इंडोनेशिया में पाम ऑयल पर हाहाकार और इसके सबसे बड़े आयातक भारत पर असर, 5 प्वाइंट में समझिए

नई दिल्ली, 8 अप्रैल: पाम ऑयल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक इंडोनेशिया अपने ही देश में इसबार इसकी बहुत बड़ी किल्लत झेल रहा है। माना जा रहा है कि यह संकट मानव निर्मित ज्यादा है, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध का बहुत बड़ा रोल है। खैर, इंडोनेशिया ने अपने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए इसपर कई तरह के कदम उठाए हैं, जिसमें निर्यात को नियंत्रित करने लेकर भी तरह-तरह के उपाय अपनाए गए हैं। आइए जानते हैं कि इंडोनेशिया में शुरू हुए इस पाम ऑयल संकट का भारत पर क्या असर पड़ रहा है।

इंडोनेशिया में पाम ऑयल पर हाहाकार

इंडोनेशिया में पाम ऑयल पर हाहाकार

सुनने में बहुत ज्यादा अजीब लगता है लेकिन पाम ऑयल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक इंडोनेशिया अभी अपने ही यहां इसकी बहुत ज्यादा किल्लत झेल रहा है। आलम ये है कि वहां की सरकार ने ना सिर्फ इसकी कीमतें नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए, बल्कि निर्यात को भी कंट्रोल किया है। अमेरिका के कृषि विभाग के अनुमानों के अनुसार 2021-22 में (अक्टूबर-सितंबर) तक वहां 4.55 करोड़ टन पाम-ऑयल का उत्पादन हुआ। यह इसके वैश्विक उत्पादन का लगभग 60% था। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक मलेशिया था, लेकिन वहां सिर्फ 1.87 करोड़ टन का उत्पादन हुआ। इंडोनेशिया 2.9 करोड़ टन निर्यात के साथ इसका सबसे बड़ा निर्यातक भी है और उसके बाद 1.622 करोड़ टन के साथ मलेशिया का स्थान है।

संकट रोकने के लिए सरकार ने दिया दखल

संकट रोकने के लिए सरकार ने दिया दखल

इंडोनेशिया में पाम ऑयल संकट का आलम ये है कि पिछले साल मार्च से लेकर इस साल मार्च के बीच में ही वहां ब्रांडेड कुकिंग ऑयल की कीमत प्रति लीटर करीब 14,000 इंडोनेशियाई रुपिया से बढ़कर 22,000 इंडोनेशियाई रुपिया प्रति लीटर हो गई। संकट को महसूस करते हुए इंडोनेशिया की सरकार ने 1 फरवरी को ही इसकी खुदरा कीमतों पर सीलिंग लगा दिया था। प्रीमियम ऑयल के लिए 14,000 इंडोनेशियाई रुपिया और सामान्य के लिए 13,500 रुपिया भी निर्धारित कर दिया। सरकार की इस सख्ती का नतीजा ये हुआ कि वहां पाम ऑयल बाजार से ही गायब हो गया। जमाखोरी की खबरों के बीच इसकी खरीदारी के लिए लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। (14,000 इंडोनेशियाई रुपिया, 74 रुपये से भी कम है)

जमाखोरों के आगे झुकी यूं झुकी इंडोनेशियाई सरकार

जमाखोरों के आगे झुकी यूं झुकी इंडोनेशियाई सरकार

सरकार को इस संकट को दूर करने के लिए खुदरा में एक व्यक्ति को 2 लीटर ही बेचने की राशनिंग भी करनी पड़ी। घरेलू किल्लत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि वहां की सरकार ने इसके निर्यातकों के लिए भी पहले यह तय किया कि उन्हें जितना माल बाहर भेजना था, उसका 20% घरेलू बाजार में ही बेजेंगे, जिसे 10 मार्च से बढ़ाकर 30% कर दिया गया। इसके लिए भी कीमतें निर्धारित की गई हैं। कच्चा पाम ऑयल 9,300 आईडीआर प्रति किलो और रिफाइंड पामोलीन 10,300 आईडीआर प्रति किलो। फिर क्या था, कारोबारियों ने इसको दबाना शुरू कर दिया। अब ना बाहर भेजने के लिए पाम ऑयल बचा और ना ही घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए। लाचार होकर इंडोनेशियाई सरकार ने इस साल 16-17 मार्च को घरेलू कीमतों और विदेश भेजे जाने वाले स्टॉक का 30% घर में ही बेचने जैसी पाबंदियां हटा लीं। लेकिन, इसके साथ ही निर्यात पर प्रोग्रेसिव टैक्स लगा दिया। यह तेल की क्वालिटी के हिसाब से 13,284 रुपये प्रति टन से लेकर 28,465 रुपये प्रति टन तक है।

