चीन के दुश्मन से दोस्ती: दक्षिण चीन सागर में 3 युद्धपोत लेकर पहुंचा भारत, पड़ोसी खरीदेगा भारतीय हेलीकॉप्टर?
India-Philippines News: जिस तरह से चीन ने हिंद महासागर में मालदीव और कई बार श्रीलंका को भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया है और इन दोनों देशों को अपना रणनीतिक केन्द्र बनाने की कोशिश की है, कुछ वही कदम भारत ने भी चीन के खिलाफ उठाए हैं और चीन के दुश्मन के साथ दोस्ती मजबूत कर ली है।
जिस तरह से चीन, हिंद महासागर में अपने युद्धपोत भेजता रहता है, ठीक उसी अंदाज में जवाब देते हुए भारत ने उस दक्षिण चीन सागर में अपने तीन युद्धपोत भेज दिए हैं, जिसपर चीन अपना दावा करता है।

भारतीय नौसेना ने मनीला में तीन युद्धपोतों की डॉकिंग कर दक्षिण चीन सागर में चीन को जोरदार और साफ शब्दों में संदेश भेजा है। लेकिन, सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है, कि फिलीपींस ने भारतीय हथियारों में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। फिलीपींस पहले ही भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीद चुका है और अब वो भारत से हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदना चाहता है।
दक्षिण चीन सागर में भारत के तीन युद्धपोत
भारतीय नौसेना ने अपने तीन युद्धपोत, आईएनएस दिल्ली, आईएनएस शक्ति और आईएनएस किल्टन को मई 2024 से मनीला में डॉक किया है। ये तीनों युद्धपोत अपनी ऑपरेशनल तैनाती को लेकर दक्षिण पूर्व एशियाई देश में हैं।
जिसके बाद फिलीपींस नौसेना, तट रक्षक और रक्षा विभाग के अधिकारियों की एक टुकड़ी आईएनएस शक्ति पर पहुंची और घरेलू हेलीकॉप्टर एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर का ऑपरेशन करने वाले चालक दल के सदस्यों के साथ बातचीत की है।
गाइडेड मिसाइल विध्वंसक INS दिल्ली, फ्लीट टैंकर INS शक्ति, और एंटी-सबमरीन वार कार्वेट आईएनएस किल्टान दक्षिण चीन सागर के विस्तारित दौरे पर हैं। पूर्वी नौसेना कमान के प्रमुख रियर एडमिरल राजेश धनखड़ इस कमान का संचालन कर रहे हैं, और उन्हीं के कमान के तहत, युद्धपोतों ने मनीला में डॉकिंग से पहले सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम का दौरा किया था।
हेलीकॉप्टर भेजने का भारत का प्लान क्या है?
भारत की कोशिश ये है, कि अगर उसे हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाने का ऑर्डर मिलता है, तो वो समय पर इसकी डिलीवरी कर सके, इसके लिए HAL अपनी हेलीकॉप्टर प्रोडक्शन की क्षमता 30 से बढ़ाकर 90 हेलीकॉप्टर प्रति वर्ष करने की कोशिश कर रहा है।
इसी साल भारतीय विमान निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर सीबी अनंतकृष्णन ने उम्मीद जताई थी, कि कंपनी को निर्यात ऑर्डर के मामले में देर-सबेर "सफलता" मिलेगी।
हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर का निर्माण HAL के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही है और अभी तक HAL भारतीय सेना को 300 से ज्यादा ऐसे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी दे चुका है। वहीं, अब HAL, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर का एडवांस वेरिएं ALH MK4 का भी निर्माण कर चुका है, जिसको लेकर भी कई देशों की गहरी दिलचस्पी है।
ALH Mk III हेलीकॉप्टर कैसा है?
