JF-17, J-31 के बाद J-10C फाइटर जेट का नया बैच खरीदेगा पाकिस्तान.. जानिए भारतीय वायुसेना से कितना है आगे?
J-10C Pakistan-China Deal: JF-17 और J-10C लड़ाकू विमानों के बाद, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने हल्के लड़ाकू विमान JL-15 के लिए तो चीन का रुख किया है, जबकि उसकी नजर पहले से ही साल 2029 तक चीन से J-31 स्टील्थ फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान खरीदने की है, जिसके लिए वो ऑर्डर दे चुका है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान, जो पहले से ही चीन के साथ 36 J-10CE लड़ाकू विमान के लिए सौदा कर चुका है और जिनमें से 20 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी भी चीन, पाकिस्तान को दे चुका है, वो 14 और J-10C लड़ाकू विमानों का ऑर्डर चीन को देने जा रहा है।

ऐसी रिपोर्ट है, कि पाकिस्तान J-10CE के अपने बेड़े को 36 से बढ़ाकर 50 तक ले जाने की योजना बना रहा है और इसी कड़ी में वो 14 J-10CE लड़ाकू विमानों के लिए जल्द की चीन को ऑर्डर देने वाला है।
लड़ाकू विमानों में भारत से कैसे आगे रहा है पाकिस्तान?
पाकिस्तान ने हमेशा से कोशिश की है, कि लड़ाकू विमानों को लेकर वो भारत से आगे रहे और कंगाल होकर भी अपनी इस कोशिश में वो अकसर कामयाब रहा है। भारत से आगे निकलने की रेस पाकिस्तान ने 1954 में ही शुरू कर दी थी, जब उसने अमेरिका से 102 एफ-86एफ 'सेबर' फाइटर जेट्स खरीद लिया था। उस वक्त भारत ने डसॉल्ट ऑरागन्स खरीदा था और बाद में इंडियन एयरफोर्स ने डसॉल्ट मिस्टेर IV का अधिग्रहण किया था।
वहीं, साल 1961 में एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में, पाकिस्तान ने पारस्परिक सहायता कार्यक्रम के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका से F-104 स्टारफाइटर्स हासिल किए । जबकि, भारतीय वायुसेना ने सोवियत मिग-21 खरीदकर इसका जवाब दिया, जो 1964 में इंडियन एयरफोर्स की सर्विस में शामिल किया गया।
1981 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने सहायता पैकेज के हिस्से के रूप में पाकिस्तान को F-16 की बिक्री को मंजूरी दे दी। वहीं, भारत ने 1982 में मिराज 2000 खरीदने के लिए फ्रांस के साथ समझौता किया।
1984 में, भारत ने वारसॉ संधि के बाहर मिग-29 खरीदने के लिए रूस को ऑर्डर दिया और इस फाइटर जेट का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गया।
पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) 2009 से अपने प्राथमिक AEW&C प्लेटफॉर्म के रूप में Eriye रडार का उपयोग करके Saab 2000 लड़ाकू विमान को ऑपरेट कर रहा है और 2011 से वो चीनी ZDK-03 AEW&C का उपयोग कर रहा है। PAF तीन संशोधित डसॉल्ट फाल्कन 20 विमान भी ऑपरेट करता है, जिनकी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत ने 2009 में बेरीव ए-50 फाल्कन AEW&C को अपने बेड़े में शामिल किया DRDO की तरफ से बनाए गये'नेत्रा' AEW&C को 2017 में इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया गया।
पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) ने फरवरी 2010 में पहला जेएफ-17 स्क्वाड्रन शामिल किया था, जबकि भारतीय वायुसेना ने जनवरी 2015 में LCA Mk1 को शामिल किया था। पीएएफ के पास पहले से ही ऐसे करीब 150 घरेलू लड़ाकू विमान हैं। जबकि, भारत ने करीब 50 LCA लड़ाकू विमानों का निर्माण किया है।
चीनी लड़कू विमान JF-17C ब्लॉक 3 विमान का पहला बैच मार्च 2023 में पाकिस्तानी वायुसेना में शामिल किया गया था। दूसरी तरफ, भारत का LCA Mk1A जल्द ही इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया जाएगा। भारत ने 2015 में राफेल के लिए फ्रांस के साथ समझौत किया था, और पाकिस्तान ने 2021 में चीन के साथ सौदे पर हस्ताक्षर करते हुए J-10CE की खरीद के साथ राफेल लड़ाकू विमान को जवाब देने की योजना बनाई।
कैसा है J-10C लड़ाकू विमान?
