16 माह के रोहिंग्या मोहम्मद ने दिलाई दुनिया को सीरिया के अयलान कुर्दी की याद
सीरिया के शरणार्थी अयलान कुर्दी की ही तरह बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर रोहिंग्या बच्चे 16 माह के मोहम्मद की तस्वीर ने फिर मचाई सनसनी। टर्की के समुद्री किनारे पर मिली थी कुर्दी की लाश।
ढाका। सितंबर 2015 में टर्की के समुद्री किनारे पर तीन वर्ष के अयलान कुर्दी की लाश मिली तो सबकी आंखें नम हो गई थीं। अब फिर से एक और अयलान कुर्दी की लाश मिली है लेकिन इस बार यह कुर्दी है 16 माह का रोहिंग्या मुसलमान बच्चा मोहम्मद शोहायेत। मोहम्मद की लाश बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर मिली है और उसकी तस्वीर ने एक बार फिर से दुनिया को कुर्दी की याद दिला दी है।

हेलीकॉप्टर से बरसती हैं गोलियां
इन दिनों म्यांमार में बसे रोहिंग्या मुसलमानों पर आफत आई हुई है और इसी आफत से बचने के लिए मोहम्मद के माता-पिता अपना घर छोड़कर बांग्लादेश जा रहे थे। बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर बहने वाली नाफ नदी के सहारे वह बांग्लादेश पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इसी कोशिश में मोहम्मद की मौत हो गई। मोहम्मद के पिता जफोर आलम ने सीएनएन से कहा, 'जब मैं यह तस्वीर देखता हूं मुझे लगता है कि मैं भी मर जाऊं।' उन्होंने बताया कि अब दुनिया में रहने के लिए उनके पास कोई वजह नहीं बची है। म्यांमार में बसे हजारों रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश चले गए और करीब दर्जन भर की मौत हो चुकी है। म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों को देश का अल्पसंख्यक समुदाय मानने से इंकार कर देता है। वह इन मुसलमानों को या तो बंगाली कहता है या फिर बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासी बताता है। हालांकि ये रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश में पिछली कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। कुर्दी की मौत उस समय हो गई थी जब उसके माता-पिता सीरिया से टर्की आ रहे थे और वह मैडीटेरियन सी को पार कर रहे थे। उसी समय नाव पलट जाने की वजह से अयलान डूब गया था। मोहम्मद के पिता ने बताया कि उनके गांव में हेलीकॉप्टर से उन पर गोलियां बरसाई गईं और म्यामांर के सैनिकों ने भी उन पर फायरिंग की। उन्हें अपना घर छोड़कर जंगल में छिपने को मजबूर होना पड़ा। उनके दादा और दादी की इन सबमें मौत हो गई और सेना ने उनके पूरे गांव को आग लगा दी।
कौन हैं रोहिंग्या
- रोहिंग्या म्यांमार में मुसलमानों का वह समुदाय है जिसे कोई दर्जा नहीं मिला है।
- म्यांमार के राखिने में करीब एक मिलियन रोहिंग्या रहते हैं।
- म्यांमार इन्हें अपने देश में मौजूद 135 पारंपरिक समुदायों में शामिल नहीं करता है।
- म्यांमार इन्हें ईस्ट बंगाल जिसे अब बांग्लादेश कहते हैं, वहां का मानता है।
- वहीं सिर्फ म्यांमार में ही रोहिंग्या रहते हैं ऐसा लोग मानते हैं, लेकिन म्यांमार में इन्हें घुसपैठिया माना जाता है।
- मानवाधिकार संगठनों केम मुताबिक रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कानूनों में भेदभाव होता है।
- इन्हें कहीं भी आने-जाने, शिक्षा और रोजगार की आजादी नहीं है।
- इन्हें जमीन और संपत्ति के अधिकार से भी वंचित रखा जाता है।
- जिस जगह पर ये रहते हैं वह एक तय हुए समय के अंदर इनसे छीन ली जाती है।












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