भारत के साथ फिर कारोबार शुरू करना चाहता है पाकिस्तान? विदेश मंत्री ने नई दिल्ली के पाले में डाली गेंद

India-Pakistan Trade: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कारोबार को लेकर गेंद भारत के पाले में डाल दी है और ऐसे संकेत दिए हैं, कि पाकिस्तान, भारत के साथ कारोबार को फिर से शुरू करना चाहता है। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान से आयात पर भारत की तरफ से "भारी शुल्क" लगाए जाने के कारण इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच व्यापार संबंध 2019 से निलंबित हैं।

शनिवार को नेशनल असेंबली को सौंपे गए एक लिखित उत्तर में, इशाक डार, जिनके पास उप प्रधान मंत्री का पद भी है, उन्होंने कहा, कि "पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से भेजे जाने वाले सामानों पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दिया, कश्मीर बस सेवा और सीमा पार व्यापार को निलंबित कर दिया।"

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डॉन अखबार के मुताबिक, डार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सांसद शर्मिला फारुकी के उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों में आने वाली व्यापार चुनौतियों के बारे में जानकारी मांगी थी।

पाकिस्तान ने मार्च में भी की थी ऐसी ही अपील

इसी साल मार्च महीने में, लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, इशाक डार ने भारत के साथ व्यापार गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए पाकिस्तान के व्यापारिक समुदाय की मांग पर कुछ ऐसा ही बयान दिया था। हालांकि, बाद में उनके कार्यालय ने स्पष्टीकरण जारी किया, कि पाकिस्तान की भारत के साथ व्यापार संबंधों को फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं है।

5 अगस्त 2019 को भारतीय संसद ने जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया, उसके बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ करीब करीब सभी तरह के कारोबार को सस्पेंड कर दिया। तत्कालीन इमरान खान की सरकार ने कहा था, कि भारत के साथ कारोबार तब तक शुरू नहीं होगा, जब तक कश्मीर में अनुच्छेद 370 की फिर से बहाली नहीं की जाती है।

डार ने शनिवार को कहा, कि "हमने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के मुख्य मुद्दे सहित सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए लगातार रचनात्मक जुड़ाव और नतीजे तक पहुंचने लायक बातचीत की वकालत की है।"

विदेश मंत्री ने कहा, कि "शांति और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए कदम उठाने की जिम्मेदारी अब दिल्ली पर है।"

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में गिरावट क्यों आई?

भारत कहता रहा है, कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा रखता है, जबकि इस बात पर जोर देता रहा है, कि इस तरह के जुड़ाव के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है।

इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच तनावपूर्ण संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका मुख्य कारण कश्मीर मुद्दा और साथ ही पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद है। मोदी सरकार ने साफ कर दिया है, कि वो पाकिस्तान से तब तक कोई बात नहीं करेगी, जब तक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद खत्म नहीं किया जाता है।

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