इमरान के पाखंड की खुली पोल, अफगानों को फंसाने के लिए पाकिस्तान ने किया था गलत काम

फेसबुक ने खुलासा किया है कि, पाकिस्तानी हैकर्स ने अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार के अधिकारियों के अकाउंट को हैक करने की कोशिश की थी।

वॉशिंगटन, नवंबर 17: अफगानिस्तान को लेकर इमरान खान कितने भी घड़ियाली आंसू बहा लें, लेकिन अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर जैसे जैसे खुलासे हो रहे हैं, पाकिस्तान के पाखंड को पोल खुलती जा रही है। अब फेसबुक ने कहा है कि, जिस वक्त तालिबान अफगानिस्तान में कब्जा करने की कोशिश कर रहा था, उस वक्त पाकिस्तानी हैकर्स अफगानिस्तान के सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट को हैक कर रहे थे। यानि, आप समझ सकते हैं कि, तालिबान की मदद करने के लिए इमरान खान सरकार ने कितने तरह के पैंतरे आजमाए।

अफगान यूजर्स को बनाया निशाना

अफगान यूजर्स को बनाया निशाना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए गये एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तानी हैकर्स ने अफगानिस्तान के सोशल मीडिया यूजर्स के फेसबुक अकाउंट को हैक किया था। फेसबुक ने कहा कि, पाकिस्तानी हैकर्स के निशाने पर वो सोशल मीडिया यूजर्स थे, जिनका पूर्ववर्ती अफगानिस्तान सरकार के साथ किसी ना किसी तरह का संबंध था। जाहिर सी बात है, पाकिस्तानी हैकर्स अफगान सरकार से संबंध रखने वाले यूजर्स का अकाउंट हैक कर उससे जुड़ी जानकारियां तालिबान के साथ शेयर कर रहे होंगे। फेसबुक ने इंटरव्यू के दौरान कहा है कि, पाकिस्तान में सिक्योरिटी इंडस्ट्री के नाम से काम करने वाले 'साइड कॉपी' नाम से जाने जाना वाला हैकर्स ग्रुप ने मैलवेयर का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान के लोगों के फेसबुक अकाउंट को हैक किया था।

किन लोगों के अकाउंट हैक

किन लोगों के अकाउंट हैक

फेसबुक की तरफ से कहा गया है कि, पाकिस्तानी हैकर्स के निशाने पर मुख्य तौर पर वो लोग शामिल थे, जो सीधे तौर पर अफगानिस्तान सरकार के साथ जुड़े थे, सेना के अधिकारी थे, अफगानिस्तान सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी थी, खुफिया एजेंसियों के अधिकारी थे या फिर अफगानिस्तान की सरकार में शामिल थे, उन लोगों के फेसबुक अकाउंट को पाकिस्तानी हैकर्स ने निशाना बनाया था। फेसबुक ने कहा कि उसने अगस्त में साइडकॉपी को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, जिसने पिछले दिनों अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया है, उसने खुलासा किया है कि, अफगानिस्तान के यूजर्स का अकाउंट हैक करने के लिए पाकिस्तानी हैकर्स ने कई तरह के हथकंडे अपनाए थे।

हैकर्स के हथकंडे

हैकर्स के हथकंडे

फेसबुक ने कहा है कि, पाकिस्तानी हैकर्स लगातार अफगानिस्तान यूजर्स को 'फिशिंग लिंक' भेजते रहते थे और फिर जैसे ही कोई यूजर उनके लिंक को क्लिक करता था, उनके अकाउंट को हैक कर लिया जाता था और उनके चैट को डाउनलोड कर लिया जाता था। इसके अलावा पाकिस्तानी हैकर्स ने अफगान यूजर्स को हनी ट्रैप में भी फंसाने की कोशिश की, जिसके लिए फर्जी जवान लड़कियों के नाम से फेसबुक अकाउंट तैयार किए थे। इसके साथ ही पाकिस्तानी कंपनी ने कई 'वैध वेबसाइट' से भी समझौता किया था, ताकि अफगानिस्तान के यूजर्स को फंसाने में मदद मिल सके। फेसबुक के ''साइबर जासूसी जांच'' के प्रमुख माइक डिविल्यांस्की ने कहा कि, "इन खतरों के बारे में पता लगाना हमारे लिए काफी मुश्किल था और हम ठीक से नहीं जानते कि किनसे समझौता किया गया था या उसका अंतिम परिणाम क्या था।"

अफगानों की सुरक्षा में कदम

अफगानों की सुरक्षा में कदम

आपको बता दें कि, अगस्त महीने में अफगानिस्तानियों की सुरक्षा के लिए फेसबुक, ट्विटर इंक, अल्फाबेट इंक के गूगल और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के लिंक्डइन सहित प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ईमेल कंपनियों ने अफगानिस्तान सरकार के अधिकारियों और सरकार से जुड़े लोगों के इमेल अकाउंट और सोशल मीडिया अकाउंट को लॉक कर दिया था। उस वक्त गुगल की तरफ से कहा गया था कि, अफगान अधिकारियों के ईमेल को हैक करने की कोशिश की जा रही है। फेसबुक की तरफ से कहा गया है कि, कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए और उस वक्त अफगानिस्तान की जो स्थिति बनी थी, उसे देखते हुए फसेबुक हैकिंग को लेकर खुलासा नहीं करने का फैसला लिया गया था। फेसबुक ने कहा कि, पाकिस्तानी हैकर्स ने अप्रैल महीने से अगस्त महीने के बीच अफगानिस्तान के यूजर्स के अकाउंट को हैक करने की कोशिश की थी। फेसबुक ने ये भी खुलासा किया है कि, उसने अफगानों के फेसबुक अकाउंट पर पाकिस्तानी हैकर्स के 'हमले' को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय को पूरी रिपोर्ट दी थी।

हैकर्स ग्रुप पर फेसबुक की कार्रवाई

हैकर्स ग्रुप पर फेसबुक की कार्रवाई

फेसबुक ने कहा है कि, फेसबुक के जांचकर्ताओं ने पिछले महीने दो हैकिंग समूहों के खातों को निष्क्रिय कर दिया था, जिन्हें उसने सीरिया की वायु सेना की खुफिया जानकारी से जोड़ा था। फेसबुक ने कहा कि एक समूह, जिसे सीरियन इलेक्ट्रॉनिक आर्मी के रूप में जाना जाता है, उसने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और अन्य लोगों को निशाना बनाया है, जो सत्तारूढ़ शासन का विरोध कर रहे थे, जबकि अन्य ने फ्री सीरियन आर्मी से जुड़े लोगों और पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाया, जो विपक्षी बलों में शामिल हो गए थे।

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