सावधान! दोनों डोज लगवा चुके लोग भी घर में फैला सकते हैं कोविड-19, Lancet study में और क्या है जानिए

लंदन, 29 अक्टूबर: देश में कोरोना के मामलों में ज्यादातर जगहों पर भले ही कमी आई हो, लेकिन लोगों को सरकार बार-बार सतर्क रहने की सलाह बेवजह नहीं दे रही है। क्योंकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि अगर अब संक्रमण की वजह से स्थिति बिगड़ती है तो इसकी वजह हमारी लापरवाही ही होगी। लैंसेट की एक स्टडी आई है, जिसमें यह बताया गया है कि सर्दियों के महीनों में घर कोविड संक्रमण फैलने का बहुत बड़ा ठिकाना साबित हो सकता है और दोनों डोज लगवा चुके लोग भी यह संक्रमण फैला सकते हैं और खुद भी संक्रमित हो सकते है। करीब एक साल की स्डडी के आधार पर यह शोध प्रकाशित की गई है और साफ किया गया है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अभी ढीली नहीं पड़ने दी जा सकती है।

पूर्व वैक्सिनेटेड लोग भी फैला सकते हैं कोरोना-स्टडी

पूर्व वैक्सिनेटेड लोग भी फैला सकते हैं कोरोना-स्टडी

कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके लोग भी घरों के अंदर डेल्टा वेरिएंट फैला सकते हैं या इससे संक्रमित भी हो सकते हैं। लैंसेट इनफेक्शियस डिजीज जर्नल में छपी एक स्टडी में यह बात बताई गई है। हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि वैक्सीन की पूरी डोज लेने वालों में इसकी संभावना, आधे-अधूरे या डोज नहीं लगवाने वालों के मुकाबले कम है। हालांकि इंग्लैंड में लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन लोगों को पूरी खुराक लगी होती है, उन्हें संक्रमण से जल्दी छुटकारा मिल जाता है। लेकिन, गहन संक्रमण के दौरान उनमें भी वायरल लोड वैसा ही होता है, जैसे टीके नहीं लगाने वालों में होता है। इससे यह बात जाहिर हो जाती है कि वह भी घर के अंदर कैसे आसानी से दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।

टीके बहुत ही प्रभावी हैं, लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं- स्टडी

टीके बहुत ही प्रभावी हैं, लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं- स्टडी

शोधकर्ताओं ने बताया है कि कोरोना का ज्यादार संक्रमण घरों में ही एक से दूसरे में फैलना पाया गया है, लेकिन डेल्टा वेरिएंट के बारे में ऐसे वैक्सिनेटड लोगों से जो एसिम्पोटोमेटिक हैं या जिन्हें हल्का इंफेक्शन है, उनको लेकर जोखिम का सीमित डेटा ही उपलब्ध है। इस स्टडी में शामिल लंदन इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर अजित ललवाणी ने कहा है, 'महामारी को नियंत्रित करने के लिए वैक्सीन महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमें पता है कि कोविड-19 की गंभीर बीमारी और मौत को रोकने में यह बहुत ही प्रभावी हैं।' लेकिन उन्होंने यह भी कहा, 'हालांकि, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि लोगों को डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित होने और इसे घरेलू माहौल में फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण अकेले पर्याप्त नहीं है।'

वैक्सीन नहीं लेने वाले जल्द टीके लगवाएं- स्टडी

वैक्सीन नहीं लेने वाले जल्द टीके लगवाएं- स्टडी

शोधकर्ताओं ने बताया है कि वैक्सिनेटड लोगों के बीच संक्रमण की बात साबित होने के बाद यह जरूरी हो जाता है कि जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है, वह इसे लगवाएं ताकि इंफेक्शन और गंभीर कोविड की चपेट में आने से खुद को बचा सकें। खासकर सर्दी के महीनों के दौरान लोगों का ज्यादातर वक्त तो बंद स्थानों के अंदर ही गुजरने वाला है। यूके कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम से सितंबर, 2020 और सितंबर,2021 यानी एक साल के दौरान 624 भागीदारों पर यह रिसर्च किया गया है। सभी भागीदारों को हल्का कोविड था या वे एसिम्पटोमेटिक थे। संक्रमण का पता लगाने के लिए इनका रोजाना पीसीआर टेस्ट करवाया गया, चाहे उनमें लक्षण रहे हों या नहीं। डेल्टा वेरिएंट के 205 घरों के कॉन्टैक्ट की पहचान की गई थी, जिनमें से 53 कोविड पॉजिटिव पाए गए थे।

वैक्सीनेटेड लोगों में वायरल लोड तेजी से कम हुआ- स्टडी

वैक्सीनेटेड लोगों में वायरल लोड तेजी से कम हुआ- स्टडी

स्टडी में यह भी पाया गया है कि डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित वैक्सिनेटड लोगों में वायरल लोड तेजी से कम हुआ, उनकी तुलना में जो अनवैक्सिनेटेड थे और डेल्टा, अल्फा या प्री-अल्फा वेरिएंट से संक्रमित थे। स्टडी की एक और को-लीड ऑथर अनिका सिंगनायगम ने कहा है, 'हमने पाया कि टीका लगाने वाले लोग संक्रमित हो सकते हैं और घरों के भीतर संक्रमण फैला भी सकते हैं, जिसमें टीका लगा लेने वाले घर के सदस्य भी शामिल हैं।'

कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहना जरूरी- स्टडी

कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहना जरूरी- स्टडी

इसलिए शोध में लोगों को सलाह दी गई है कि वह संक्रमण रोकने के उपायों को अपनाते रहें, जैसे कि मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और टेस्टिंग पर ध्यान देना। यह पूरी तरह से वैक्सिनेटेड लोगों को लिए भी उतना ही आवश्यक है। मतलब, कोरोना के केस भले ही कम होने लगे हों, लेकिन इस स्तर पर जरा भी ढिलाई बहुत भारी पड़ सकती है।

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