चेंगदू जे-10 एक मध्यम वजन वाला, सिंगल इंजन, मल्टी रोल, डेल्टा विंग और कैनार्ड डिजाइन और फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल वाला हर मौसम में काम करने वाला लड़ाकू विमान है। इसे मुख्य रूप से हवा से हवा में लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन यह स्ट्राइक मिशन को भी अंजाम दे सकती है।
इसे चौथी पीढ़ी का विमान माना जाता है। इसने 1998 में अपनी पहली उड़ान भरी थी और 2005 में इसे सेवा में शामिल किया गया था। अभी तक चीन, 600 से ज्यादा विमान बनाए गए हैं और PLAAF, PLA नौसेना और PAF के साथ उड़ान भर रहे हैं।
जबकि, J-10C एक एडवांस वेरिएंट है और यह WS-10B थ्रस्ट-वेक्टरिंग कंट्रोल इंजन से ऑपरेट होता है। इसमें चीन ने स्वदेशी AESA अग्नि-नियंत्रण रडार, इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर (IIR) PL-10 और लंबी दूरी की PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (AAM) से सुसज्जित है। वहीं, J-10CE, J-10C का निर्यात संस्करण है और निर्यात संस्करण के रडार की रेंज कम है, और हथियार बिक्री प्रतिबंध हैं।
पाकिस्तान ने पहले 36 J-10CE का ऑर्डर दिया था, और इस बेड़े को 50 की संख्या तक पहुंचाने के लिए वो 14 विमानों के लिए और ऑर्डर कर सकता है। सऊदी अरब और मिस्र ने कथित तौर पर J-10CE जेट खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

राफेल के मुकाबले कितना ताकतवर J-10CE?
हालांकि, J-10CE और राफेल लड़ाकू जेट के बीच तुलना काफी हद तक अनुचित है। फिर भी, जे-10 और राफेल, दोनों को 4.5-पीढ़ी के मल्टी रोल लड़ाकू जेट कहा जा सकता है, जिनका कुछ मामलों में प्रदर्शन और क्षमताएं समान हैं। हालांकि, तकनीक, हथियार, एयरो-इंजन और युद्ध अनुभव के मामले में राफेल को J-10 पर स्पष्ट बढ़त हासिल है।
राफेल में सर्वश्रेष्ठ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट्स शामिल किया गया है। इसमें चार मिसाइलों वाला एक सुपरक्रूज़ और 1250 लीटर का बेली ड्रॉप टैंक है। राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है, जबकि J-10CE की मारक क्षमता 1850 किलोमीटर है।
राफेल में J-10C की तुलना में सिर्फ 11 प्रतिशत ज्यादा वजन के लिए 20 प्रतिशत ज्यादा थ्रस्ट है और इसलिए, ये बेहतर थ्रस्ट/वजन अनुपात है। वहीं, राफेल में इस्तेमाल की गई Snecma M88 एक आजमाया हुआ एयरो इंजन है, जबकि डब्लूएस-10 कथित तौर पर 2009 के बाद ही पर्याप्त रूप से परिपक्व हुआ और अभी भी विकसित हो रहा है।
राफेल का इस्तेमाल माली, अफगानिस्तान, लीबिया, इराक और सीरिया में युद्ध अभियानों में किया गया है। लेकिन, J-10CE ने सिर्फ पाकिस्तान के साथ ही युद्धाभ्यास किया है।
पाकिस्तान को क्यों चाहिए और J-10CE विमान?
