Bilawal Bhutto: मई में बिलावल भुट्टो आएंगे भारत, पाकिस्तान के 'जहरीले' विदेश मंत्री की यात्रा पर लगी मुहर
बिलावल भुट्टो भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहर उगलने के लिए कुख्यात रहे हैं। उनके कश्मीर को लेकर दिए गये बयान के बाद दोनों देशों के संबंध और कड़वे हो गये हैं।

Bilawal Bhutto to Visit India: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, कि संघाई शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो मई महीने में भारत की यात्रा करेंगे। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में आयोजित होने वाली एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
2014 में पीएम मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के दौरान उनके शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नई दिल्ली आने के बाद से, यह किसी प्रमुख पाकिस्तानी नेता की भारत की पहली यात्रा होगी।
जहरीले विदेश मंत्री हैं बिलावल
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी वर्तमान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। पिछले साल अप्रैल महीने में शहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद वह 33 वर्ष की आयु में पाकिस्तान के "सबसे युवा" विदेश मंत्री बने। बिलावल भुट्टो को 2007 में अपनी मां की हत्या के बाद पीपीपी की बागडोर विरासत में मिली थी।
वह उस समय 19 वर्ष के थे और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में पढ़ रहे थे। बीबीसी के मुताबिक, पीपीपी का नेतृत्व करने के लिए बेनजीर के उत्तराधिकारी बिलावल को "भुट्टो विरासत का उपयोग करके पार्टी को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम माना गया"। बिलावल ने अपने नाम के साथ अपने नाना का सरनेम भुट्टो जोड़ा और पूरा नाम बिलावल भुट्टो जरदारी कर लिया।
बिलावल की जुबान पर नहीं है कंट्रोल
पिछले साल पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वाले बिलावल भुट्टो इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। सास 2014 में पाकिस्तान के पंजाब के मुल्तान क्षेत्र में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहने के बाद भुट्टो ने कहा था, उनकी पार्टी पीपीपी भारत से "पूरा कश्मीर" वापस ले लेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भुट्टो परिवार के वंशज ने कहा था कि, "मैं कश्मीर वापस ले लूंगा, और मैं इसका एक इंच भी नहीं छोड़ूंगा, क्योंकि अन्य प्रांतों की तरह पाकिस्तान का है।"
पिछले साल दिसंबर में ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में बिलावल ने कहा था, कि "मैं तो बस ऐतिहासिक तथ्य बता रहा था। मैंने पीएम मोदी पर जो टिप्पणी की, वो मेरी नहीं थी। मैंने वो शब्द नहीं गढ़े। पीएम मोदी के लिए 'गुजरात का कसाई' का इस्तेमाल मैंने नहीं, बल्कि गुजरात दंगों के बाद भारत के मुसलमानों ने किया है। मुझे लगता है मैंने एक ऐतिहासिक तथ्य दोहराया लेकिन वो मानते हैं कि ऐतिहासिक तथ्य दोहराना व्यक्तिगत हमला है।"
SCO की मेजबानी कर रहा भारत
एससीओ की मेजबानी हर सदस्य देश को दी जाती है। एससीओ के आठ सदस्य देशों को रोटनेशनल आधार पर इसकी अध्यक्षता दी जाती है, जो एक साल तक रहती है। इस बार एससीओ की मेजबानी का मौका भारत के हाथ लगा है। आगामी एक साल तक के लिए भारत के पास ये अध्यक्षता सुरक्षित रहने वाली है। एससीओ के अध्यक्षता होने का तात्पर्य किसी संस्थान की अध्यक्ष बनने से नहीं है, बल्कि यह एक तरह से किसी एक देश को मेजबानी दी जाती है।
अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने मुख्य तौर पर सहयोग के तीन विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। स्टार्ट अप और इनोवेशन, विज्ञान एवं तकनीक और पारंपरिक औषधि विज्ञान। इसके साथ ही भारत 2023 के समिट में कुछ ऐसे देशों को बुला सकता है, जिससे चीन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत के अलावा पाकिस्तान, चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गीस्तान और ताजिकिस्तान भी हैं। एससीओ शिखर सम्मेलन इस साल भारत में होने वाला है।












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