वहीं, जब पिछले से फिलीपींस कोस्ट गार्ड के चीफ ने भारत का दौरा किया था, तो HAL ने ALH MK3 का फ्लाइट टेस्ट उन्हें दिखाया था, जिससे वो काफी प्रभावित हुए थे। ALH Mk III स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर का एक प्रकार है। इसे भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया है। यह 5.5-टन श्रेणी का एक मल्टी रोल, मल्टी-मिशन और बहुमुखी हेलीकॉप्टर है।
ALH Mk III सबसे आधुनिक सर्विलांस रडार से सुसज्जित है, जो 120 समुद्री मील की सीमा तक जहाजों और नौकाओं का पता लगा सकता है और उनकी पहचान कर सकता है। यह तटरक्षक बल को भारतीय तटीय क्षेत्रों पर निगरानी रखने में सक्षम बनाता है।
इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर इसे 30 समुद्री मील तक की दूरी पर भी सबसे छोटे जहाजों की निगरानी करने में सक्षम बनाता है। ये हेलीकॉप्टर समुद्री टोही के अलावा लंबी दूरी तक खोज और बचाव कार्य भी कर सकते हैं। एएलएच एमके III में कांस्टेबुलरी मिशनों को अंजाम देने के लिए एक भारी मशीन गन भी लगाई गई है।
पिछले साल फिलीपींस तट रक्षक ने अपने भारतीय समकक्ष के साथ अपना पहला समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था, जिससे एक उम्मीद बनी है, कि भारत और फिलीपींस के बीच हेलीकॉप्टर सौदा हो सकता है।
दक्षिण चीन सागर में चीन को करारा जवाब
भारतीय हेलीकॉप्टरों और सरफेस जहाजों में फिलीपींस तट रक्षक की दिलचस्पी, दक्षिण चीन सागर में स्प्रैटली द्वीप समूह में विवादित दूसरे थॉमस शोल पर चीन के साथ उसके लगातार टकराव की वजह से है।
रियर एडमिरल धनखड़ ने कहा, कि "भारत और फिलीपींस साझा हित साझा करते हैं, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में। दोनों नौसेनाओं के बीच दोस्ती के मजबूत बंधन हैं और दोनों ने हर उपलब्ध मौके पर समुद्री साझेदारी अभ्यास में भाग लेने का प्रयास किया है।
दक्षिण चीन सागर में स्प्रैटली द्वीप समूह पर दशकों से फंसे अपने जहाज सेकंड थॉमस शोल पर फिलीपींस जब सैन्यकर्मियों के लिए भोजन, पानी और ईंधन भेजने की कोशिश करता है, तो चीन उसे रोकने के लिए पानी की बौछारे करता है या फिर क्षेत्र की नाकेबंदी करने की कोशिश करता है। लिहाजा, भारतीय हेलीकॉप्टर चीन के लिए गहरी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
आपको बता दें, कि सेकंड थॉमस शोल, पलावन के फिलीपीन द्वीप समूह से लगभग 200 किमी दूर है और चीन के नजदीकी प्रमुख भूभाग हैनान द्वीप से करीब 1,000 किमी की दूरी पर है। लेकिन, चीन इस पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
हालांकि, चीन और फिलीपींस के बीच की शक्ति में काफी अंतर है और चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी फिलीपींस से करीब 3.5 गुना बड़ी है। 2012 से 2022 तक, फिलीपींस ने रक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का औसतन केवल 1.15 प्रतिशत खर्च किया, जबकि चीन का खर्च अनुमान 1.70 प्रतिशत था।
चीन की नौसेना 59 पनडुब्बियों और 92 प्रमुख सरफेस लड़ाकू विमानों का संचालन करती है। इसकी नौसेना और तट रक्षक लगभग 700 गश्ती और तटीय लड़ाकू जहाजों का संचालन करते हैं और इसके समुद्री मिलिशिया के पास लगभग 400 जहाज होने का अनुमान है। इसकी तुलना फिलीपींस के पास सिर्फ दो फ्रिगेट और 125 गश्ती और तटीय लड़ाकू जहाज ही हैं। लिहाजा, फिलीपींस अपनी ताकत बढ़ाने की कोशश कर रहा है और इस काम में भारत अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।












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