उतनी ही ऊर्जा सूरज से हमें एक घंटे में मिल जाती है और यह ऊर्जा स्वच्छ और टिकाऊ है।" उन्होंने आगे कहा, "एकमात्र चुनौती यह है कि सौर ऊर्जा केवल दिन के समय उपलब्ध है और जलवायु परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड इस समस्या का समाधान है। एक विश्वव्यापी सौर ऊर्जा ग्रिड इस बात को सुनिश्चित कर सकता है, कि हर जगह, हर समय ऊर्जा मिलती रहे।" पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह भी कहा कि, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से भंडारण की आवश्यकता कम हो सकती है, सौर ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ सकती है और कार्बन फुटप्रिंट में सेंध लग सकती है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा ग्रिड के विकास के माध्यम से सौर गठबंधन को बढ़ावा देने से राष्ट्रों के बीच सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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