पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के लिए निकली स्वीपर और चपरासी की वैकेंसी, मजहबी विज्ञापन से अल्पसंख्यक नाराज
दक्षिण कराची के स्वास्थ्य विभाग ने ये वैकेंसी निकाली है। ये वैकेंसी एसजीडी स्पेशल लेप्रोसी क्लीनिक में खाली 5 सफाईकर्मयों के पोस्ट को लेकर है।
इस्लामाबाद, मई 26: पाकिस्तान में इन दिनों एक वैकेंसी पर जमकर बवाल हो रहा है। पाकिस्तान में दूसरे धर्म के लोगों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है, आप रोजगार के इस समाचार को सुनकर बहुत आसानी से समझ जाएंगे। पाकिस्तान में स्वीपर और चपरासी के लिए वैकेंसी निकाली गई है, जो गैर मुस्लिमों के लिए है। यानि, पाकिस्तान में जो वैकेंसी निकाली गई है, उसमें पाकिस्तान के दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय जैसे हिंन्दू, ईसाई और बौद्ध के लिए है। पाकिस्तान में निकाली गई इस वैकेंसी पर काफी विवाद हो रहा है।

वैकेंसी पर विवाद
दक्षिण कराची के स्वास्थ्य विभाग ने ये वैकेंसी निकाली है। ये वैकेंसी एसजीडी स्पेशल लेप्रोसी क्लीनिक में खाली 5 सफाईकर्मयों के पोस्ट को लेकर है, जिसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों के लिए ही रिक्ती रखी गई है। जिसके बाद हिंदुओं और ईसाईसों से भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। पाकिस्तान के स्वास्थ्य विभाग ने वैकेंसी के लिए जारी नोटिस में लिखा है कि यह वैकेंसी गैर मुस्लिमों यानि हिंदुओं और ईसाई समुदाय के लिए है, जबकि पाकिस्तान में दूसरी नौकरियों में इस तरह की कोई शर्त नहीं रखी जाती है। वहीं, एक विज्ञापन में पाकिस्तान स्वास्थ्य विभाग ने लिखा है कि 'मुसलमान गंदे काम के लिए अयोग्य हैं और यह भर्ती सिर्फ गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए है'।
विवादित वैकेंसी पर बवाल
पहले भी पाकिस्तान में इस तरह के भेदभावपूर्ण और पक्षपातपूर्ण और मजहब के आधार पर भेदभाव वाले विज्ञापन निकल चुके हैं। इससे पहले सिंध सरकार ने मत्य्स पालन विभाग ने वैकेंसी जारी किया था, जिसमें स्वीपर और सफाईकर्मियों के लिए 42 वैकेंसी निकाला गया था। जिसमे सिर्फ गैर-मुस्लिमों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। पाकिस्तान में पहले भी सफाईकर्मियों के लिए नौकरी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों के लिए ही आरक्षित किया गया था। सोशल मीडिया पर एक तरह के दो मामले सामने आने के बाद पाकिस्तान में विवाद हो रहा है।
हिंदुओं में नाराजगी
पाकिस्तान में विवादित विज्ञापन के बाद हिंदुओं में नाराजगी देखी जा रही है। पाकिस्तान के हिंदू मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस भेदभावपूर्ण रवैये पर सवाल उठाया है और पूछा है कि इस तरह की नौकरियों में ही गैर मुस्लिमों को जगह क्यों दी जाती है। पाकिस्तान के हिंदू सामाजिक कार्यकर्ता कपिल देव ने कहा है कि 'पाकिस्तान में सफाईकर्मियों की नौकरी सिर्फ हिंदुओं और ईसाईयों के लिए एक्सक्लूसिव है। यह सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये को दिखाता है। सरकार जो बार बार इस तरह के विज्ञापन निकालती है वो यह दिखाता है कि बहुसंख्यक गंदगी फैलाएंगे और अल्पसंख्यक उसे साफ करेंगे। हम क्लीनर और सफाईकर्मियों में मुस्लिमों के समान अनुपात की मांग करते हैं'। वहीं, जर्नलिस्ट विंगास ने पाकिस्तान में इस विज्ञापन पर अफसोस जताया है और कहा है कि पाकिस्तान में सभी नागरिक समान नहीं हैं।
सरकार की आलोचना
पाकिस्तान में भेदभावपूर्ण विज्ञापन को लेकर कई लोग भारी विरोध जता रहे हैं। एमबीबीएस की छात्रा रेखा माहेश्वरी ने लिखा है कि 'ऐसे भेदभावपूर्ण नौकरी आप अपने पास ही रखें। हम अच्छी नौकरी और अच्छा पद प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं और क्या हुआ जो हम प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद पद पर नहीं पहुंच सकते हैं। हम काफी पढ़े लिखे हैं और दुनिया में कहीं भी बसने की हैसियत रखते हैं। हम हमेशा एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए कोशिश करते रहेंगे।'

दलितों से अत्याचार की हद
पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में ईसाईयों और दलितों सको हाथ से मैला उठाने के लिए मजबूर किया जाता है। पाकिस्तान की नगरपालिकाएं ईसाईयों को मैला ढोने के लिए बहाल करती हैं और ज्यादातर नगरपालिकाओं के पास मैला ढोने के लिए ईसाई मजदूर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी मुसलमान गटर साफ करने से इनकार कर देते हैं और ईसाईयों को अच्छी नौकरी देने से इनकार कर दिया जाता है और फिर उन्हें मैला ढोने के काम कर लगाया जाता है। पाकिस्तान सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में कुल 1.6 प्रतिशत ईसाई हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत लोग सफाई का काम करते हैं। वहीं, पाकिस्तान में सफाई का 20 प्रतिशत काम दलितों से करवाया जाता है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में जो हिंदू रहते हैं उनमें ज्यातादर दलित समुदाय से आते हैं और पाकिस्तान में उन्हें काफी टॉर्चर किया जाता है।












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