फाइजर, मॉडर्न वैक्सीन कोरोना के जोखिम को 91 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम- यूएस सीडीसी

सीडीसी ने कहा कि फाइजर या मॉडर्न की दोनों खुलाक लेने से कोरोना का जोखिम 91 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

वाशिंगटन, 8 जून। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के एक नए अध्ययन के अनुसार, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा अधिकृत फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्न के टीकों की दो खुराक लेने से कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा 91 प्रतिशत तक कम हो सकता है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्न के एमआरएनए-आधारित टीकों की सिंगल डोज भी संक्रमण के खतरे को 81 प्रतिशत तक कम कर सकती है। इन अनुमानों में सिम्टोमेटिक और असिम्टोमेटिक संक्रमणों को शामिल किया गया। सीडीसी के निदेशक रोशेल पी वालेंस्की ने कहा कि कोरोना से लड़ने में वैक्सीन सबसे प्रभावी टूल है।

Pfizer, Moderna

उन्होंने कहा कि इस अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि एमआरएनए कोरोना वैक्सीन वायरस से लड़ने में बेहद प्रभावशाली है, दोनों वैक्सीन लगवाने के बावजूद भी अगर व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो जाता है तो उसमें बहुत की कम लक्षण दिखाई देंगे वह कम बीमार होगा और वह कम लोगों को संक्रमित करेगा। वैक्सीन लगवाने के ये अन्य फायदे हैं। अध्ययन से यह भी पता चला है कि एमआरएनए वैक्सीन उन लोगों को लाभ देता है जिन्हें वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद भी कोरोना फिर से हो गया है। अध्ययन में सामने आया कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद जो लोग दोबारा संक्रमित हुए वह 6 दिन कम बीमार रहे और दो दिन कम बेड पर रहे। ऐसे लोगों में वैक्सीन न लगवाने वालों की अपेक्षा बुखार और ठंड लगने के 60% लक्षण कम दिखे। अध्ययन में भाग लेने वाले जो प्रतिभागी SARS-CoV-2 से संक्रमित हुए थे उनमें दोबारा लक्षण विकसित नहीं हुए।

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जिन लोगों ने एक या दोनों वैक्सीन लगवाई थीं उनकी नाक से वायरस का पता लगने का प्रतिशत 40% कम था जो यह दर्शाता है कि उनमें कोरोना के लक्षण कम थे। ऐसे लोगों में वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों की तुलना में कम दिनों तक वायरस रहा। इसका मतलब है कि उन्होंने कम वायरस फैलाया। इसके अलावा जिन लोगों ने कोरोना की एक या दोनों डोज ली थी उनमें 1 सप्ताह से अधिक समय तक SARS-CoV-2 के लिए सकारात्मक परीक्षण करने की संभावना 66 प्रतिशत कम थी।

सीडीसी ने कहा हालांकि से संकेत किसी व्यक्ति के वायरस फैलाने की क्षमता का प्रत्यक्ष माप नहीं है लेकिन ये संकेत अन्य वायरस जैसे वैरिकाला और इन्फ्लूएंजा के कम प्रसार के साथ सहसंबद्ध हैं। अध्ययन के लिए, 3,975 प्रतिभागियों ने आठ अमेरिकी स्थानों में लगातार 17 हफ्तों (13 दिसंबर, 2020 से 10 अप्रैल, 2021 तक) के लिए साप्ताहिक SARS-CoV-2 परीक्षण पूरा किया। प्रतिभागियों ने SARS-CoV-2 के परीक्षण के लिए खुद ही नेजल स्वाब एकत्रित किया। यदि टेस्ट दोबारा पॉजिटिव आया तो वायरस की मात्रा और उसके प्रभाव को निर्धारित करने के लिए दोबारा परीक्षण किया गया।

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