पाकिस्तान को IMF से लोन मिलने की उम्मीद खत्म, अब चीन से देश बचाने को कर्ज मांगेंगे शहबाज शरीफ, समय समाप्त

पाकिस्तान 22 बार आईएमएफ के प्रोग्राम में जा चुका है और उसने हर बार आईएमएफ की शर्तों को तोड़ा है। लिहाजा, इस बार आईएमएफ अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है।

Pakistan China Bailout Package

Pakistan China Bailout Package: आईएमएफ की कड़ी शर्तों के आगे पाकिस्तान पस्त हो गया है और बेलऑउट पैकेज मिलने में लगातार हो रही देरी के बाद अब पाकिस्तान, चीन के सामने झोली फैला सकता है।

जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6.5 अरब डॉलर के बेलऑउट पैकेज से 1.1 अरब डॉलर की किश्त मिलने में और देरी होती है, तो पाकिस्तान प्लान-बी पर काम करने की योजना बना रहा है।

द न्यूज में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 22 करोड़ की आबादी वाले देश पाकिस्ता में, जहां करेंसी किल्लत है, उसके पास अपनी बीमार अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए चीन से एक तंत्र तैयार करने के लिए कहने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

द न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि "देश में गहराते राजनीतिक और आर्थिक संकट के बीच, आईएमएफ ने 'प्रतीक्षा करो' की नीति अपनाई है, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी नहीं रखा जा सकता है।" सूत्रों के मुताबिक, "या तो आईएमएफ कार्यक्रम को नौवीं समीक्षा कार्यक्रम को पूरा करने के लिए कहा जाएगा, या फिर कार्यक्रम को ही खत्म कर दिया जाएगा"।

सूत्रों ने द न्यूज को बताया है, कि "हम नौवीं समीक्षा पूरी किए बिना आईएमएफ के साथ कोई और डेटा साझा नहीं करेंगे" वहीं, कई रिपोर्टों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने आईएमएफ फंड के कर्मचारियों को पहले ही बता दिया है, अगर बेलऑफट पैकेज पर बात नहीं बनती है, तो फिर पाकिस्तान आईएमएफ के साथ 2023-24 के लिए बजटीय रूपरेखा साझा नहीं करेगा।

चीन से लोन प्रोग्राम पर बात करेगा पाकिस्तान

सूत्रों ने याद बताया है, कि पश्चिमी देश की राजधानी के एक राजदूत ने एक मंत्री के साथ बातचीत के दौरान पूछा, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कब मंदी की आशंका है। जिसके बाद उस देश के राजदूत को पाकिस्तान के मंत्री ने बताया, कि "पाकिस्तान कभी भी डिफॉल्ट नहीं करेगा।" हालांकि, रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है, कि किस देश के राजदूत ने पाकिस्तान के किस मंत्री से पाकिस्तान के डिफॉल्ट होने को लेकर सवाल पूछा था।

आपको बता दें, कि पाकिस्तान के सामने आईएमएफ ने कई शर्तें रखी हैं, जिनमें से एक शर्त राजनीतिक स्थिरता भी है, लेकिन पाकिस्तान में आर्थिक संकट से ज्यादा खतरनाक स्थिति में राजनीतिक संकट है, लिहाजा अब पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलने की संभावना काफी कम हो गई है।

लिहाजा, पाकिस्तान के स्वतंत्र अर्थशास्त्री अब सुझाव दे रहे हैं, कि सरकार आईएमएफ कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने के लिए अंतिम प्रयास करे या फिर संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए स्पष्ट रूप से चीन की ओर देखे।

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    पूर्व वित्त मंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ हाफिज ए पाशा ने कहा, कि अगर आईएमएफ आगे नहीं बढ़ता है, तो पाकिस्तान के पास चीन से अनुरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, कि वह इस्लामाबाद को पूर्ण संकट से उबारने में मदद करने के लिए कोई तंत्र तैयार करे।

    आपको बता दें, कि मूडी समेत तमाम अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं ने बताया है, कि अगर जून में पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन की किश्त नहीं मिलता है, तो देश दिवालिया हो जाएगा।

    हालांकि, दिक्कत ये है, कि क्या चीन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आईएमएफ जैसा कोई कार्यक्रम बनाएगा? ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन पहले से ही पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज दे रखा है और चीन ने पिछले साल काफी नानुकुर के बाद पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था, जिसमें अभी भी पूरा कर्ज पाकिस्तान को नहीं दिया गया था।

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