पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सैन्य और खुफिया सहयोग खत्म कर निकाली भड़ास
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सैन्य और खुफिया सहयोग को खत्म करने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कठोर रवैये के बाद, वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच रिश्तों में लगातार खटास पैदा होती दिख रही है। इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने मंगलवार को राजधानी इस्लामाबाद में एक संबोधन में कहा कि अमेरिका के साथ मिलिट्री और खुफिया सहयोग को स्थगित कर दिया है। गौरतलब है कि 1 जनवरी को ट्रंप ने ट्वीट कर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण पाकिस्तान की सैन्य आर्थिक मदद को रोकने की बात कही थी।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री खुर्रम ने कहा कि अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद भी अमेरिका अपनी लड़ाई अफगानिस्तान में हार रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान में अपनी नाकामयाबी के लिए पाकिस्तान को बली का बकरा बनाने की कोशिश की जा रही है। खुर्रम ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अफगानिस्तान की लड़ाई के लिए वे अब पाकिस्तानी जमीं का प्रयोग नहीं होने देंगे।
इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि उसे पाकिस्तान की ओर से मिलिट्री को-ऑपरेशन के स्थगित किए जाने की जानकारी नहीं मिली है। वीओए (Voice of America) वेबसाइट के मुताबिक, अमेरिका दूतावास के प्रवक्ता रिचर्ड नेलजायर ने कहा कि उन्हें इस बारे में अभी तक कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।
एक सवाल के जवाब में खुर्रम ने कहा कि 2011 में सलाला चेक पोस्ट पर हमले के बाद अफगानिस्तान के लिए नाटो सप्लाई रोककर पाकिस्तान ने बहुत सही कदम उठाया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप के कथित आरोपों के बाद पाकिस्तान इस तरह का कोई कदम नहीं उठाएगा, बल्कि सही समय का इंतजार करेगा।
बता दें कि पेंटागन प्रवक्ता कर्नल रॉब मैनिंग ने कहा था कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं होना चाहिए। उन्होंने साथ में यह भी कहा था कि अगर पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई करता है तो प्रतिबंधित आर्थिक मदद के बारे में फिर से सोचा जा सकता है।












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