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PM Modi In Israel: क्या है Yad Vashem? जहां दोबारा जाएंगे पीएम मोदी, डरावना इतिहास और रुला देने वाली हकीकत

PM Modi In Israel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर इज़रायल यात्रा के दौरान यद वाशेम जाएंगे। यह वही जगह है जहां उन्होंने 2017 में भी श्रद्धांजलि दी थी। इस बार भी पीएम मोदी और बेन्जामिन नेतन्याहू इज़रायल के होलोकॉस्ट स्मारक का दौरा करेंगे। यद वाशेम का दौरा इज़रायल आने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की राजकीय यात्रा का एक नियमित और अहम हिस्सा माना जाता है। यद वाशेम को बनाने की वजह और इसके पीछे की कहानी बेहद भावुक और बुरी घटनाओं से भरी हुई है।

क्या है Yad Vashem (यद वाशेम)?

यद वाशेम इज़रायल के यरूशलम शहर में स्थित, होलोकॉस्ट के पीड़ितों को समर्पित आधिकारिक संग्रहालय (Museum) और स्मारक (Memorial) है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण स्मृति स्थलों में से एक है। यहां इतिहास के सबसे भयावह अध्यायों में से एक 'होलोकॉस्ट' की याद को संजोकर रखा गया है।

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क्या था होलोकॉस्ट?

इस स्मारक का इतिहास 1933 से जुड़ा है, जब जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ उत्पीड़न शुरू हुआ। Adolf Hitler के नेतृत्व में नाज़ी पार्टी ने यहूदियों और अन्य जातीय समूहों को निशाना बनाया। जिसमें यहूदियों को जबरन मजदूरी शिविरों, कंसंट्रेशन और डेथ कैंप्स में भेजा गया।

इन शिविरों में लोगों को अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया, यातनाएं दी गईं और बड़े पैमाने पर हत्याएं की गईं। इस नरसंहार में 60 लाख से अधिक यहूदी मारे गए। इसके अलावा नाज़ियों द्वारा गैर माने गए लगभग 50 लाख अन्य लोग भी इस त्रासदी का शिकार बने। कुल मिलाकर यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी।

यहूदी बाइबल से लिया नाम 'यद वाशेम'

होलोकॉस्ट की इस भयावह घटना का सीधा संबंध इज़रायल की स्थापना से भी जुड़ा है। इसी ऐतिहासिक पीड़ा और याद को जीवित रखने के लिए 1953 में यद वाशेम की स्थापना की गई। इसका नाम बाइबिल के यशायाह 56:5 (Isaiah 56:5) से लिया गया है, जिसका अर्थ है-"एक स्मारक और एक नाम।" यानी हर उस व्यक्ति को नाम और पहचान देना, जिसे इतिहास ने छीन लिया।

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होलोकॉस्ट हिस्ट्री म्यूज़ियम- दर्द को समझने की जगह

अधिकांश लोग यहां स्थित Holocaust History Museum में समय बिताते हैं। यह बेहद भावनात्मक और प्रभावशाली अनुभव होता है। कई अन्य स्मारकों से अलग, यद वाशेम सिर्फ नरसंहार की घटनाओं को नहीं दिखाता, बल्कि यह भी समझाता है कि होलोकॉस्ट से पहले पूरे यूरोप में यहूदी-विरोध (एंटी-सेमिटिज्म) कैसे फैलाया गया।
म्जूजियम में तस्वीरें, पीड़ितों के निजी पत्र, डायरी, कला कृतियां और सूचना पैनल के जरिए पूरी कहानी बताई जाती है। यह इतिहास को आंकड़ों से आगे ले जाकर इंसानी भावनाओं के साथ जोड़ता है।

'Hall of Names': सबसे भावुक हिस्सा

यद वाशेम का सबसे भावनात्मक भाग है 'Hall of Names'। यहां लाखों पीड़ितों के नाम दर्ज हैं। इस स्थान पर पहुंचकर कई लोग भावुक हो जाते हैं। फर्श में बने खाली स्थान उन लोगों का प्रतीक हैं, जिनकी पहचान कभी दर्ज नहीं हो सकी, क्योंकि उन्हें याद रखने वाले भी उसी त्रासदी में मारे गए थे। यह हिस्सा दिखाता है कि होलोकॉस्ट सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की टूटी हुई कहानियां हैं।

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इंसानियत का सम्मान

यद वाशेम केवल पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि उन गैर-यहूदियों को भी सम्मान देता है जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर यहूदियों की जान बचाई। इन्हें 'Garden of the Righteous Among the Nations' में याद किया जाता है। यह संदेश देता है कि सबसे अंधेरे समय में भी इंसानियत जिंदा रहती है।

कौन-कौन से भारतीय नेता जा चुके यद वाशेम?

पीएम मोदी अपनी इजरायल यात्रा के दौरान, एक बार फिर से यद वाशेम जाएंगे। पीएम मोदी के अलावा, पूर्व विदेश मंत्री और दिवंगत नेता सुषमा स्वराज और पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी यद वाशेम जा चुके हैं।

भारत, यहूदी और होलोकॉस्ट के बीच की कड़ी

होलोकॉस्ट और भारत के बीच एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण संबंध भी है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सैकड़ों यहूदी शरणार्थियों को भारत में शरण मिली थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के साथ मिलकर यूरोप में उन एकाग्रता शिविरों को मुक्त कराने में भूमिका निभाई थी, जहां हजारों यहूदियों को बंदी बनाकर रखा गया था। यही वजह है कि पीएम मोदी का यद वाशेम जाना सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ी एक संवेदनशील कड़ी भी है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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