पाकिस्तान, F-7PG (मिग-21 वैरिएंट), ROSE I प्रोजेक्ट विंटेज के डसॉल्ट मिराज III विमान, मिराज 5 ROSE II, मिराज IIIEA और मिराज 5PA का संचालन करता है।
लेकिन, ये सातों स्क्वाड्रन की सर्विस अब धीरे धीरे खत्म होने वाली है, लिहाजा इन्हें बदलने के लिए पाकिस्तान को करीब 250 इस कैटोगिरी के लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। इसके अलावा, पाकिस्तानी एयरफोर्स की योजना F-16, J-10CE, और JF-17 विमानों की संख्या भी कम करने की है।
पाकिस्तान की योजना तुर्की से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट KAAN और चीनी J-31 खरीदने की है, जो पाकिस्तानी एयरफोर्स की क्षमता को काफी ज्यादा बढ़ा देंगे। इसके अलावा, ऐसी खबरें भी आई हैं, कि पाकिस्तानी एयरफोर्स को KJ-500 AEW&C और Y-8 इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमानों में भी दिलचस्पी है।
Hongdu L-15 Falcon के लिए चीन-पाकिस्तान में डील
होंगडू एल-15 फाल्कन (JL-10) एक डबल इंजन, सुपरसोनिक, एडवांस जेट ट्रेनर और हल्का लड़ाकू विमान है, जो पहले से ही चीनी वायु सेना में शामिल है। इसमें फ्लाई-बाय-वायर (FBW) का उपयोग किया गया है और इसमें ग्लास कॉकपिट है।
पाकिस्तान इस लीड-इन फाइटर-ट्रेनर (LIFT) को हासिल करने के लिए बातचीत कर रहा है। विमान का निर्माण याक 130 के डिज़ाइन डेटा के आधार पर किया गया था, और चीन को रूस के याकोवलेव प्रायोगिक डिज़ाइन ब्यूरो ने इस लड़ाकू विमान को बनाने में मदद दी थी।
इस जेट का LIFT वेरिएंट PL-8 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (AAM) और LS-6 सैटेलाइट गाइडेड बम सहित कई प्रकार के हथियार ले जा सकता है। चूंकि चीन के पास उपयुक्त एयरो-इंजन नहीं है, इसलिए यूक्रेनी इवचेंको प्रोग्रेस AI-222K टर्बोफैन L-15 को शक्ति प्रदान करता है। पाकिस्तान हल्के हमले वाले वेरिएंट को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है। अब तक जाम्बिया और यूएई ने विमान खरीदे हैं। यह विमान सस्ता माना जाता है और इसकी कीमत 10-15 मिलियन डॉलर के बीच है।
भारत के लिए कितनी बड़ी मुसीबत?
पाकिस्तान कई लड़ाकू विमानों को खरीदने में दिलचस्पी रखता है, लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या उसके पास इतना पैसा है?
पाकिस्तान और IMF ने नकदी संकट से जूझ रहे देश की वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने और महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने के लिए नए बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत शुरू की है। पाकिस्तान को अपने 23 अरब डॉलर के बाहरी कर्ज को चुकाने के लिए 2024-25 में अपने प्रमुख सहयोगियों से करीब 12 अरब डॉलर के ऋण की आवश्यकता है।
पाकिस्तान को सऊदी अरब से 5 अरब डॉलर, यूएई से 3 अरब डॉलर और चीन से 4 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है। इस बीच, पाकिस्तान और ज्यादा ऋण के लिए चीन से बातचीत कर रहा है। लिहाजा, अब दुनिया जानना चाहती है, कि पाकिस्तान इतनी बड़ी रक्षा खरीद के लिए कहां से पैसे लाएगा?
पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के 60 प्रतिशत उपकरण चीनी मूल के हैं। और पाकिस्तान, अब पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो चुका है। इसके अलावा, पाकिस्तानी वायुसेना चीन की वायुसेना के साथ ही युद्धाभ्यास करती है, जिसकी वजग से यह भारत के खिलाफ एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
भारतीय वायुसेना के पास अभी भी सबसे कम सिर्फ 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं। जबकि भारत सरकार ने अंतर को कम करने के लिए LCA लड़ाकू विमानों के उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। भारतीय वायुसेना में 114 LCA लड़ाकू विमान शामिल किए जाएंगे और विमानों को बनाने का काम HAL को सौंप दिया गया है।
इसके अलावा, भारत को ज्यादा से ज्यादा संख्या में AMCA (एडवांस मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) की भी जरूरत है, जो फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान है और इसी साल भारत सरकार ने इस विमान के डिजाइन को मंजूरी दी है। वहीं, भारत को MMRCA-क्लाल एयरक्राफ्ट की भी जरूरत है। यदि राफेल को भारतीय वायुसेना के बाद भारतीय नौसेना के लिए भी चुना जाता है, तो इसे भारत में बनाया जा सकता है। LCA Mk-2 के निर्माण में अभी वक्त लगने वाला है, लिहाजा एक्सपर्ट्स का मानना है, कि AMCA प्रोजेक्ट में तेजी लाने की जरूरत है, क्योंकि कहीं ऐसा न हो, कि हमें विदेशों से पांचवीं पीढ़ी के विमान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़े।
भारत को ब्रह्मोस 2 और एस्ट्रा 3 मिसाइलों के विकास में भी तेजी लानी चाहिए। और अब एक्शन लेने का वक्त आ गया है, नहीं तो काफी देर हो सकती है।
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