पाकिस्तान में गद्दी पर बैठे हैं इमरान समर्थक राष्ट्रपति, आसानी से सरकार नहीं बना पाएंगे नवाज शरीफ?
पाकिस्तान में राष्ट्रीय चुनाव के लिए वोटों की गिनती रविवार को बिना किसी पार्टी के संसदीय बहुमत हासिल किए संपन्न हो गई, जिससे देश एक और राजनीतिक उथल-पुथल में फंस गया है। चुनाव के बाद किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है।
नवाज की पार्टी PML-N को 75 सीटों पर जीत मिली है। पीपीपी को 54 सीटों पर जीत हासिल हुई है। त्रिशंकु संसद की स्थिति स्पष्ट होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने गठबंधन सरकार बनाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

इस चुनाव में जेल में बंद इमरान खान के समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं हैं। 93 सीटों पर इमरान मगर समर्थक प्रत्याशियों की जीत हुई है। चूंकि ये नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे इसलिए पीटीआई सबसे बड़ी पार्टी कहलाने के योग्य नहीं है।
ऐसे में नवाज शरीफ की पीएमएल-एन सबसे बड़ी पार्टी है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग इस्लामाबाद में कल यानी 12 फरवरी को शाम 7 बजे इस्लामाबाद के जरदारी हाउस में होगी। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में सरकार बनाने या न बनाने पर फैसला हो सकता है।
हालांकि पीपीपी अगर पीएमएल-एन के साथ सरकार बनाने के लिए सहमत भी हो जाती है तो भी नवाज शरीफ का प्रधानमंत्री बनना इतना आसान नहीं रहने वाला है। इसकी वजह देश के सर्वोच्च पद पर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का होना है।
दरअसल पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी इमरान खान समर्थक माने जाते हैं। हालांकि राष्ट्रपति के रूप में आरिफ अल्वी कई चीजें कर सकते थे लेकिन समस्या यह है कि पाकिस्तान में सच्ची शक्ति कभी भी राष्ट्रपति के कार्यालय में नहीं रहती है। लेकिन ऐसे फैसले जिसमें राष्ट्रपति की सहमति जरूरी हो, वहां पर अल्वी, नवाज शरीफ एंड टीम के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
इस बीच पीटीआई के अध्यक्ष गोहर खान ने भी कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र विधायक अपनी स्वतंत्र सरकार बनाएंगे। पीटीआई चीफ ने कहा कि इमरान खान तय करेंगे कि पाकिस्तान का अगला पीएम कौन होगा। उन्होंने चुनाव में बहुमत मिलने का भी दावा किया है।
इससे पहले राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा था पाकिस्तान में बैलेट पेपर की जगह अगर ईवीएम से चुनाव हुआ होता तो नतीजों में ये देरी ना होती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) की नई चुनाव प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) नाकामयाब रही है। अगर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का इस्तेमाल चुनाव में होता तो मतदान के दिन, 8 फरवरी को ही नतीजा आ जाता और देश को मौजूदा संकट का सामना नहीं करना पड़ता।












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