'देश की ताकतवर सेना ने मुझे प्रधानमंत्री पद के लिए चुना', पाकिस्तान के केयरटेकर PM का कबूलनामा
Pakistan News: पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधान मंत्री अनवारुल हक काकर ने संकेत दिया है, कि देश की सर्वशक्तिमान सेना की तरफ से उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के इस कबूलनामे के बाद एक बार फिर से तय हो गया है, कि पाकिस्तान की सरकारों पर सेना का कितना नियंत्रण होता है।
अनवारुल हक काकर ने एक इंटरव्यू में कबूल किया है, कि "उन्हें निर्वाचित सरकार के कार्यभार संभालने तक अंतरिम अवधि के लिए शीर्ष पद के लिए चुना गया है, और उन्हें इसके लिए खेद नहीं है।"

पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी बीबीसी को दिए गये एक इंटरव्यू में आया है।
जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया, कि क्या सेना ने उन्हें पाकिस्तान में चुनाव होने तक देश चलाने के लिए चुना है, तो उन्होंने जवाब दिया, कि "मैं क्षमाप्रार्थी नहीं हूं। मैं अन्यथा धारणा बनाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं।" उन्होंने आगे कहा, कि "मैं सिर्फ यह बताने की कोशिश कर रहा हूं, कि लोग ऐसा क्यों सोचते हैं।"
'पाक सेना शासन में बेहतर'
प्रधानमंत्री काकर ने साफ रूप से कहा, कि पाकिस्तानी सेना नागरिक सरकार की तुलना में देश पर शासन करने में बेहतर रही है।
उन्होंने कहा, कि "मेरी राय में, मुद्दा यह है, कि नागरिक संस्थानों को, जब उन्हें शासन के कारण काम करने का काम सौंपा जाता है, तो वे विफल हो जाते हैं और पिछले चार या पांच दशकों में उनकी क्षमता ख़राब हो गई है। और दूसरी तरफ, डिज़ाइन या डिफ़ॉल्ट रूप से, एक संगठन के रूप में सेना ने ताकत हासिल की है। इसलिए, जब भी शासन को लेकर कोई चुनौती आती है, तो सरकार को सेना पर निर्भर होना पड़ता है।'
वहीं, यह पूछे जाने पर, कि क्या वह कह रहे हैं कि पाकिस्तान में सेना बहुत मजबूत है, तो प्रधानमंत्री काकर ने कहा, कि "व्यावहारिक रूप से हां, हां। मैं बिल्कुल यही कह रहा हूं।''
'सेना को राजनीति से बाहर नहीं रख सकते'
एक सप्ताह में यह दूसरी बार है, जब काकर ने स्वीकार किया है, कि सेना अभी भी सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखती है।
मंगलवार को तुर्की के सार्वजनिक प्रसारक, समाचार चैनल टीआरटी वर्ल्ड के साथ एक साक्षात्कार में, जब उनसे पूछा गया, कि क्या पाकिस्तानी सेना राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाती रहेगी, तो काकर ने कहा, कि "व्यावहारिक, यथार्थवादी और ईमानदारी से... हां।"
आपको बता दें, कि ये एक स्थापित तथ्य है, कि पाकिस्तान में सेना ने हमेशा से सरकार को चलाया है और जब जब देश की सरकारों ने अपने हाथों में शक्ति लेने की कोशिश की है, तब तक सेना ने सरकार का तख्तापलट किया है। यही वजह है, कि पाकिस्तानी में अभी तक किसी भी सरकार ने अपने पांच सालों का कार्यकाल पूरा नहीं किया है।












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