पाकिस्तान के पास होगा तुर्की का 5th जेनरेशन लड़ाकू जेट, सरकारी टेबल पर क्यों फंसी है भारतीय AMCA डिजाइन?
Turkey Stealth Fighter Jet: तुर्की ने पिछले महीने अपने पहले स्टील्थ फाइटर जेट KAAN की कामयाब उड़ान के साथ फाइटर जेट की रेस में ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है, लेकिन असल दिक्कत ये है, तुर्की पहले ही पाकिस्तान को अपने इस फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल होने का ऑफर दे चुका है।
नाटो सदस्य तुर्की ने 2016 में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने के लिए अपनी TF-X परियोजना शुरू की थी और तुर्की एयरोस्पेस फर्म TUSAS ने अगली पीढ़ी के लड़ाकू जेट विकसित करने के लिए 2017 में ब्रिटेन की BAE सिस्टम्स के साथ 125 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

पिछले महीने TUSAS ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें KAAN पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट को उड़ान भरते और फिर उत्तरी अंकारा में एक हवाई अड्डे पर लौटते हुए दिखाया गया है। इसमें कोई शक नहीं, कि तुर्की के लिए ये एक ऐतिहासिक उड़ान है, लेकिन अगर पाकिस्तान को ये फाइटर जेट मिलते हैं, तो भारत के लिए ये एक सिरदर्द साबित हो सकता है, क्योंकि भारतीय स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम AMCA अभी भी रत्रा मंत्रालय में ही मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
यूरो टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि तुर्की ने अपने स्टील्थ फाइटर जेट के कामयाब परीक्षण के बाद काफी तेजी के साथ प्रोडक्शन शुरू कर दिया है और तुर्की का मकसद, अगले कुछ सालों में अपनी वायुसेना को पांचवी पीढ़ी के इस विमान को सौंप देना है।
पाकिस्तान के साथ तुर्की करेगा करार
पाकिस्तान की सेना ने इसी साल जनवरी महीने में घोषणा की थी, कि उसने चीन से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एफसी-31/जे-31 डबल इंजन वाले स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने करने की योजना बनाई है और ऐसा करके उसकी योजना फाइटर जेट हासिल करने की रेस में भारत से आगे निकलना है। लेकिन, पाकिस्तान ने तुर्की को भी कहा है, कि वो उसके स्टील्थ फाइटर जेट का हिस्सा होना चाहता है।
यानि, पाकिस्तान चीन और तुर्की, दोनों के स्टील्थ फाइटर जेट का हिस्सा बनने की योजना रखता है। हालांकि, आर्थिक संकट की वजह से पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट में किस हद तक शामिल हो पाएगा, ये अभी कहना मुश्किल है, लेकिन पाकिस्तान ने अपने इरादे कम से कम जाहिर कर दिए हैं।
तुर्की ने पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट संयुक्त तौर पर बनाने का ऑफर दिया था और पाकिस्तान ने तुर्की के ऑफर पर भी हामी जताई थी।
लिहाजा, अब जब तुर्की ने अपने काम फाइटर जेट का प्रोडक्शन तेजी से शुरू कर दिया है और ऐसे में, जब वो पहले ही पाकिस्तान को अपने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट KAAN के प्रोडक्शन में शामिल होने का न्योता दे चुका है, और तो और जब पाकिस्तान ने चीन से एफसी-31/जे-31 डबल इंजन खरीदने की घोषणा भी कर रखी है, तो भारत के सामने पैनिक बटन बजने लगा है, लेकिन भारत के सामने दिक्कत ये है, कि वो फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के लिए किस विकल्प के साथ जाए?
क्या जेट निर्माण में पीछे हो रहे हम?
स्वदेशी लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में होने वाली देरी, और प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट में लगातार होने वाली देरी की वजह से भारतीय वायुसेना के पास अब, भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की घटती इकाइयां ही बची हैं।
पिछले साल अगस्त में यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारतीय वायुसेना के पास अब लड़ाकू विमानों की तुलना में, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इकाइयां ज्यादा हैं। यानि, भारतीय वायुसेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या काफी कम हो गई है।
भारतीय AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि इसे 10 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन इसका डेवलपमेंट काफी धीमा है। इस प्रोजेक्ट के तहत फाइटर जेट के डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है और प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाले सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) को धन आवंटन के लिए भेज दिया गया है। लेकिन, वहां फाइल अटकी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के शुरूआती चरण की ही लागत 15 हजार करोड़ रुपये है, लिहाजा इस फाइल को मंजूरी ना मिलने के पीछे बजट का संकट है।
हाल ही में, डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बयान में कहा था, कि अगर सुरक्षा समिति से फंड आवंटित कर भी दिया जाता है, तो भी पहले प्रोटोटाइप के बनने में कम से कम 7 सालों का वक्त लगेगा। और पहले प्रोटोटाइप को अगर टेस्ट के बाद मंजूरी मिल जाता है, तो उसके तीन सालों के बाद विमान को इंडियन एयरफोर्स के हवाले कर दिया जाएगा। यानि, अगर 2024 में फंड जारी किए जाते हैं, तो 2034 में एयरफोर्स को विमान मिल पाएगा।
2022 में डीआरडीओ ने संकेत दिया था, कि AMCA प्रोजेक्ट के तहत बने स्टील्थ फाइटर जेट 2025-26 तक उड़ान भरने में कामयाब हो जाएगा, लेकिन अब इस बात की गारंटी है, कि इतने समय में इस प्रोजेक्ट को पूरा करना संभव नहीं है।
लेकिन, दूसरी चिंता इस बात को लेकर है, कि इस प्रोजेक्ट में इतनी देरी होने से कहीं इसका हाल भी तेजस प्रोजेक्ट जैसा ना हो जाए। सोवियत मूल के मिग-21 बेड़े को बदलने के लिए 1983 में स्वीकृत तेजस प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। इस प्रोजेक्ट के तहत 2015 तक एयरफोर्स को तेजस MK-1 फाइटर जेट मिल जाने चाहिए थे, लेकिन अब जाकर विमान मिलने शुरू हुए हैं। जिसकी वजह से इंडियन एयरफोर्स के पास विमानों की काफी कमी हो गई है।
KAAN फाइटर जेट के बारे में दिलचस्प बात यह है, कि इसका डेवलपमेंट AMCA परियोजना के साथ ही शुरू हुआ था, लेकिन तुर्की अब अपने इस फाइटर जेट का ट्रायल करने के बाद इसका प्रोडक्शन शुरू कर चुका है, जबकि भारत में अभी तक प्रोजेक्ट को लेकर फाइल को मंजूरी भी नहीं मिली है। और इससे भी बड़ी दिलचस्प बात ये है, कि तुर्की की अर्थव्यवस्था, भारत से तीन गुना कम है।












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