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Pakistan: राजनीति में 'भरत' जैसे भाई हैं शाहबाज शरीफ, भाई के लिए 4 बार गद्दी ठुकराई, नवाज को नहीं दिया धोखा

चाहे कोई इसे माने या न माने, निर्विवाद सत्य यह है कि किसी भी राजनीतिक परिवार में शहबाज शरीफ जैसा भाई मिलना नामुमकिन है। ये बात आज के दौर में ही नहीं हर दौर, हर काल-परिस्थिति में लागू होती है।

सत्ता संघर्ष में जहां पिता-पुत्र द्वारा एक-दूसरे की हत्या कर देने के कई उदाहरण हैं वहां पर एक प्रधानमंत्री रह चुका शख्स हजारों किमी दूर निर्वासित जीवन जी रहे अपने भाई की न सिर्फ सजा माफ करवाता है बल्कि उसके लिए अपनी कुर्सी तक का त्याग कर देता है... राजनीति में ऐसी कुर्बानी आपने आखिरी बार कब देखी थी?

nawaz sharif Shehbaz Sharif

कई मुद्दों पर शहबाज शरीफ के 16 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल की आलोचना हो सकती है लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह वो व्यक्ति हैं जिन्होंने पाकिस्तान को दिवालिया होने के संकट को दूर टाला और देश में एक बार फिर से मार्शल लॉ के खतरे से भी बचा लिया।

पाकिस्तान में अगले सप्ताह 8 फरवरी को चुनाव हैं। इस चुनाव में पीएमएल-एन एक नया नारा लेकर आई है "पाकिस्तान को नवाज दो" लेकिन सवाल है कि पीएमएल-एन को नवाज का तोहफा किसने दिया?

पाकिस्तान के तीन बार निर्वाचित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज लंदन में चार साल के आत्म-निर्वासन के बाद अक्टूबर 2023 में घर लौट आए और आते ही रैलियां करने लगे। मगर यह मत भूलिए कि नवाज इससे पहले जुलाई 2018 में भी स्वदेश लौटे थे। इमरान खान की सरकार थी और उन्हें उनकी बेटी मरियम नवाज के साथ लाहौर हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

Brother Shehbaz Sharif

नवाज शरीफ के मुक्तिदाता बने शहबाज

आखिर इस बार क्या बदला था? नवाज को अक्टूबर 2023 में इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, जबकि वह एक सजायाफ्ता भगोड़ा व्यक्ति थे? यह उनका भाई शहबाज ही था जिसने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं कि बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी नवाज के लाहौर आगमन पर उनकी गिरफ्तारी नहीं बल्कि सलामी दे रहे थे।

नवाज की सजा माफ हुई

क्या यह चमत्कार नहीं है कि नवाज और उनकी बेटी को एवेनफील्ड अपार्टमेंट मामले और अल-अजीजिया भ्रष्टाचार मामले में आरोपों से बरी कर दिया गया... न सिर्फ उनकी सजा रद्द कर दी गई बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने महज तीन महीने में नवाज पर से आजीवन प्रतिबंध हटा दिया?

पाकिस्तानी राजनीति के जानकार नवाज को शीघ्र न्याय दिलाने का श्रेय अदालतों को देते हैं लेकिन बहुत से लोग जानते हैं कि यह शहबाज ही थे जो कानूनी चैनलों के माध्यम से चुनावी राजनीति में अपने बड़े भाई की वापसी के लिए पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे।

शहबाज ने निभाया भाई का फर्ज

जब नवाज ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली तो बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित ये दावा कर रहे थे कि अब शाहबाज, नवाज को धोखा देंगे और उन्हें कभी स्वेदश लौटने नहीं देंगे। लेकिन वे सारे के सारे अटकलें गलत साबित हुईं। शहबाज ने हमेशा एक आज्ञाकारी छोटे भाई की तरह व्यवहार किया।

Shehbaz Sharif Politics

4 बार पीएम पद ठुकराया

पाकिस्तान में नवाज का कद बढ़ने के बाद उन्हें कमजोर करने के लिए शहबाज को हमेशा उनसे अलग करने की कोशिशें हुईं। शहबाज को 1990 से 2018 के बीच कम से कम चार बार नवाज शरीफ को धोखा देकर प्रधानमंत्री पद हासिल करने का अवसर आया मगर वह हर बार इसे ठुकराते गए।

सबसे पहले, उन्हें 1992 में दिवंगत राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान द्वारा प्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई थी। वह शहबाज की जगह नवाज को लाना चाहते थे क्योंकि छोटे शरीफ उन दिनों नेशनल असेंबली के सदस्य थे। शहबाज ने इसे ठुकरा दिया।

अक्टूबर 1999 में तख्तापलट से कुछ ही दिन पहले, शहबाज को मुशर्रफ ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने अपने भाई का साथ नहीं छोड़ा। साल 2016 में एक अन्य सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) राहील शरीफ चाहते थे कि शहबाज पीएम बनें।

दरअसल राहील शरीफ तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज ने उन्हें तीन साल का विस्तार और साथ ही फील्ड मार्शल का पद देने से इनकार कर दिया था। ऐसे में राहील ने शहबाज के साथ समझौता करने की कोशिश की लेकिन शहबाज ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद को ठुकरा दिया।

Pakistani politician Shehbaz Sharif

इसके ठीक 2 साल बाद 2018 में जनरल (सेवानिवृत्त) कमर जावेद बाजवा ने शहबाज को यही प्रस्ताव दिया था। इस बार बाजवा चाहते थे कि शहबाज खुद को नवाज की राजनीति से दूर कर लें और सैन्य नेतृत्व छोटे शरीफ को पीएम के तौर पर स्वीकार करने को तैयार है। शहबाज ने बाजवा से साफ कहा कि वह हमेशा सेना के साथ सुलह चाहते हैं लेकिन वह अपने बड़े भाई को धोखा नहीं देंगे।

यह जानना दिलचस्प है कि जनरल मुशर्रफ, जनरल राहील और जनरल बाजवा को नवाज ने नियुक्त किया था, लेकिन इन तीनों ने शहबाज को उनके भाई से अलग करने की कोशिश की। नवाज के आशीर्वाद से शहबाज अंततः अप्रैल 2022 में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास मत के माध्यम से प्रधानमंत्री बन गए।

नवाज शरीफ का पीएम बनना तय

अब जब इमरान खान को दोबारा सत्ता हासिल करने से लगभग दूर कर दिया गया है और पीपीपी के बिलावल कुछ कारामात दिखा पाएंगे इसकी संभावना भी बेहद कम है लगभग तय है कि पीएमएल-एन सरकार बनाने में सफल होगी। ये लगभग तय है कि इस बार नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बनेंगे।

nawaz sharif and Shehbaz Sharif

शहबाज शरीफ का क्या होगा?

खुद उनके छोटे भाई शहबाज बार-बार ये ऐलान कर रहे हैं कि नवाज चौथी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। अब सवाल यह है कि अगर नवाज प्रधानमंत्री बनते हैं और मरियम नवाज पंजाब की मुख्यमंत्री बनती हैं तो शहबाज की भूमिका क्या होगी?

फिलहाल शहबाज के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। जब उनसे ये सवाल पूछा गया तो एक आज्ञाकारी भाई की तरह उनका कहना था, ''नवाज शरीफ को चौथी बार प्रधानमंत्री बनने दीजिए और फिर वह मेरी भूमिका तय करेंगे।''

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