इंडोनेशिया में कैसे शुरू हुआ पाम ऑयल संकट ?

इंडोनेशिया में कैसे शुरू हुआ पाम ऑयल संकट ?

इंडोनेशियाई सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक 2020 वहां 4.48 करोड़ टन कच्चे पाम ऑयल का उत्पादन हुआ था, जिसमें सबसे अधिक हिस्सा यानी 60% प्राइवेट कंपनियों का था। बाकी 34% किसानों और 6% सरकारी क्षेत्र की ओर से हुआ। यानी एक तरह से इसपर निजी कारोबारियों और किसानों का एकाधिकार था। एक्सपर्ट की मानें तो पाम ऑयल संकट में इन्हीं की जमाखोरी और मुनाफाखोरी का रोल है। दरअसल, रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन में जो हमला किया, उसकी तैयारी वह पिछले साल के आखिर के कई महीनों से कर रहा था। रूस और यूक्रेन दुनिया को 75% सूरजमुखी का तेल उपलब्ध करवाते हैं। इंडोनेशियाई कारोबारियों ने इसी का अनुमान लगाते हुए पहले से पाम ऑयल का संकट खड़ा करना शुरू कर दिया था। ऊपर से चीन ने भी अमेरिका से सोयाबीन का आयात कम करके पाम ऑयल की ओर देखना शुरू कर दिया। इससे पूरे विश्व में कच्चे पाम ऑयल की मांग में भी बेताहाशा वृद्धि हो गई ।

पाम ऑयल संकट का भारत पर क्या है असर ?

पाम ऑयल संकट का भारत पर क्या है असर ?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है। इसके 1.4 से 1.5 करोड़ टन सालाना खाद्य तेल आयात में पाम ऑयल का हिस्सा 80-90 लाख टन तक है। इसके बाद यह सोयाबीन 30-35 लाख टन और 25 लाख टन सूरजमुखी के तेल का आयात करता है। इंडोनेशिया भारत का सबसे बड़ा पाम-ऑयल निर्यातक रहा है। हालांकि, 2021-22 में इसमें मलेशिया आगे निकल गया था। महंगाई के आंकड़ों से पता चलता है कि खास तौर से इंडोनेशिया में आए पाम-ऑयल संकट की वजह से भारत में खाद्य तेल के दाम 20 से 25% बढ़े हैं। सरकार ने इस पर लगाम लगाने के लिए इसपर इंपोर्ट ड्यूटी कम करके इसे 19.25% से 13.75% किया है। वैकल्पिक उपायों के तहत सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल के आयात में भी इजाफा किया है। पिछले महीने के आखिर में बिजनेस डुटे की एक रिपोर्ट के मतुबाकि रूस से भी भारत ने हाल ही में 45,000 टन सूरजनुखी का तेल मंगवाया है। हालांकि, बदले हालात में इसके लिए भी 1.63 लाख रुपये प्रति टन चुकाने पड़े हैं, जो कि पहले 1.23 लाख रुपये प्रति टन थी। यानी खाद्य तेल संकट पर वैश्विक परिस्थितियों का बहुत ज्यादा असर पड़ा है। लेकिन, जिस तरह से सीमा शुल्क में कटौती जैसे फैसले और दूसरे तेलों की आवक बढ़ाई गई है, उससे लग रहा है कि सरकार की इस संकट पर नजर है। लेकिन, यह कब तक दूर होगा? कोई भी अंदाजा लगाना मुश्किल है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+