पाकिस्तान में सेना को सौंपी गई और ज्यादा ताकत, आर्मी एक्ट से शहबाज सरकार ने पॉलिटिक्स को जकड़ा..,
Pakistan Army Act: पाकिस्तान की बुरी स्थिति के लिए वहां की सेना को सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जाता है, क्योंकि सेना बंटवारे के बाद से ही पाकिस्तान की राजनीति, विदेश नीति और आर्थिक नीति को संभाल रही है। पाकिस्तान में सेना कारोबार से लेकर विदेशों में व्यापार तक करती है, लेकिन शहबाज सरकार ने फिर से सत्ता में आने के लिए सेना की हाथों में और भी ज्यादा ताकतें दे दी है।
सीनेट ने गुरुवार को पाकिस्तान आर्मी एक्ट-1952 में संशोधन करने के लिए एक विधेयक पारित किया है, जिसमें देश या पाकिस्तान सेना की सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी का खुलासा करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए पांच साल तक की जेल का प्रस्ताव किया गया है।

पाकिस्तान के राजनीतिक एक्सपर्ट्स ने इस विधेयक को लेकर शहबाज सरकार की आलोचना की है और कहा है, कि ये सेना के हाथ में कानूनी चाबुक देने जैसा है, जिसके जरिए सेना जब चाहे, जिसे चाहे, अपने फंदे में जकड़ सकती है और पाकिस्तान के किसी भी अदालत में उसकी सुनवाई नहीं हो सकती है।
पाकिस्तान में आर्मी एक्ट पारित
"पाकिस्तान सेना (संशोधन) अधिनियम, 2023" शीर्षक के नाम से आर्मी एक्ट का विधेयक, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सीनेट में पेश किया था, जिसे पास कर दिया गया है।
इस विधेयक में धारा 26-ए (अनधिकृत खुलासा) जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके तहत "कोई भी व्यक्ति जो आधिकारिक क्षमता में हासिल की गई किसी भी जानकारी का खुलासा करता है, या खुलासा करने का कारण बनता है, जो पाकिस्तान या पाकिस्तान के सशस्त्र बलों की सुरक्षा और हितों के लिए हानिकारक है, या हो सकता है, तो उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है।"
हालांकि, अगर कोई नेता सेना प्रमुख से इजाजत लेने के बाद ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी।
इसमें यह भी कहा गया है कि इस तरह के मामले को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 के साथ पढ़े जाने वाले सेना अधिनियम की धारा 59 (सिविल अपराध) के अनुसार ही निपटाया जाएगा।
सेना के हाथ एक और हथियार
शहबाज शरीफ के इस बिल पर अब राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का साइन होना ही बाकी है और ये बिल, कानून बन जाएगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान सरकार ने आर्मी के हाथों में एक और बड़ा हथियार दे दिया है और अब आर्मी, किसी भी नेता को इस एक्ट में जब चाहे, जेल भेज सकती है। पाकिस्तान के नेता पहले से ही आर्मी के आदेशों में बंधे होते हैं और सजा का प्रावधान, आर्मी को असीमित अधिकार दे देगा।
हालांकि, पीपीपी के सीनेटर रजा रब्बानी ने इस विधेयक का घोर विरोध किया और उन्होंने इस बिल के पेश होने के बाद सदन से वॉकऑउट किया। सीनेट के पटल पर बोलते हुए, उन्होंने विधेयकों को पारित करने में जल्दबाजी का विरोध किया और उन्हें "अंधा कानून" करार दिया।












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